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दांडी यात्रा में बापू की छड़ी पकड़ने वाले कनुभाई नहीं रहे

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2017, 5:45 IST
(फाइल फोटो)

दांडी यात्रा में बापू की छड़ी पकड़ने वाले कनुभाई गांधी का निधन हो गया है. कनुभाई राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पोते थे. सूरत के अस्पताल में सोमवार रात को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया.

हार्ट अटैक और लकवा मारने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लंबे अरसे से कनुभाई बीमार चल रहे थे. उनका पूरा नाम कनु रामदास गांधी था. कनुभाई अमेरिका में नासा के वैज्ञानिक भी रह चुके हैं.

इस बीच पीएम मोदी ने ट्वीट करते उनके निधन पर शोक जताया है. पीएम मोदी ने ट्वीट किया, "गांधीजी के पोते कनुभाई के निधन से काफी दुख हुआ है. उनके साथ कई मुलाकातों को याद कर रहा हूं. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे."

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी कनुभाई के निधन पर दुख जताया है. राहुल गांधी ने कहा, "गांधीजी के पोते कनुभाई के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ. परिवार को मेरी शोक संवेदनाएं."

एएनआई

क्या थी दांडी यात्रा?

अंग्रेजों के कठोर नमक कानून को तोड़ने के लिए बापू ने स्वयंसेवकों के साथ 12 मार्च 1930 को दांडी पैदल मार्च शुरू किया था. गांधीजी ने 78 स्वयंसेवकों के साथ साबरमती आश्रम से करीब 358 किलोमीटर दूर स्थित दांडी के लिए प्रस्थान किया था.

24 दिन बाद 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुंचकर बापू ने समुद्र तट के किनारे नमक कानून तोड़ा था. इसी दौरान कनुभाई की महात्मा गांधी के साथ एक तस्वीर काफी चर्चित हुई. जिसमें कनुभाई बापू की छड़ी पकड़े हुए हैं.

नासा से रिटायरमेंट के बाद धोखाधड़ी

कनुभाई गांधी बचपन भारत में बिताने के बाद अमेरिका चले गये थे, जहां उन्होंने नासा में कई साल बतौर वैज्ञानिक काम किया था. रिटायरमेन्ट के बाद उनके साथ धोखाधड़ी हुई और उनके सारे पैसे गबन कर लिये गये.

इसके बाद दुखी मन से कनुभाई भारत वापस आ गए. यहां रहने के लिए कोई जगह न होने पर वो दक्षिण गुजरात के एक वृद्धाश्रम में रहने लगे. उसके बाद जब यह खबर मीडिया में प्रसारित हुई तो उन्हें अहमदाबाद के गांधी आश्रम में लाया गया.

बदहाली से जूझते रहे बापू के पोते

गांधी आश्रम में भी वो ज्यादा दिन नहीं रह पाए और दर-दर भटकते रहे. मीडिया में अलग-अलग खबरें आने के बाद उन्हें कई राजनेताओं ने मदद का आश्वासन भी दिया था, लेकिन जब किसी ने उनके ऊपर कोई ध्यान नहीं दिया तो निराश होकर वह वापस दोबारा सूरत की एक संस्था में रहने के लिए आ गए.

इसी संस्था में कुछ दिन पहले उनका स्वास्थ्य खराब हुआ और उन्हें एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया गया. जहां पिछले कुछ दिनों से वो वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे.

तीन साल पहले लौटे थे भारत

कनुभाई की एक बहन बेंगलुरु में रहती हैं. तबीयत खराब होने की जानकारी मिलने पर वह सूरत आई थीं. कनुभाई सूरत के पार्ले प्वाइंट पर राधाकृष्ण मंदिर के संतनिवास में रह रहे थे. 

पिछले तीन महीनों से वह सूरत के राधाकृष्ण मंदिर में रह रहे थे. उनकी पत्नी भी यहां साथ थीं. तीन साल पहले ही कनुभाई अमेरिका से भारत लौट आए थे. कनुभाई शुरुआत में दिल्ली, वर्धा और नागपुर के बाद मरोली गांधी आश्रम में रहे थे. इसके बाद वो सूरत के एक वृद्धाश्रम में भी कुछ महीने रहे.

First published: 8 November 2016, 9:47 IST
 
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