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आप को झटका: स्वराज अभियान ने बनाई नई पार्टी

राजीव खन्ना | Updated on: 2 June 2016, 14:35 IST
(कैच हिंदी)
QUICK PILL
  • पंजाब विधानसभा चुनाव के पहले स्वराज अभियान ने नई पार्टी स्वराज पार्टी का गठन किया है. राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो स्वराज पार्टी के गठन से पंजाब में आम आदमी पार्टी की राजनीतिक संभावनाओं पर बुरा असर पड़ेगा.
  • दिल्ली के बाद आम आदमी पार्टी पंजाब में बेहद आक्रामक तरीके से प्रचार अभियान चला रही है. पंजाब की राजनीति अभी तक अकाली-बीजेपी गठबंधन और कांग्रेस के बीच घूमती रही है. आम आदमी पार्टी के बाद से यह लड़ाई अब त्रिकोणीय हो चुकी है.

उम्मीद के मुताबिक ही स्वराज अभियान ने पंजाब में विधानसभा चुनाव के पहले स्वराज पार्टी बनाए जाने की घोषणा कर दी है. फिलहाल पार्टी पंजाब पर ही केंद्रित होगी.

विश्लेषकों का कहना है कि स्वराज पार्टी के गठन से आम आदमी पार्टी की संभावनाओं पर उल्टा असर होगा. पंजाब विधानसभा चुनाव से आम आदमी पार्टी को बड़ी उम्मीदें हैं.

स्वराज अभियान के केंद्रीय नेतृत्व ने पार्टी के गठन से हालांकि दूरी बना रखी थी. खबरों के मुताबिक राजनीतिक पार्टी का गठन स्वराज अभियान के मुताबिक नहीं था लेकिन अभियान का कहना है कि वह पंजाब में बनी नई पार्टी के साथ मिलकर काम करेंगे.

स्वराज पार्टी का गठन प्रोफेसर मंजीत सिंह के नेतृत्व में किया गया है और उनका दावा है कि उन्हें आम आदमी पार्टी के निलंबित सांसद धर्मवीर गांधी और हरिंदर सिंह खालसा का समर्थन हासिल है. रविवार को चंडीगढ़ में राज्य स्तरीय सम्मेलन के बाद पार्टी के गठन का फैसला लिया गया.

योगेंद्र यादव और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के आम आदमी पार्टी से निकाले जाने के बाद स्वराज अभियान अस्तित्व में आया. 

स्वराज अभियान के केंद्रीय नेतृत्व से बिना मंजूरी लिए पार्टी के गठन के बारे में पूछे जाने पर मंजीत सिंह ने कहा, 'संगठन स्वराज के बारे में बात करता रहा है. पार्टी का नियंत्रण अगर दिल्ली के हाथ में होगा तोे काम कैसे होगा? हमने उनसे दूरी नहीं बनाई है. पिछले आठ महीनों से पार्टी बनने की प्रक्रिया चल रही थी. हर बैठक में तारीख तय होती और बाद में घोषणा टाल दी जाती. 14 अप्रैल के दिन भी यही हुआ.'

योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के आप से अलग होने के बाद स्वराज अभियान सामने आया था

सिंह ने कहा कि चुनाव में कुछ ही महीने बचे हैं और अन्य पार्टियां अपनी तैयारियां शुरू कर चुकी हैं. ऐसे में पार्टी के गठन में और देरी नहीं की जा सकती थी.

मंजीत ने कहा, 'जब स्वराज अभियान राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी बनाएगी, हम उसमें अपना विलय करेंगे या फिर उससे जुड़ जाएंगे.'

आम आदमी पार्टी पर पड़ोसी राज्यों के साथ पानी साझा किए जाने के मामले में विचार बदलने का आरोप लगाते हुए स्वराज पार्टी ने साफ किया कि वह पंजाब की नदियों के जल को साझा किए जाने के मामले में रिपेरियन सिद्धांत का अनुसरण करेंगे.

पार्टी ने प्रखंड और गांव के स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए 41 सदस्यीय समिति का गठन किया है. पार्टी ने जिला में जिला समितियों का गठन किया है.

मंजीत ने कहा, 'हमने अभी विधानसभा सीटों की संख्या के बारे में फैसला नहीं लिया है. फिलहाल हमारा ध्यान जमीन पर अपनी पकड़ मजबूत करने परर है. हम न्यूनतम साझा कार्यक्रम के लिए वृहद राजनीतिक मंच बनाने की कोशिश में जुटे हुए हैं.'

स्वराज अभियान के सदस्यों का कहना है कि उनकी पार्टी मकसद आधारित है न कि आम आदमी पार्टी की तरह व्यक्ति केंद्रित. उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी सत्ता के विकेंद्रीकरण के वादे के साथ सत्ता में आई थी लेकिन वह ऐसा नहीं कर रही है.

पंजाब में अाम आदमी पार्टी सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की घाेषणा कर चुकी है

आप के निलंबित सांसद गांधी लगातार आम आदमी पार्टी पर हमला करते रहे हैं. आवास घोटाला का उल्लेख करते हुए गांधी ने कहा, 'उन्होंने पंजाब पर दिल्ली के नेतृत्व को थोप दियाा है जो अस्वीकार्य है. क्या वह यह कहना चाह रहे हैं कि पंजाबी पार्टी नहीं चला सकते?'

गांधी ने कहा कि वह पटियाला के सांसद से इस्तीफा नहीं देंगे. वह पूछते हैं, 'मैं क्यों इस्तीफ दूं? लोगों ने मुझे पांच साल के लिए चुना है. मैं विधानसभा चुनाव के दौरान बेहतर उम्मीदवार के लिए काम करुंगा.'

आप का कहना है कि गांधी और खालसा का पार्टी में स्वागत है, लेकिन उन्हें अनुशासन का पालन करना होगा.

राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस बात को लेकर एक राय है कि पंजाब में स्वराज पार्टी के गठन से आम आदमी पार्टी की संभावनाएं धूमिल होंगी क्योंकि दोनों एक ही विचारधारा से चलती हैं.

विश्लेषक  बलजीत बल्ली ने कहा, 'स्वराज पार्टी का गठन शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी गठबंधन के लिए अच्छी खबर है. पार्टी के गठन के बाद सत्ता विरोधी मतों में विभाजन होगा.' वहीं कुछ लोगों को लगता है कि स्वराज पार्टी के गठन से जमीन पर कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा. उन्होंने कहा कि योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण पंजाब के लिए अपेक्षाकृत अजनबी है और उनकी पार्टी में अभी तक ऐसा एक भी नेता नहीं है जो भीड़ को खींचने की क्षमता रखता हो.

उनका कहना है कि 1999 में ऐसा प्रयोग अकाली दल के नेता गुरचरण सिंह तोहरा कर चुके हैं. तोहरा ने सर्व हिंद शिरोमणि अकाली दल का गठन किया था. मनप्रीत बादल भी पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब का गठन कर चुके हैं. दोनों ही दल के लिए चुनावी नतीजे बेहद निराशाजनक रहे.

मंजीत सिंह ने कहा, 'हमने आम आदमी पार्टी का नुकसान करने के लिए पार्टी नहीं बनाई है. बल्कि हम स्वराज के विचार को आगे बढ़ाना चाहते हैं जिसे पहले आप ने आगे बढ़ाया लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया.'

First published: 2 June 2016, 14:35 IST
 
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