Home » इंडिया » Surgical strike for transparency in political parties
 

राजनीतिक दलों पर सर्जिकल स्ट्राइक, चंदे की सीमा 2 हज़ार हुई

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 February 2017, 13:59 IST

लोकसभा में साल 2017 का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, 'एक राजनीतिक पार्टी एक व्यक्ति से अधिकतम 2000 रुपये का कैश चंदा ले सकती है. इससे ज़्यादा की राशि अब चेक या इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर के ज़रिए राजनीतिक दलों के कोष में पहुंचेगी.' वित्त मंत्री की यह घोषणा राजनीतिक दलों के कोष में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम है. 

मुख्य चुनाव आयोग ने बीते साल दिसंबर में सरकार से कहा था कि राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे के नियमों में बदलाव किए जाएं. आयोग ने कहा था कि यह बाध्यता ख़त्म होनी चाहिए जिसमें राजनीतिक दलों को 20 हजार से कम का चंदा देने वाले दानदाताओं का नाम नहीं बताने आज़ादी है. आयोग ने सिफ़ारिश की थी कि सरकार नियमों में बदलाव कर इस बाध्यता को 2 हज़ार रुपए तक कर दे. 

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम बजट 2017 में इस बाध्यता को ख़त्म कर दिया है. अब राजनीतिक दलों के कोष में 2 हज़ार से ज़्यादा दी जाने वाली राशि चेक या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से होगी. ज़ाहिर है कि इस ऐलान से ना सिर्फ राजनीतिक दलों के कोष में पारदर्शिता आएगी बल्कि काले धन को सफेद करने का चलन भी घटेगा. 

चुनाव सुधारों के लिए काम करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स ने हाल ही में राजनीतिक दलों के चंदे पर एक रिपोर्ट जारी की थी. इसमें कहा गया था कि 2004-2005 से 2014-15 के बीच सभी राजनीतिक दलों को मिले चंदे का दो तिहाई से अधिक चंदा अज्ञात स्रोतों से आया है. इस दौरान राजनीतिक दलों को 11367.34 करोड़ का चंदा मिला था जिसमें से 7832.98 करोड़ रुपए कहां से आए, इसके स्रोत का खुलासा नहीं किया गया था. 

वित्त मंत्री के ऐलान के बाद अब इतने बड़े पैमाने पर अज्ञात स्रोत से राशि नहीं दिखाई जा सकेगी क्योंकि अब चंदा देने वालों की बाध्यता 20 हज़ार से घटाकर 2 हज़ार कर दी गई है. एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 11 सालों में कांग्रेस के कोष में 83 प्रतिशत यानी कि 3323.39 करोड़ रुपये और भाजपा के कोष में 65 प्रतिशत यानी 2125.91 करोड़ रुपये अज्ञात स्रात से जमा किए गए.  

इसी तरह क्षेत्रीय राजनीतिक दलों में सपा की 94 प्रतिशत आय और शिरोमणि अकाली दल की 86 प्रतिशत आय अज्ञात स्रोतों से आई. राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों में बसपा ही एक मात्र पार्टी ऐसी रही जिसकी 100 प्रतिशत आय अज्ञात स्रोतों से हुई. यानी कि पार्टी को एक भी डोनेशन 20 हजार रुपये से अधिक का नहीं मिला. 2004-05 में बसपा की आय जहां 5.19 करोड़ थी, वहीं 2014-15 में यह बढ़कर 111.96 करोड़ हो गई. 

यह रिपोर्ट जारी करते हुए एडीआर ने मांग की थी कि राजनीतिक दलों को राइट टू इन्फॉरेमेशन के तहत अपने सभी दानदाताओं के नाम उजागर करना अनिवार्य बनाया जाए. तब संस्था ने कहा था कि पड़ोसी देश नेपाल और भूटान समेत जर्मनी, फ्रांस, इटली, ब्राजील, बुल्गारिया, अमरीका और जापान में यह प्रावधान पहले से ही लागू है. इनमें से किसी देश में यह संभव नहीं है कि राजनीतिक दलों का 75 प्रतिशत चंदा या आय के स्रोत अज्ञात रहे. मुमकिन है कि वित्त मंत्री की घोषणा के बाद अब इसमें पारदर्शिता आएगी. 

First published: 1 February 2017, 13:59 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी