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सतलज-यमुना नहर: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अमरिंदर का इस्तीफा

समीर चौगांवकर | Updated on: 11 February 2017, 5:45 IST
QUICK PILL
  • पंजाब लंबे समय से सतलज यमुना लिंक नहर का विरोध करता आया है क्योंकि इसका मकसद पड़ोसी राज्य हरियाणा को रावी व्यास नदियों के पानी का एक निर्धारित हिस्सा मुहैया कराना था. 
  • जल बंटवारे का यह समझौता केन्द्र सरकार ने अपने कई फैसलों में पंजाब के ऊपर लागू करने का दबाव बनाया. 1955, 1976 और 1981 में इस तरह के आदेश केंद्र सरकार ने पंजाब को दिए.
  • अब सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला भी हरियाणा के हक़ में गया है लेकिन पंजाब की कांग्रेस सरकार ने इसके विरोध में इस्तीफ़ा दे दिया है. 

कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद को लेकर कुछ दिन पहले हिंसा जारी थी, अब पंजाब और हरियाणा के बीच सतलज-यमुना लिंक नहर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पंजाब में हिंसक प्रदर्शन की आशंका पैदा हो गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गुरुवार को दिए अपने आदेश में नहर का निर्माण कार्य जारी रखने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद पंजाब कांग्रेस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अमृतसर लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दिया है. फैसले के विरोध में कांग्रेस के सभी मौजूदा विधायकों ने भी इस्तीफा देने की घोषणा की है.

राजनीतिक दबाव की इस रणनीति में अकाली दल के भी सभी सदस्यों के इस्तीफा देने की अटकलें हैं. चुनाव के मुहाने पर खड़े पंजाब में सुनने को मिल रहा है कि अकाली नेता और मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल भी अपनी सरकार का इस्तीफा दे सकते हैं.

क्या है पूरा मामला

पंजाब लंबे समय से इस नहर का विरोध करता आया है. इसका मकसद पड़ोसी राज्य हरियाणा को रावी व्यास नदियों के पानी का एक निर्धारित हिस्सा मुहैया कराना था. जल बंटवारे का यह समझौता केन्द्र सरकार ने अपने कई फैसलों में पंजाब के ऊपर लागू करने का दबाव बनाया. 1955, 1976 और 1981 में इस तरह के आदेश केंद्र सरकार ने पंजाब को दिए.

हालांकि केंद्र की तरफ से इस पर कोई रोशनी नहीं डाली गई कि पानी की कुल उपलब्धता के आकलन में रावी, व्यास और सतलज नदियों को तो जोड़ा गया. लेकिन 1966 तक पंजाब में हरियाणा के गठन के पहले तक बहती रही यमुना नदी के करीब 55.8 लाख एकड़ फुट या एमएएफ पानी को नहीं जोड़ा गया और क्यों हर बार उसे हरियाणा के इस्तेमाल के लिए सुरक्षित रखा गया?

पंजाब की बेचैनी की वजह दक्षिणी पंजाब के मनसा जिले में करीब नौ लाख एकड़ की सिंचाई इसी पानी से होती है, जो सतलज यमुना लिंक नहर बन जाने पर हरियाणा में चला जाएगा.

अतीत पर नजर

सतलज-यमुना के इस कटु विवाद की जड़ 1947 में बटवारेंं से उपजे अधिकारों को लेकर छिड़ी बहस में छुपी है. 1960 में प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान के बीच समझौता हुआ कि पूर्वी पंजाब को पश्चिमी पंजाब की और जा रही रावी, व्यास और सतलज से 1.585 करोड़ एकड़ फुट और चेनाब, झेलम और सिंधु से 3 करोड एकड़ फुट पानी मिलेगा.

इसके पहले 1955 में केन्द्र के फैसले से पंजाब के 1.585 करोड़ एकड़ फुट से करीब आधा पानी राजस्थान को और 6.5 लाख एकड़ फुट पानी जम्मू कश्मीर को दे दिया गया. फिर पंजाब से हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के अलग होने के दस साल बाद पंजाब के विरोध के बावजूद केन्द्र ने तत्कालीन रक्षा मंत्री बंसीलाल के दबाव में पंजाब के हिस्से में से 35 लाख एकड़ घन फुट पानी हरियाणा को देने की अधिसूचना जारी कर दी.

