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पंजाब के बहाने यूपी साधने की कोशिश, बीजेपी पर कांग्रेस व आप का आरोप

राजीव खन्ना | Updated on: 10 October 2016, 7:29 IST

पहले सीमावर्ती इलाके खाली करवाना और अब सीमाएं सील करना, क्या बीजेपी पंजाब की कीमत पर यूपी चुनाव में फायदा उठाना चाहती है? एलओसी के पार सर्जिकल स्ट्राइक के बाद युद्ध की चर्चाओं और देशभक्ति के भावनात्मक उबाल के बीच क्या बीजेपी इस हमले का राजनीतिक लाभ उठाना चाह रही है? वह भी पंजाब की कीमत पर? पिछले 10 दिनों में जो कुछ भी हुआ, उससे तो इस बात के पर्याप्त संकेत मिल रहे हैं.

गौरतलब है पंजाब में बीजेपी का आधार बहुत कम है, जहां यह शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन में सहयोगी है और इस गठबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव हैं, क्योंकि यहां एंटी इंकम्बेन्सी की लहर चल रही है. वैसे भी इसे अक्सर मजबूरी का गठबंधन कहा जाता है.

अब बीजेपी के लिए अकालियों का साथ छोड़ना मुश्किल है, जबकि इसके कार्यकर्ताओं और विधायकों का एक बड़ा वर्ग गठबंधन से अलग होना चाहता है. पार्टी को चुनाव लड़ने के लिए हिन्दू बहुल शहरी क्षेत्र में केवल 23 ही सीटें मिल रही हैं. मौजूदा विधानसभा में इसके 12 विधायक हैं और पार्टी का मत प्रतिशत 7-15 प्रतिशत है. इसके विपरीत उत्तर प्रदेश में पार्टी का आधार कहीं ज्यादा बड़ा है, जहां आगामी विधानसभा चुनाव जीतने के लिए पार्टी जी जान से जुटी है क्योंकि केंद्र में बीजेपी का दोबारा सत्ता में आना इसी पर टिका है.

राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास के 800 गांवों को खाली करवा लिया. उसका दावा है कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह के इशारे पर ऐसा किया गया. अकाली दल के लिए यह निर्णय उल्टा पड़ा क्योंकि सीमा पर युद्ध जैसे तो कोई हालात नजर आए नहीं. कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सीमावर्ती गांवों में जा कर सरकार के इस फैसले की धज्जियां उड़ाते हुए ग्रामीण किसानों से वहीं रहने के लिए कहा. आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने भी इन गांवों में पहुंच कर सरकार के इस आदेश को ‘बड़बोलापन’ बताया.

कैप्टन अमरिंदर सिंह तो पहले ही दिन से कह रहे हैं कि बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूपी चुनावों को देखते हुए जानबूझ कर युद्ध जैसा माहौल बनाना चाहते हैं और अकाली दल के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, पंजाब के किसान हितों की अनदेखी कर चुपचाप उनके नक्शे कदम पर चल रहे हैं.

आदेश को पलटना

इसके बाद बात आती है इस आदेश के पलटने की तो यह पार्टी की किसानों का दिल वापस जीतने की कोशिश है. उन किसानों का जो पिछले 10 दिन में इतने परेशान हुए हैं जितना कि वे इससे पहले कभी नहीं हुए. इतनी बड़ी संख्या में किसानों ने कभी गांव खाली नहीं किए थे.

शुक्रवार को पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने कहा, केंद्र सरकार ने पाकिस्तान से लगी सीमा पर हालात की समीक्षा करने के बाद पंजाब के सीमावर्ती गांवों को खाली करने का फैसला वापस लिया है. केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में जैसलमेर में हुई बैठक में यह फैसला किया गया.

