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बीजेपी के लिए कहीं मांझी न साबित हों स्वामी प्रसाद मौर्य

हरिओम द्विवेदी | Updated on: 16 August 2016, 15:37 IST
(पीटीआई)
QUICK PILL
  • राजनीतिक गलियारों मेें इस बात की चर्चा जोरों पर है कि बीजेपी के लिए स्वामी प्रसाद मौर्य कहीं दूसरे जीतन राम मांझी न साबित हो जाएं.
  • हाल ही में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में स्वामी प्रसाद मौर्य ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी.
  • यूपी विधानसभा में नेता विपक्ष रहे स्वामी प्रसाद मौर्य ने बसपा सुप्रीमो मायावती पर टिकटों की बिक्री का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी थी.

आगामी विधानसभा चुनाव में जीत के लिए भाजपा हर नया-पुराना पैंतरा आजमा रही है. 'खास' उम्मीद के साथ बसपा के पूर्व नेता स्वामी प्रसाद मौर्य को पार्टी में शामिल किया गया है. लेकिन बीजेपी की 'खास' उम्मीद पर स्वामी कितना खरा उतरेंगे यह भविष्य के गर्त में है. राजनीतिक गलियारों और चौक-चौबारों मेें इस बात की चर्चा जोरों पर है कि बीजेपी के लिए स्वामी प्रसाद मौर्य कहीं दूसरे जीतन राम मांझी न साबित हो जाएं. वही मांझी जिन्हें भाजपा ने बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 'खास' मकसद से पार्टी में शामिल किया था.

यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी में स्वामी प्रसाद मौर्य शामिल तो हो गये हैं पर यहां उनकी राह इतनी आसान नहीं होने जा रही है. अक्सर देखा गया है कि मजबूरी के रिश्ते मजबूती में बहुत कम ही बदल पाते हैं. इस लिहाज से बीजेपी में स्वामी प्रसाद मौर्य के सामने कई अहम चुनौतियां होंगी, जिनको पार किए बिना उनके और भाजपा के रिश्तों में मजबूती नहीं आ सकती. तो आइए जानते हैं बीजेपी में पहुंचे स्वामी प्रसाद मौर्य के सामने मौजूद पांच अहम चुनौतियां:

खुद की छवि

यूपी की राजनीति को करीब से जानने वालों की मानें तो बीजेपी में शामिल होने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य को खुद को काफी बदलना होगा. राजनीति के शुरुआती दिनों में वो समाजवादी विचारधारा से प्रभावित थे. पर उन्होंने बसपा में लंबी राजनीतिक पारी खेली. बसपा में सिर्फ एक 'आका' यानी मायावती की ही सुननी थी, जबकि बीजेपी में स्थिति इसके उलट है. यहां आगे बढ़ने के लिए कदम-कदम पर सबको साधना पड़ता है. साथ ही नेताओं की टांग खिंचाई से भी बचना होगा.

फूंक-फूंककर रखना होगा कदम

स्वामी प्रसाद मौर्य के बीजेपी में शामिल होते ही इस खबर को लेकर सुगबुगाहट भी शुरू हो गई है कि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य, स्वामी को पार्टी में शामिल किए जाने से बहुत खुश नहीं हैं. क्योंकि पिछड़ी जातियों के लीडर के रूप में केशव मौर्य पहले से ही खड़े हैं, ऐसे में स्वामी उनके समानांतर दूसरे मौर्य की क्या जरूरत है.

पिछड़े लीडर के रूप में केशव मौर्य पहले से ही खड़े हैं, ऐसे में उनके समानांतर दूसरे मौर्य की क्या जरूरत है.

स्थितियों पर गौर करें तो बीजेपी में स्वामी प्रसाद मौर्य के सामने फूंक-फूंककर कदम रखने वाली स्थिति होगी. स्वामी प्रसाद मौर्य इसे अच्छी तरह से जानते हैं कि पार्टी में खुद को स्थापित करना उनके लिए आसान नहीं होगा. इसलिए वो अपने स्वागत समारोह के समय से ही यह संदेश देने की कोशिश में लगे रहे कि उनका संपर्क सीधे पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से है. मतलब प्रदेश के बड़े नेता उनके मामले में दखअंदाजी न करें.

स्वामी की भूमिका

जानकारों की मानें तो भाजपा के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि वह स्वामी प्रसाद मौर्य का इस्तेमाल कैसे करे. क्योंकि मौर्य बसपा को धूल चटाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. लेकिन लड़ाई में तो सपा भी शामिल है. ऐसे में पार्टी अकेले स्वामी प्रसाद मौर्य पर बड़ा दांव लगाने से तो बचेगी. लेकिन अगर पार्टी में स्वामी को अपेक्षाकृत कोई छोटी जिम्मेदारी मिली तो उनका पूरा इस्तेमाल न कर पाना भी बीजेपी के लिए चिंता का विषय बनेगा.

स्वामी के विवादित बोल

पूर्व में हिंदू देवी देवताओं पर स्वामी प्रसाद मौर्य के विवादित बोल भी अब उनके लिए बड़ी समस्या बन सकते हैं. वो पूर्व में भाजपा को देसी आतंकवादी और बीजेपी के फायर ब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ को लाशों का सौदागर तक कह चुके हैं. इतना ही नहीं गुजरात दंगे को लेकर उन्होंने पीएम मोदी को कसाई भी कहा था. देवी-देवताओं के अपमान के एक मामले में तो उनके खिलाफ मुकदमा भी चल रहा है.

मजूबरी का साथ

स्वामी प्रसाद मौर्य के मामले में एक सबसे बड़ी समस्या है कि उन्होंने राजनीतिक मजबूरी में बीजेपी का एक-दूसरे का दामन थामा है. बसपा से निकलने के बाद स्वामी के समाजवादी पार्टी में शामिल होने की अटकलें शुरू हो गई थीं.

गुजरात दंगे को लेकर स्वामी प्रसाद मौर्य ने पीएम मोदी को कसाई भी कहा था.

सीएम अखिलेश यादव और प्रदेश के कैबिनेट मिनिस्टर शिवपाल यादव ने सार्वजनिक मंच से उनकी तारीफों में कसीदे पढ़े थे. लेकिन बात नहीं बनी तो उन्होंने समाजवादी सरकार पर निशाना साधा. अपनी पार्टी भी बनाई. तमाम जद्दोजहद के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य भाजपा में शामिल हो गये.

राजनीतिक जानकारों की मानें तो राजनीतिक मजबूरी ही सही पर स्वामी ने अब भाजपा का दामन थाम लिया है. उनको पार्टी में कोई भी जिम्मेदारी मिले, पर उनका बेहतर प्रदर्शन से ही तय होगा कि भाजपा में उनकी राजनीतिक पारी कितनी लंबी खिंचेगी?

First published: 16 August 2016, 15:37 IST
 
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