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केजरीवाल को स्वराज अभियान की चुनौती: दिल्ली में जबरन बंद होंगी शराब की दुकानें

चारू कार्तिकेय | Updated on: 11 February 2017, 5:46 IST

प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव के नेतृत्व वाला स्वराज अभियान राजनीति में अपनी जगह बनाने के लिए अब एक नई युक्ति का सहारा ले रहा है. जो योजना पूर्व आम आदमी पार्टी (आप) के प्रभावी व्यक्तियों के नेतृत्व में चलाई जा रही थी, और बाद में आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल से अलग हो गई.

अब दिल्ली में कुछ महीनों से शराब विक्रेताओं के विरुद्ध यह मुहिम चलाई जा रही है. इस मुहिम में जो रणनीति उन्होंने अपनाई गई है वह यह कि वे रिहायशी इलाकों की शराब की दुकानें जबरन बंद करवाने के लिए स्थानीय निवासियों का नेतृत्व करेंगे.

भूषण ने पुरानी दिल्ली के अजमेरी गेट इलाके में सीधा एक्शन लेने की मांग का नेतृत्व किया. स्वराज अभियान ने उस क्षेत्र में ‘जन सुनवाई’ का आयोजन किया. यह सुनवाई की उस शृंखला के हिस्से के रूप में थी, जिसे वे पूरी दिल्ली में शराब की दुकानों के खिलाफ करते रहे हैं.

संगठन का कहना है कि अजमेरी गेट इलाके में ये दुकानें स्थानीय निवासियों की बिना रजामंदी के खोली गई थीं. स्वराज अभियान का दावा है कि वे कम से कम 72 दिनों से माटिया महल की एक खास शराब की दुकान का विरोध कर रहे हैं.

भूषण का ‘हल्ला बोल’

जन सुनवाई के बाद भूषण ने ‘हल्ला बोल’ मुहिम की घोषणा की, जिसके तहत उनका संगठन शराब की दुकानों को बंद करने की जिम्मेदारी अपने हाथ में लेने के लिए स्थानीय निवासियों का नेतृत्व करेगा.

इस तरह की पहली मुहिम माटिया महल की एक दुकान पर शुरू हुई, जहां भूषण ने दुकानें जबरदस्ती बंद करवाने के लिए लोगों का नेतृत्व किया. उन्होंने स्थानीय निवासियों से यह अपील भी की कि अगले दिन चेक करें और सुनिश्चित करें कि दुकान फिर से नहीं खुले.

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील ने एकत्रित लोगों से कहा कि लोगों की ताकत किसी भी चीज से बड़ी होती है और वादा किया कि यदि स्थानीय निवासियों से स्वीकृत नहीं किया गया, तो वे इस मामले को कोर्ट में ले जाएंगे.

स्वराज अभियान ने दावा किया कि इस इलाके की औरतों ने शिकायत की थी कि शराब की दुकान की वजह से छेडख़ानी, चेन छीनने, और चोरी की घटनाएं आम हो गई हैं. संगठन ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि दुकान मंदिर से 50 मीटर से भी कम दूरी पर है.

सख्त कदम

स्वराज अभियान ने शराब की उन सभी नई दुकानों के 399 लाइसेंस निरस्त करने की मांग की है, जो पिछले एक साल में दिल्ली में खुली हैं. पार्टी ने घोषणा की कि ‘शराब नहीं स्वराज चाहिए’ मुहिम का दूसरा दौर शुरू हो गया है और शराब की दुकानें बंद करने के लिए अब रोज नया इलाका चुना जाएगा.

इस मौके पर संगठन की राष्ट्रीय कार्य समिति के सदस्य अनुपम, केजरीवाल सरकार और आप के ऊपर जमकर बरसे. उन्होंने कहा, ‘अरविंद केजरीवाल के लिए नशामुक्ति की परिभाषा भिन्न है. उन्होंने 371 कार्य दिवसों पर 399 शराब के नए लाइसेंस देकर दिल्ली में नशामुक्ति को लागू किया. और अब कहते हैं कि वे पंजाब और गोवा में नशामुक्ति करेंगे. उनकी नशामुक्ति से ईश्वर बचाए.’

केजरीवाल ‘छोटे मोदी’

अनुपम ने यह कहते हुए केजरीवाल की ओर निशाना साधा कि हमने एक पीएम चुना है, जो हमेशा विदेशों में रहते हैं और हमने दिल्ली में एक सीएम चुना है, पर वे हमेशा दूसरे राज्यों में व्यस्त रहते हैं. हमने एक मोदी को चुना, और यह ‘छोटा मोदी’ है. इनमें एक रिलायंस जियो के लिए विज्ञापन कर रहे हैं, और दूसरे ‘शराब पियो’ के लिए विज्ञापन कर रहे हैं.

मजे की बात यह है कि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्वराज अभियान शराब के समग्र निषेध की मांग नहीं कर रहा, बल्कि केवल यह कि शराब की दुकानें रिहायशी इलाकों और बिना स्थानीय निवासियों, खासकर औरतों की अनुमति के नहीं खोली जानी चाहिए.

तीमारपुर से आप के विरोधी विधेयक पंकज पुष्कर भी एकत्रित समूह में मौजूद थे. उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार ‘माफिया’ के साथ मिल गई है, और दिल्ली को ‘शराब की मंडी’ में तब्दील होने से रोका जाना सबसे अहम हो गया है.

First published: 14 September 2016, 7:48 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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