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सर्जिकल हमलाः भारत-पाक परमाणु युद्ध की दस्तक तो नहीं?

सुहास मुंशी | Updated on: 1 October 2016, 2:26 IST
QUICK PILL
  • पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक की ख़बर पर कश्मीरियों को पहले यक़ीन नहीं हुआ. बहुत देर तक भारतीय सेना के दावे पर शक किया जा रहा था. पुष्टी होने के बाद कई कश्मीरियों ने सोशल मीडिया पर लिखा, \'सुनने में यह भले ही बुरा लगे लेकिन सच्चाई हमेशा वह नहीं होती, जो हम देखना चाहते हैं. युद्ध के बजाय बातचीत ही सबसे बेहतर उपाय है.\'

कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार सर्जिकल हमले से वे लोग हैरान हैं, जो उरी हमले के बाद भारत की ओर से पाक के खिलाफ जवाबी सैन्य कार्रवाई की उम्मीद छोड़ चुके थे, क्योंकि भारत लगातार उसे दुनिया में अलग-थलग करने का कूटनीतिक कदम उठाने की बातें करता आ रहा था.

हमलों के तुरंत बाद जिन-जिन तक यह खबर पहुंची, सभी सोशल मीडिया और व्हाट्स एप ग्रुप को खंगालने में जुट गए. पहले तो इस बात पर लंबी बहस चली कि क्या ‘सच में हमला’ हुआ है, क्योंकि पाक के इनकार के बाद बहुत से लोग हमले के इस दावे पर शक कर रहे थे.

हालांकि, बाद में जब खबर पक्की हो गई तो इस तरह के कमेंट आने लग गए कि दोनों देशों को इस बेमतलब की कवायद की बजाय बातचीत के जरिये मुद्दों को हल करना चाहिए, ‘खास तौर पर कश्मीर.’

ज़मीनी हकीकत

फेसबुक पर खुर्शीद अहमद ने लिखा, ‘नियंत्रण रेखा पर सर्जिकल हमला या पूर्ण युद्धः कश्मीर मुद्दे का हल केवल तभी हो सकता है, जब इसके सभी पक्षकारों मुख्य रूप से कश्मीर के लोगों से बात की जाए.

‘भारत और पाकिस्तान चाहे एक दूसरे के खिलाफ हमले और कूटनीतिक वाक् युद्ध जारी रखें, लेकिन घाटी में दरअसल कुछ भी बदलता नजर नहीं आ रहा. सुनने में यह भले ही बुरा लगे लेकिन सच्चाई हमेशा वह नहीं होती, जो हम देखना चाहते हैं. युद्ध के बजाय बातचीत ही सबसे बेहतर उपाय है.

कुछ लोग यह बात करते देखे गए कि सर्जिकल हमला क्षेत्र में सुरक्षा की कमी की ओर इशारा करता है, ऐसे तो कोई भी अब इस तरह के हमलों को अंजाम दे सकेगा.

नसीर अहमद ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा ‘यह दीगर बात है कि भारत ने हमला किया या नहीं, लेकिन सर्जिकल हमले के इसके दावे ने भविष्य में दक्षिण एशिया के लिए ऐसे हमलों को अंजाम देने का रास्ता साफ कर दिया है.’

आज के बाद भारत की तरह कोई भी देश किसी भी दूसरे देश के खिलाफ सर्जिकल हमला कर सकता है और अपनी कार्रवाई के पक्ष में कोई भी तर्क देकर उसे न्ययोचित ठहरा सकता है.

हमला किया गया या नहीं?

हालांकि, राह चलते लोगों को शुरू में विश्वास ही नहीं हुआ कि हमला हुआ है या नहीं. श्रीनगर में रावलपोरा में एक दुकानदार अली मुहम्मद मीर ने कहा, मुझे लगता है यह एक नियंत्रण रेखा पर आम गोलीबारी की घटना है, जिसे सर्जिकल स्ट्राइक के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है ताकि उरी हमले के बाद जनता में व्याप्त आक्रोश को शांत किया जा सके.

‘वरना पाक इससे इनकार क्यों करता? पाकिस्तान इस बात की पुष्टि क्यों नहीं कर रहा. अगर शिविरों को नष्ट कर दिया है और कई लोग मारे जा चुके हैं? तो पाकिस्तान क्यों इनकार कर रहा है. वे इसे क्यों छिपा रहे हैं और क्या छिपाना चाहिएं?’

एक सेवानिवृत्त स्कूल शिक्षक,मुहम्मद यूसुफ ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी युद्ध का खामियाजा कश्मीर को भुगतना होगा. उन्होंने कहा ‘हम पिछले सत्तर साल से यह सब झेल रहे हैं और हमें फिर से यह झेलना होगा. बजाय इसके क्यों नहीं दोनों देश बैठ कर कश्मीर मसले का हल कर लेते ताकि क्षेत्र से युद्ध और संघर्ष की सारी वजहें समाप्त हो जाएं.

चुप्पी क्यों?

दूसरी ओर, अलगाववादी समूह इस मामले में अधिक सावधानी बरतते नजर आए. सभी अलगाववादी संगठन व्यक्तिगत रूप से और हुर्रियत कांफ्रेंस के बैनर तले दैनिक प्रेस पत्रकारों और स्थानीय मीडिया को रोज बसान जारी करते हैं लेकिन इन बयानों में हमले का कोई जिक्र नहीं किया गया.