मुख्य सचिव सर्वेश कौशल ने सभी संबंधित जिलों के उपायुक्तों को निर्देश दिए है कि प्रभावितों की सकुशल गांव वापसी के प्रबंध किए जाएं. सुखबीर ने साथ ही कहा कि उन्होंने गृहमंत्री से अनुरोध किया है कि वे सीमा पर बीएसएफ के पीछे पांच सशस्त्र बटालियनों को लगाने की अनुमति दे. उन्होेंने यह भी बताया कि सरकार ने ऐसे 75 पॉइंट की पहचान की है जहां चेक पॉइंट लगाने की जरूरत है.

यह राजनाथ के उस आदेश के बाद किया गया जिसमें उन्होंने दिसम्बर 2018 तक भारत-पाक सीमा को सील करने की बात कही थी.

अमरिंदर ने इस प्रस्ताव को ‘बकवास और बेकार’ करार दिया. उन्होंने कहा राजनाथ सिंह कोरी बयानबाजी कर रहे हैं क्योंकि यहां भारत-पाक सीमा पहले से ही अच्छी तरह सीलबंद है. यहां दोहरी फेन्सिंग हो रही है और दोनों के बीच बाढ़ रोधी कंक्रीट एरिया है. उन्होंने कहा राजनाथ का बयान विभिन्न क्षेत्रों की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर दिया गया नहीं लगता है, इससे पता चलता है कि वे देश की सुरक्षा के बारे में ज्यादा नहीं जानते.

अमरिंदर कहते हैं, ‘क्या वे पंजाब सीमा पर कंक्रीट की दीवार बनाना चाहते हैं. फिलहाल दीवार नहीं पुल बनाने की जरूरत है. शांति के लिए तो बर्लिन की दीवार भी गिरानी पड़ी थी. मोदी सरकार की दमनकारी नीतियों की निंदा करते हुए उन्होंने कहा, 'ये नीतियां भारत को प्रगति के बजाय पीछे धकेल देंगी.'

क्या है समाधान

अमृतसर से लोकसभा सांसद अमरिंदर सिंह ने कहा, राजनाथ सिंह के ऐसे ‘भारी-भरकम’ बयान इस बात का साफ संकेत हैं कि मोदी सरकार सीमा पर फिर से तनाव बढ़ाने की कोशिश में है जो थोड़ा कम होने लगा था. उन्होंने कहा, पड़ोसियों के साथ दीवारें खड़ी करने जैसे बेकार के उपायों में निवेश करने से समाधान नहीं मिलेगा बल्कि उनके साथ संबंध बेहतर बनाने के उपाय करने होंगे.

सीमा पर सीलबंदी होने से ही कोई समस्या का समाधान निकलेगा, यह भी जरूरी नहीं है. अमरिंदर ने कहा, अगर गृह मंत्री के प्रस्ताव अनुसार, अगर सीमाएं सील कर दी गईं तो सीमा के दोनों ओर किसानों का क्या हाल होगा? राजनाथ का सुझाव व्यवहारगत और मानवीय दोनों ही दृष्टि से भयावह है.

आम आदमी पार्टी ने भी गांव खाली कराने और फिर इस पर राजनीति करने के लिए सरकार को आड़े हाथों लिया. पंजब में पार्टी प्रभारी संजय सिंह ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरविंद केजरीवाल को निशाना बनाए जाने पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा आप बीजेपी द्वारा उसके नेतृत्व की देशभक्ति पर सवाल उठाना बर्दाश्त नहीं करेगी और वह भी उस व्यक्ति द्वारा जो कि खुद फर्जी पुलिस एंकाउंटर का आरोपी हो. अगर बीजेपी सर्जिकल स्ट्राइक को मुद्दा बनाएगी तो पार्टी चुप बैठने वाली नहीं है.

आप के प्रदेश संयोजक गुरप्रीत सिंह घुग्गी उर्फ वराइच ने रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक की शाबाशी लेने के लिए गोवा से यूपी जाने की आलोचना की. उन्होंने कहा यह सब कुछ नहीं बस राजनीतिक हथकंडे हैं. बजेपी देश भर में सर्जिकल स्ट्राइक के पोस्टर लगा रही है जो इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने से अधिक कुछ नहीं है.

First published: 10 October 2016, 7:29 IST
 
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