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आप के आने से बेचैन हुई पंजाब की राजनीति

राजीव खन्ना | Updated on: 13 January 2016, 23:12 IST
QUICK PILL
  • पंजाब में कांग्रेस बनाम अकाली दल की सियासी जंग में तीसरा कोण आप के रूप में पैदा हो गया है. पिछले आम चुनाव में पंजाब में 4 लोकसभा सीटें जीतकर आप पहले ही सबको चौंंका चुकी है.
  • आम आदमी पार्टी राज्य में बेरोजगारी, खेती-किसानी की खराब हालत और युवाओं में बढ़ती ड्रग्स की लत को मुद्दा बना रही है. इसके अलावा उद्योग की खराब हालत को लेकर भी उसने कांग्रेस और अकाली दल पर निशाना साधा है.

पिछले कई सालों से पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर होती रही है. राज्य में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं और इस बार आम आदमी पार्टी की वजह से यह संघर्ष त्रिकोणीय हो गया है.

2014 के आम चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) ने जबरदस्त तरीके से अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी. पार्टी ने चार लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज कर अकाली और बीजेपी के वर्चस्व में सेंध लगा दी थी. पंजाब में मिली पार्टी की जीत इसलिए भी धमाकेदार रही क्योंकि आप को दिल्ली में वह सफलता नहीं मिल पाई जिसकी उसे उम्मीद थी.

पंजाब के संगरुर से भगवंत सिंह मान, फतेहगढ़ साहिब से हरिंदर सिंह खालसा, फरीदकोट से साधु सिंह तो पटियाला से डॉ. धर्मवीर गांधी को जीत मिली. पटियाला लोकसभा क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ रहा है.

आम आदमी पार्टी अब न केवल लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुकी है बल्कि गाहे बगाहे अकाली और कांग्रेस के बड़े नेता अपने भाषणों में आम आदमी पार्टी का जिक्र भी कर रहे हैं.

चुपचाप काम कर रही पार्टी

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आम आदमी पार्टी पंजाब में अकाली और कांग्रेस से निपटने के लिए संगठन के स्तर पर मजबूत है. पार्टी बेहद शांत तरीके से काम कर रही है. राजनीतिक विश्लेषक इस बात को लेकर चकित है कि पार्टी बिना किसी सांगठिक ढांचे के इतनी जबर्दस्त तरीके से कैसे काम कर रही है.

हालांकि कुछ हालिया घटनाक्रम बताते हैं कि पार्टी पूरी तरह से तैयार है. पार्टी लोकलुभावन नीतियों और सामाजिक-आर्थिक मुद्दे को उठा रही है जिसे प्रकाश सिंह बादल के दशक भर पुराने शासनकाल में नजरअंदाज किया जा चुका है.

आप के नेता दुर्गेश पाठक बताते हैं, 'हम लोगों के बीच उनसे जुड़े मुद्दों को लेकर जा रहे हैं. हम उनकी समस्या के बारे में बात कर रहे हैं. राज्य में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है जिसकी वजह से युवाओं में बड़ी निराशा और हताशा का भाव है. इस वजह से वह तेजी से ड्रग्स की तरफ मुड़ रहे हैं. राज्य में ड्रग्स की तस्करी दूसरा बड़ा मुद्दा है.'

आप 2014 में जबरदस्त तरीके से अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए चार लोकसभा सीटें जीतने में सफल रही थी

उन्होंने कहा, 'हम राज्य में कृषि के चौपट होने का भी मुद्दा उठा रहे हैं. कभी यह राज्य के किसानों की रीढ़ हुआ करता था लेकिन आज इसकी हालत इस कदर खराब हो चुकी है कि वहां के किसान कर्ज से दबे हुए हैं.'

पाठक बताते हैं कि राज्य पूरी तरह से 'पुलिस गुंडाराज' के हवाले है और इससे लोगों को जबर्दस्त परेशानी हो रही है. पाठक  बताते हैं, 'कांग्रेस के सत्ता से बाहर होने और अकाली के सत्ता संभालने के बाद राज्य में किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ है. बल्कि कानून और व्यवस्था की हालत पूरी तरह से खत्म हो चुकी है. लोगों को अब अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी से उम्मीदें हैं.' 

केवल खेती ही नहीं राज्य में उद्योग भी बुरी हालत में है और इसकी वजह से बेरोजगारी में बढ़ोतरी हुई है

वहीं आप का दावा है कि वामपंथी दलों और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के वोट उसे मिलने जा रहे हैं. उनका कहना है कि पिछले आम चुनावों में उसे वापमंथी दलों को मिलने वाले 7 फीसदी और दलितों का 25 फीसदी वोट मिला. पाठक बताते हैं, 'हमारी वोट भागीदारी 40 फीसदी रही है. इसका मतलब यह है कि हमें अन्य समुदायों का वोट मिला है.'