यहां तक कि संयुक्त अलगाववादी तिकड़ी सैयद अली गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और यासीन मलिक के नाम पर जारी बयान में हमले की बात को नजरंदाज करके राज्य में ‘मानव अधिकार ज्यादतियों’ को उजागर किया. बयान में मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की भी यह कहकर खिंचाई की गई कि उन्होंने कहा था भारत दुनिया में मुसलमानों के लिए सबसे सुरक्षित जगह है.

मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व वाले नरमपंथी हुर्रियत गुट ने दोपहर तक एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके, ‘नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान पर भारत की ओर से अकारण गोलीबारी’ पर शोक व्यक्त किया.

बयान में कहा गया ‘सैन्य आक्रमण और युद्ध किसी भी समस्या का कोई समाधान नहीं है. इससे समस्याएं बल्कि और बढ़ जाती हैं. दोनों दोनों देशों के बीच पिछले तीन युद्धों से यही साबित हुआ है.

अलगाववादी तिकड़ी ने दोनों देशों के लोगों के बीच युद्ध और टकराव की भावना भड़काने के लिए इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया की आलोचना की.

बयान में कहा गया ‘हम नई दिल्ली और इस्लामाबाद का आह्वान करते हैं कि वह तनाव कम करें. दो परमाणु पड़ोसियों को परिपक्व व्यवहार करना होगा. और बजाय टकराव के जो पूरे क्षेत्र के लिए केवल विनाशकारी हो सकता है, मुद्दों को हल करने और शांति बहाली के लिए बातचीत करनी चाहिए.’

महबूबा की शांति की अपील

हालांकि, मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने हमले के तुरंत बाद प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि संयम रखें और स्थिति को भयावह न बनाएं वरना यह काफी गंभीर रूप ले सकता है. उन्होंने कहा, नई दिल्ली और इस्लामाबाद को सीमा पर चल रहे टकराव बढ़ने के गंभीर परिणामों पर विचार करते हुए आपसी बातचीत के रास्ते खोलने होंगे.

उन्होंने कहा, हमें जम्मू-कश्मीर में बेवजह हिंसा की मार झेलनी पड़ी है और हमें इसके खतरों और गंभीर परिणामों के बारे में बहुत अच्छी तरह से पता है. जम्मू-कश्मीर सीमा पर और इसके भीतर शांति बने रहना लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और मुझे आशा है कि दोनों देशों के राजनेता भी इस भावना को समझेंगे.’

राष्ट्रीय विपक्षी दलों के नेताओं के विपरीत, महबूबा सफल हमले के लिए सेना को बधाई देने के मामले में पीछे ही नजर आईं. उन्होंने भारत और पाकिस्तान की दुश्मनी को ‘दो भाइयों के बीच एक अंतहीन प्रतिद्वंद्विता’ कहा और आगाह किया कि परमाणु हथियारों से लैस पड़ोसी देशों के बीच युद्ध ही एकमात्र विकल्प नहीं होना चाहिए.

मुख्यमंत्री ने दोनों देशों से इस्लामाबाद में 9 दिसंबर, 2015 को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और उनके पाकिस्तानी समकक्ष सरताज अजीज की बैठक के बाद जारी किए गए संयुक्त वक्तव्य की भावना को पुनर्जीवित करने का आग्रह किया.

उन्होंने कहा, ‘दोनों पक्ष शांति और सुरक्षा, पर एक व्यापक द्विपक्षीय वार्ता शुरू करने के लिए सहमत हुए थे. इनमें विश्वास बहाली के उपाय, जम्मू और कश्मीर, सियाचिन, सर क्रीक, वुल्लर बैराज / तुलबुल नौवहन परियोजना, आर्थिक और वाणिज्यिक सहयोग, आतंकवाद का मुकाबला, नारकोटिक्स कंट्रोल, मानवीय मुद्दों और धार्मिक पर्यटन शामिल है.

विपक्ष की सहमति

नेशनल कांफ्रेंस ने भी बयान जारी करने में काफी वक्त लिया. और अंत में जब यह बयान आया तो, वह भी उमर अब्दुल्ला से नहीं, उनके पिता फारूक अब्दुल्ला, से आया जो पार्टी के अध्यक्ष भी हैं.

उमर ने ट्विटर पर लिखा ‘केवल नियंत्रण रेखा की स्थिति पर पार्टी अध्यक्ष द्वारा जारी किए गए बयान को ही पार्टी का आधिकारिक माना जाए. बाकी अन्य कोई भी बयान एक निजी विचार है.’ वरिष्ठ अब्दुल्ला, ने अपने बयान में भारत और पाकिस्तान दोनों का आह्वान किया कि संयम बरतें और बातचीत के सभी रास्ते खुले रख नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तनाव कम करें.

‘हमें उम्मीद है ठंडे दिमाग से काम लिया जाएगा और 2003 के संघर्ष विराम को बरकरार रखा जाएगा. हम नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास रहने वाले लोगों के साथ हैं क्योंकि ऐसे हालात में वे ही सबसे अधिक पीड़ित होते हैं. अब्दुल्ला कहा कि दोनों देशों की सरकारों को शांति बहाली के मौजूदा उपायों को बरकरार रखने के लिए जिम्मेदारी से पेश आना होगा.

‘नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच दुश्मनी या टकराव के नतीजे अतीत में भी अच्छे नहीं रहे. सभी मुद्दों और चिंताओं पर गंभीरता से विचार करना होगा और क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सहयोग प्राप्त करने के लक्ष्य पर चर्चा की जानी चाहिए.’

First published: 1 October 2016, 2:26 IST
 
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