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विकलांगता पेंशन कटौती: सेना पर केंद्र सरकार की सर्जिकल स्ट्राइक

सुहास मुंशी | Updated on: 11 February 2017, 5:47 IST
QUICK PILL
  • सेना और अर्द्धसैनिक बलों के जवान जब नियंत्रण रेखा पर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दे रहे थे, तब सरकार उन्हें मिलने वाली रियायतों में कटौती की तैयारी कर रही थी. 
  • सैनिकों की विकलांगता पेंशन में इस कदर कटौती की गई है कि मासिक पेंशन 45 हज़ार से 27  हज़ार पहुंच गई है. 

नरेंद्र मोदी सरकार और मीडिया एलओसी पर सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर भले ही बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हों लेकिन इससे कम वेतन और पेंशन को लेकर सैनिकों के बीच फैले असंतोष पर कोई फर्क नहीं पड़ा है.  

रक्षा मंत्रालय ने हाल ही जवानों की विकलांगता पेंशन में कटौती करके एक बार फिर उस धारणा को बल दिया है कि सरकारें सैनिकों के प्रति चाहे जितना प्रेम दिखा लें, लेकिन कोई सरकार उन्हें अच्छा वेतन देने को तैयार नहीं है, जिसके वे हकदार हैं.

विश्लेषकों ने नकारा

एक रक्षा विशेषज्ञ के मुताबिक जैसे ही सैनिकों की विकलांगता पेंशन में कटौती की ख़बर आई, सरकार के सैनिकों के प्रति रवैये पर एक मेल सर्कुलेट कर दी गई. इसका शीर्षक था, 'सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारतीय सेना को शाबाशी, सच्चाई- डीजीएमओ को गोवा के डीजी पुलिस से भी कम वेतन मिलता है.' विशेषज्ञ इसे सैनिकों पर सर्जिकल स्ट्राइक का नाम दे रहे हैं. सौ प्रतिशत दिव्यांग सैनिक की मासिक पेंशन 45 हज़ार रुपए से 27 हज़ार रुपए कर दी गई है.

संयोग की बात यह है कि जब सेना के जवान नियंत्रण रेखा पर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दे रहे थे, तभी पेंशन में कटौती के फैसले पर मुहर लग गई. रक्षा विशेषज्ञ सी उदय भास्कर ने पेंशन में कटौती को भयावह कदम बताया है. वेतन आयोग पहले ही सेना को लगातार कम महत्व देते आए हैं. जो फ़ौज के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया है. 

माना जा रहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना की शिकायतों की समीक्षा करने के निर्देश दिए थे. मगर पेंशन कटौती की 30 सितंबर को जारी अधिसूचना भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र के प्रबंधन के अनुकूल नहीं है. 

एक और झटका देने की तैयारी

मंत्रालय का यह फ़ैसला सिर्फ सेना पर नहीं बल्कि अर्द्धसैनिक बलों पर भी लागू होगा. जिन रिटायर्ड अर्द्धसैनिक बलों को विकलांगता फंड नहीं मिलता, उन्होंने कहा, 'सरकार का यह निर्मम रवैया उन लोगों के लिए है जो देश की सेवा करते हुए गंभीर रूप से घायल हुए.'

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के पूर्व आईजी रहे वीएस पंवार ने कहा, 'ऐसे बहुत से मामले हैं, जब हमारे जवान गंभीर रूप से घायल हुए और वे रुपयों की कमी में ज़िंदगी काट रहे हैं. सैनिकों की तारीफ़ करना अलग बात है. सरकार को इस बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए कि वह देश के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले जवानों के साथ कैसा व्यवहार करती है. 

First published: 13 October 2016, 7:43 IST
 
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