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स्वामी प्रसाद मौर्य के बसपा छोड़ने से मायावती को नुकसान नहीं

पाणिनि आनंद | Updated on: 25 June 2016, 14:07 IST

उत्तर प्रदेश विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी के नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने पार्टी छोड़ दी. वे पडरौना सीट से विधायक हैं. उन्होंने अपने इस्तीफे की घोषणा लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेंस में की. बसपा सुप्रीमो मायावती के दाहिने हाथ समझे जाने वाले मौर्य ने ऐसे समय पार्टी छोड़ी है, जब चुनाव सिर पर हैं और पार्टियां चुनाव अभियान पर अग्रसर हैं.

मौर्य ने आरोप लगाया है कि मायावती ने बसपा को लूट व पैसा कमाने की मशीन बना दिया है और पार्टी अब राज्य में भाजपा की मदद कर रही है. मौर्य ने अभी अपनी भविष्य की योजना का खुलासा नहीं किया है. 

सपा के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल करके उन्होंने राजनीतिक पंडितों को उलझा दिया है. हालांकि अखिलेश यादव ने उनकी तारीफ कर चारा डाल दिया है.

फिलहाल सवाल यह है कि मायावती और उनकी पार्टी पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा. इसका उत्तर है शून्य. उनके इस्तीफे की घोषणा के बाद मायावती ने भी एक अन्य कांफ्रेस में स्वामी के दावे को बदवास करार दिया और कहा कि मौर्य पार्टी विरोधी और पार्टी के आदर्शो के खिलाफ काम कर रहे थे. 

देखा जाए तो मायावती प्रेस के साथ और जनता में कम ही दिखाई देती हैं लेकिन जब वह मीडिया से रूबरू हो रहीं थीं, तब आत्मविश्वास से लबालब थीं.

उन्होंने कहा कि अगर स्वामी प्रसाद कह रहा है कि हमने टिकट के बदले पैसा लिया तो वह पहले यह बताए कि उसकी बेटी और बेटा और खुद उसने टिकट लेने के लिए पार्टी को कितने पैसे दिए थे. इन सबको पार्टी टिकट दे चुकी है.

मायावती पर कोई असर नहीं

मायावती ने कहा कि वह कभी भी पार्टी के मूल कार्यकर्ता नहीं रहे. बसपा में आने से पहले वह अन्य दलों के साथ जुड़े हुए थे. हमने उन्हें पर्याप्त महत्व दिया, पहचान दी. 

हम उनकी हरकतों को नजरअंदाज करते रहे लेकिन उन्होंने भाई-भतीजावाद और पर्सनल एजेण्डा चलाना जारी रखा. मायावती ने कहा कि हम उन्हें कुछ दिनों में पार्टी से निकालने के बारे में सोच भी रहे थे. अब वह खुद ही चले गए हैं.

माया ने यह भी कहा कि मीडिया के हवाले से खबर मिली है कि वे सपा में शामिल हो रहे हैं. वहीं उनकी सबसे अच्छी जगह है. समाजवादी पार्टी एक ऐसी पार्टी है जहां भाई-भतीजावाद ही उसका आदर्श है. वह उनके लिए मुफीद भी है. वह अपने सही स्थान पर हैं.

मायावती जब बोल रहीं थीं, उनका चेहरा और बॉडी लैंग्वेज आत्मविश्वास से भरा हुआ था. वह चुनाव की तैयारियों और मौर्य के जाने से हो सकने वाले नुकसान पर भी बोलीं. पार्टी में मायावती के सहयोगियों ने कैच को बताया कि मौर्य का भाई-भतीजावाद ही उन्हें ले डूबा. जो कुछ उन्होंने किया, उससे केवल उन्हीं का नुकसान होगा.

बसपा नेता मुनकाद अली ने कहा कि हमारे पास अन्य कई नेता हैं जो पिछड़े वर्ग से जुड़े हुए हैं. हमारे पास समाज के हर वर्ग के लोग हैं. इतिहास उठाकर देखिए जो लोग बसपा छोड़कर गए हैं, वे कहीं के नहीं रहे हैं. हमने उन्हें नेता बनाया था. अब उन्होंने इस गरिमा को खो दिया है.

पार्टी सूत्रों के मुताबिक मौर्य अपने परिवार के लिए टिकट मांग रहे थे और अपने साथियों को भी अन्य सीटों से टिकट दिलाना चाह रहे थे. मायावती ने उन्हें न केवल मना किया बल्कि उनके सामने प्रस्ताव रखा कि वे रायबरेली शहर की विस सीट से चुनाव लड़ें. वह यह जानते हैं कि इस सीट से लड़ना कितना मुश्किल भरा काम है.

मौर्य का पतन

वास्तव में देखा जाए तो मायावती ने हाल के महीनों में सार्वजननिक सभाओं में इसका संकेत दे दिया था. मौर्य के स्थान पर उन्होंने मंच से कई बार नसीमुद्दीन सिद्दीकि और सतीश चन्द्र मिश्र का नाम लिया था और उनके अच्छे कामों की मंच से ही तारीफ की थी. 

मायावती खुद दलित नेता हैं और इन नेताओं के माध्यम से ब्राह्मण कार्ड और दलित कार्ड खेल रहीं हैं. देखा जाए तो पिछले कुछ महीनों से मौर्य अपनी साख और महत्व दोनों खोते जा रहे थे.

उनके लिए बदतर हालात तो तब आए जब भाजपा ने अपनी राज्य इकाई का अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य को बना दिया. इससे मौर्य समुदाय का झुकाव केशव की ओर हो गया. स्वामी प्रसाद मौर्य अब तक राज्य में मौर्य समुदाय का सबसे बड़ा नेता होने का दावा कर रहे थे.

केशव के आने से वे एकतरफ हो गए. इसके चलते भी मायावती के लिए उनका महत्व कम हो गया. मायावती ने उन्हें ज्यादा भाव देने से इनकार कर दिया था. ऐसे में मौर्य का यह कहना ठीक हो सकता है कि पार्टी उन्हें कमतर आंक रही थी और वे खुद को कम महत्वपूर्ण पा रहे थे.

मौर्य ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि बसपा उप्र में भाजपा को लाभ पहुंचाने में लगी है

उनकी पुत्री संघमित्रा ने कहा कि उनके लिए माहौल दमघोंटू हो गया था. मायावती टिकट बेच रहीं थीं और मौर्य इसमें खुद को सहज नहीं महसूस कर रहे थे. पार्टी का लोगों में भरोसा कम हो रहा है और राज्य में उसकी जमीन खिसक रही है.

मौर्य ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि बसपा उप्र में भाजपा को लाभ पहुंचाने में लगी है. लेकिन बसपा के मुनकाद अली इसके विपरीत राय रखते हैं. वह कहते हैं कि यदि हम भाजपा को लाभ पहुंचा रहे हैं तो फिर हमने उत्तराखंड के साथ ही उप्र और मप्र में भाजपा के खिलाफ वोट क्यों दिया. 

इतिहास उठाकर देखिए, जब कभी हम भाजपा के साथ रहे, हमने भाजपा का जमीन से सफाया कर दिया. जब भी सपा सरकार में रही, भाजपा का राज्य में वर्चस्व बढ़ा.

मौर्य के बसपा में ही एक अन्य सहयोगी कहते हैं कि मौर्य बसपा के बड़े नेताओं में से एक रहे हैं. हमने उन्हें नेता बनाया. उनको जितना महत्व इस पार्टी में मिला, उतना किसी दूसरी पार्टी में नहीं मिल सकता. मुलायम सिंह के खिलाफ जिस तरह की भाषा का उन्होंने इस्तेमाल किया है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि वे सपा में इतनी ऊंचाई पर कभी नहीं चढ़ सकते.

भाजपा में भी एक अन्य मौर्य हैं जिनकी बैकग्राउंड आरएसएस से है. उनके पास कहीं भी कोई मजबूत आधार नहीं है. समय ही बताएगा कि अब वह कहां जाएंगे.

हो सकता है, मौर्य के आरोप सही हों. लेकिन पार्टी के लिए यह कोई नई बात नहीं है. बसपा के बारे में यही आम धारणा है. पार्टी छोड़ने की यही एक ठोस वजह नहीं हो सकती है. 

बसपा और मायावती का साथ छोड़ने के कुछ घंटों के भीतर ही मायावती ने उनकी राह राजनीतिक रूप से असफल बना दी है. मौर्य अब हाथी से उतर गए हैं. देखना होगा कि वह किसकी सवारी करते हैं.

First published: 25 June 2016, 14:07 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

Senior Assistant Editor at Catch, Panini is a poet, singer, cook, painter, commentator, traveller and photographer who has worked as reporter, producer and editor for organizations including BBC, Outlook and Rajya Sabha TV. An IIMC-New Delhi alumni who comes from Rae Bareli of UP, Panini is fond of the Ghats of Varanasi, Hindustani classical music, Awadhi biryani, Bob Marley and Pink Floyd, political talks and heritage walks. He has closely observed the mainstream national political parties, the Hindi belt politics along with many mass movements and campaigns in last two decades. He has experimented with many mass mediums: theatre, street plays and slum-based tabloids, wallpapers to online, TV, radio, photography and print.

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