अकाली और कांग्रेस वोट बैंक पर नजर

यह जाहिर है कि पार्टी की कोशिश अकाली और कांग्रेस के मतदाताओं को अपनी तरफ खींचने की है. पंजाब की सियासत अब तीन दलों के बीच घूम रही है. कांग्रेस सबसे ज्यादा खराब हालत में है.  सुखपाल सिंह खैरा, लेफ्टिनेंट कर्नल सीडी कंबोई और अमन अरोड़ा जैसे बड़े नेता आप में शामिल हो चुके हैं वहीं अकाली के कुछ छोटे नेता भी आप की तरफ जा रहे हैं.

पंजाब कांग्रेस के प्रेसिडेंट कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि वहीं नेता आप में शामिल हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि ये नेता राजनीतिक भविष्य संवारने की वजह से आप में शामिल हो रहे हैं. सिंह ने कहा, 'जिस तरह से आप हमारे खारिज किए गए नेताओं को स्वीकार कर रही है उससे वह कांग्रेस पार्टी का कूड़ेदान बनती नजर आ रही है.'

सिंह का जवाब देते हुए आप की कोर कमेटी के सदस्य संजय सिंह कहते हैं, 'हां यह कूड़ेदान है लेकिन ईमानदार और सक्षम लोगों का जिन्हें कांग्रेस में नजरअंदाज किया जा चुका है.'

वहीं अकाली दल भी लगातार आम आदमी पार्टी पर हमले कर रहा है. प्रकाश सिंह बादल ने हाल ही में इसे वैसा छलावा करार दिया जो सभी मोर्चे पर विफल रही है. वहीं सुखबीर सिंह बादल ने तो आप को 'धोखेबाज' तक कह डाला.

कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा और लेफ्टिनेंट कर्नल सीडी कंबोज आम आदमी पार्टी में शामिल हो चुके हैं

11 जनवरी को आप को उस वक्त बड़ी सफलता मिली जब पूर्व आईएसएस ऑफिसर जसबीर सिंह बीर पार्टी में शामिल हो गए. बीर मशहूर नौकरशाह रहे हैं और पटियाला के कमिश्नर रह चुके हैं. उन्होंने बादल परिवार के ट्रांसपोर्ट कारोबार पर निशाना साधा था. इसके बाद तंग आकर बीर ने 2010 में आईएएस की नौकरी छोड़ दी थी.

आप में शामिल होने के बाद उन्होंने कहा, 'यहां कानून का शासन नहीं है बल्कि शासकों का शासन है. मैं आम जनता की हताशा को समझ सकता हूं. कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही मुझसे संपर्क कर चुकी है लेकिन मैंने उनके ऑफर को नकार दिया. मुझे लगता है कि आप जनता की उम्मीदों को पूरा कर सकती है.'

आंतरिक गुटबाजी

आप राज्य की सभी 117 सीटों पर लड़ सकती है. इसका यह मतलब हुआ कि पार्टी सभी समुदाय के लोगों को टिकट देगी. हालांकि यह उतना भी आसान नहीं होगा क्योंकि पार्टी के समक्ष अपनी कई समस्याएं हैं. पार्टी अभी तक मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला नहीं कर पाई है. 

संजय सिंह ने कहा, 'हम समय आने पर इसकी घोषणा करेंगे. निश्चित तौर पर मुख्यमंत्री पंजाब का ही होगा. वह किसी अन्य पार्टी का नेता नहीं होगा. हम यहां प्यार और विश्वास की राजनीति करने आए हैं. हम सिक्ख और गैर सिक्ख की राजनीतिक नहीं करेंगे.'

पार्टी को अंदरुनी कलह का भी सामना करना पड़ रहा है. चार में से दो सांसदों को पार्टी अनुशासनात्मक कार्रवाई में निलंबित कर चुकी है. यह दोनों सांसद लगातार पार्टी का विरोध करते रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने दूसरी पार्टी के नेताओं को आप में शामिल किए जाने का भी विरोध किया है.

खालसा ने कहा, 'आप जैसी पार्टी जो बड़े क्रांतिकारी बदलावों का वादा करती है उसे अन्य दलों के नेताओं को पार्टी में शामिल करते वक्त विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. केवल अच्छे नेताओं को ही इसमें शामिल किया जाना चाहिए. लेकिन अब पार्टी में वैसे नेता आ रहे हैं जिन्हें लेकर विवाद है. अतीत को दरकिनार कर पार्टी में सभी का स्वागत किया जा रहा है.'

हालांकि पाठक ने दावा किया कि पार्टी में शामिल किए जा रहे सभी नेता साफ सुथरी छवि के हैं. सबकी नजरें 14 जनवरी को मुक्तसर में होने वाली रैली पर है. इस रैली को दिल्ली के मुख्यमंत्री और पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल करेंगे.

First published: 13 January 2016, 23:12 IST
 
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