Home » इंडिया » Surgical strikes sting: Why CNN-TV18's sting on a PoK cop doesn't add up
 

सीएनएन-न्यूज18 स्टिंग: सर्जिकल स्ट्राइक की बात मानी लेकिन सवाल जस के तस

आदित्य मेनन | Updated on: 7 October 2016, 7:45 IST

सीएनएन-न्यूज18 ने बुधवार की शाम पाक अधिकृत कश्मीर के पुलिस अधीक्षक पर एक स्टिंग आपरेशन किया. इसमें पुलिस अधीक्षक ने माना है कि 28/29 सितम्बर की रात उनकी तरफ वाली लाइन आफ कन्ट्रोल की कई जगहों पर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया था. हालांकि, पाकिस्तान की सेना और वहां के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ अभी तक भारत की सर्जिकल स्ट्राइक की बात को नकार कह रहे हैं, लेकिन पुलिस अधिकारी की इस कन्फर्मेशन से उनका झूठ खुद ही सामने आ गया है।

न्यूज18 के रिपोर्टर ने खुद को पाकिस्तान पुलिस के आईजी मुश्ताक के रूप में पेश किया और मीरपुर रेंज के एसपी (इंटेलीजेंस) गुलाम अकबर से बात

करते हुए उस रात घटना की जानकारी मांगी. अकबर ने नीचे लिखे स्थानों की पहचान की, जहां हमले की घटना को अमलीजामा पहनाया गया था.

इनमें भीमबेर का समाना, पुंछ का हाजिरा, नीलम का दूधनियाल, हथियान बाला का कायानी इलाक़ा शामिल हैं.

सीएनएन-न्यूज18 ने दावा किया है कि अकबर ने भारतीय डायरेक्टर जनरल आफ मिलिट्री आपरेशन्स (डीजीएमओ) के ले. जन. रणबीर सिंह की एक-एक लाइन की तस्दीक की है जो उन्होंने 30 सितम्बर को प्रेस कांफ्रेंस में संवाददाताओं से कही थी. ले. जन. ने पत्रकारों से कहा था कि भारत ने पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया है जिसमें आतंकियों के लांच पैड को नष्ट कर दिया गया है.

अकबर ने बहुमूल्य जानकारी देते हुए न्यूज18 के रिपोर्टर, जिसने खुद को आईजी मुश्ताक बनकर यह नाटक किया था, को यहां तक जानकारी दे डाली कि सर, मोटे तौर पर 3-4 घंटे तक... रात के 2 बजे से सुबह 4 या 5 बजे तक हमला होता रहा. इस बातचीत की वैधता पर कोई भी संदेह नहीं कर रहा है. इस स्टोरी से कुछ सवाल उभरते ही हैं.

अनसुलझे तथ्य

इस बात का तो प्रमाण मिल गया है कि आजाद जम्मू-कश्मीर पुलिस में गुलाम अकबर नाम के एक व्यक्ति हैं जो एसपी रैंक के अधिकारी हैं. (खबर में पाकिस्तान पुलिस के रूप में जिक्र नहीं किया गया है) इंटरनेट पर तुरन्त ही सर्च करने के बाद 2011 की एक न्यूज रिपोर्ट से खुलासा होता है कि वह मीरपुर में एसएसपी थे. इस बात का पक्का प्रमाण नहीं मिल सका है कि आईजी मुश्ताक नाम के कोई सज्जन आजाद जम्मू-कश्मीर पुलिस में थे.

हालांकि, यहां संदेह नाम के उच्चारण अथवा नामावली को लेकर नहीं है. लेकिन कार्यक्षेत्र का सवाल है. अकबर ने सर्जिकल स्ट्राइक किए जाने वाले जिन चार स्थानों की पहचान की है, उसमें से केवल एक ही वाकई में उनके कार्यक्षेत्र में आता है.

पाक अधिकृत कश्मीर या आजाद जम्मू और कश्मीर में तीन एडमिनिस्ट्रेटिव डिवीजन हैं जिन्हें मीरपुर, मुजफ्फराबाद और पुंछ के नाम से जाना जाता है. अकबर ने जिन चार क्षेत्रों की पहचान की है उसमें से केवल एक भीमबेर का समाना ही, उनके मीरपुर रेंज में आता है. मीरपुर रेंज में ही वह तैनात हैं.

हाजिरा पुंछ के डिवीजन में है जबकि दूधनियाल और कायानी दोनों मुजफ्फराबाद डिवीजन में है. यह बात अलग है कि ये अकबर के क्षेत्राधिकारमें नहीं आते हैं. अकबर ने एक अन्य स्थान पीओके के अतमूक्वाम का ज़िक्र किया है. वह कहते हैं कि यहां तक कोई नहीं पहुंचा. जबकि सच्चाई यह है कि यह क्षेत्र मुजफ्फराबाद डिवाजन में पड़ता है.

एक अन्य कारण से भी यह सवाल पूछे जाने की जरूरत है कि क्या अकबर ऐसे पद पर हैं जो आधिकारिक रूप से यह बताने में अधिकार सम्पन्न हों कि इन क्षेत्रों में हमले हुए या नहीं. उन्होंने हमलों के सटीक समय तक की भी जानकारी दे डाली है. अकबर के बयान को पूर्णसत्य सुखद समाचार मानने में सबसे ज्यादा कठिनाई यह भी है कि मीरपुर, जहां अकबर तैनात हैं, वहां से इन जगहों की दूरी बहुत अधिक है. कोई भी इस दूरी को देख सकता है.

जगह और उनके बीच की दूरी

दूधनियाल

जिला-नीलम

डिवीजन-मुजफ्फराबाद

मीरपुर से दूरी-466 किमी

कायानी

जिला-हथियान बाला

डिवीजन-मुजफ्फराबाद

मीरपुर से दूरी-245 किमी

स्थान-हाजिरा

जिला-पुंछ

डिवीजन-पुंछ

मीरपुर से दूरी-112 किमी

अतमूक्वाम

जिला-नीलम

डिवीजन-मुजफ्फराबाद

मीरपुर से दूरी-342 किमी

इसमें से केवल भीमबेर का समाना क्षेत्र अकबर के कार्यक्षेत्र में आता है, जहां के वह एसपी (इंटेलीजेन्स) हैं. यह क्षेत्र मीरपुर में पड़ता है. यह स्थान मीरपुर से केवल 67 किमी है. लेकिन, यहां समस्या तो यह है कि अकबर जो कुछ कह रहे हैं, वह पाकिस्तानी सेना के बयान से ज्यादा अलग नहीं है, जिसे वह पहले ही स्वीकार कर चुकी है. पाकिस्तानी सेना ने स्वीकार किया है कि भीमबेर में हमला हुआ है और वहां उसे काफी नुकसान उठाना पड़ा है.

सीएनएन-न्यूज18 को उसकी चतुराई और बारीक प्रयोग के लिए श्रेय दिए जाने की जरूरत है कि उसने पाकिस्तान पुलिस के अधिकारी को फोन करने का निश्चय किया और उनके बयान को सर्जिकल स्ट्राइक पर इल्जाम लगाने वाले सबूत के रूप में नहीं लिया जा सकता.

First published: 7 October 2016, 7:45 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी