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सर्जिकल स्ट्राइक प्लान करने वाले अफसर का खुलासा- फैसला पूरा तरह राजनीतिक नेतृत्व का था

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 June 2018, 14:29 IST

करीब 2 साल पहले 29 सितंबर को भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सीमा में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था, जिसका वीडियो अब सामने आया है. तब भारतीय सेना ने पाकिस्तान की सीमा में तीन किमी भीतर घुसकर पाकिस्तानी बंकरों को बर्बाद किया था और आतंकियों को मौत के घाट उतारा था.

वीडियो के बाद मोदी सरकार और विपक्षी पार्टियों में बयानबाजी तेज हो गई है. कांग्रेस ने मोदी सरकार पर इसका राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करने का आरोप लगाया. वहीं सरकार ने भी कांग्रेस पर देश विरोधी होने और सेना पर सवाल उठाने का आरोप लगाया था.

इस बीच सर्जिकल स्ट्राइक की निगरानी करने वाले अफसर पूर्वी नॉर्दर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डीएस हुडा ने कहा है कि ये फैसला पूरी तरह से राजनीतिक नेतृत्व का था. उन्होंने कहा कि इस फैसले पर सेना पूरी तरह से सहमत थी, क्योंकि हम कुछ करना चाहते थे. हुड्डा बोले कि अगर हम भविष्य में भी पाकिस्तान को कड़ा जवाब देना चाहते हैं तो ये हम दोबारा भी कर सकते हैं.

 

 

बता दें कि कांग्रेस की तरफ से वीडियो की टाइमिंग पर सवाल उठाए गए थे. कांग्रेस का आरोप था कि मोदी सरकार सर्जिकल स्ट्राइक का राजनीतिकरण कर रही है. कांग्रेस की ओर से रणदीप सुरजेवाला ने कहा था कि बीजेपी ने देश के शहीदों के बलिदान का अपमान किया. उनकी शहादत का इस्तेमाल किया है. जबकि यूपीए कार्यकाल में भी सर्जिकल स्ट्राइक हुई थी.

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इस पर अब मोदी सरकार और बीजेपी की ओर से पलटवार हुआ. केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस लगातार सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठा रही है. इससे पाकिस्तानी आतंकवादियों को खुशी मिल रही होगी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सर्जिकल स्ट्राइक को खून की दलाली कहा था. उनकी माता सोनिया गांधी ने इससे पहले मौत के सौदागर जैसे शब्दों का प्रयोग कर चुकी हैं.

First published: 29 June 2018, 14:29 IST
 
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