यह पानी रोपड़ में सतलुज नदी से लेकर करनाल में यमुना नहर को जोड़ने वाली 214 किमी लंबी नहर के जरिए आना था. इसके निर्माण का शिलान्यास प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आठ अप्रैल 1982 को पटियाला के कपूरी गांव में किया था. इसके साल भर पहले इंदिरा गांधी ने कांग्रेस के तीन मुख्यमंत्रियों पंजाब के दरबारा सिंह, हरियाणा के भजनलाल और राजस्थान के शिवचरण माथुर के बीच एक अंतरराज्यीय समझौता करवाया.

रावी व्यास से उपलब्ध पानी को 1.717 करोड़ एकड़ फुट नापा गया और पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के बीच क्रमश 42.2, 35 और 86 लाख एकड़ फुट पानी बांटा गया. बाकी पानी जम्मू कश्मीर को 6.5 लाख एकड़ फुट और दिल्ली को 2 लाख एकड़ फुट दे दिया गया.

पानी के बंटवारे के फर्मूले के खिलाफ शिरोमणि अकाली दल ने कपूरी गांव से ही नहर के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया. इसके एक समाधान की संभावना 1985 में अकाली दल के तत्कालीन अध्यक्ष संत हरचंद सिंह लोंगोवाल और प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बीच हुए पंजाब समझौते के तहत बनी थी.

सुप्रीम कोर्ट के जज वी बालकृष्ण इराडी के नेतृत्व में एक नए नदी जल आयोग का गठन किया गया. आयोग ने पंजाब की हिस्सेदारी को 50 लाख एकड फुट कर दिया था, लेकिन उसकी सिफारिशों को सरकार ने अधिसूचित ही नहीं किया था.

इतिहास मे कब क्या हुआ

29 फरवरी, 1955

अविभाजित पंजाब, पटियाला एंड ईस्ट पंजाब स्टेट्स यूनियन राजस्थान और जम्मू कश्मीर ने रावी व्यास के पानी के बंटवारे के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए.

19 सिंतबर, 1960

भारत और पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए.

1 नवबंर, 1966

अविभाजित पंजाब के पुनर्गठन से नए राज्य हरियाणा का जन्म हुआ.

24 मार्च, 1976

केन्द्र ने पंजाब और हरियाणा के बीच रावी व्यास नदियों के पानी के बंटवारे का फैसला लिया. यह काम 214 किमी लंबी यमुना लिंक नहर के जरिए किया जाना था.

31 दिसंबर, 1981

हरियाणा और राजस्थान के साथ नए समझौते के तहत पंजाब दो साल में संतलुज यमुना लिंक नहर बनाने के लिए तैयार हो गया.

8 अप्रैल, 1982

पटियाला के पास कपूरी गांव में इंदिरा गांधी ने इस नहर के निर्माण का उद्घाटन किया.

24 जुलाई, 1985

प्रधानमंत्री राजीेव गांधी और शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख हरचंद सिंह लोगोवाल ने पंजाब समझौते पर हस्ताक्षर किए,जिसके तहत एक साल में सतलुज यमुना लिंक नहर का काम पूरा करना था.

जुलाई, 1990

पंजाब सरकार ने सतलुज यमुना लिंक नहर का निर्माण कार्य रूकवा दिया.

फरवरी, 1991

केन्द्र ने सीमा सडक संगठन को नहर का निर्माण कार्य अपने हाथों में लेने का निर्देश दिया.

जनवरी, 2002

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब को निर्देश दिया कि वह एक वर्ष के भीतर नहर का निर्माण कार्य पूरा करें.

जून, 2004

सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र को नहर का निर्माण कार्य पूरा कराने का निर्देश दिया.

जुलाई, 2004

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब विधानसभा में पंजाब करार रद्द विधेयक 2004 निर्विरोध पारित कर दिया. इस तरह नदी जल बंटवारे के सभी करार स्वत ही रद्द कर दिए गए.

फरवरी, 2005

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के एक संदर्भ के अनुसार पंजाब करार रद्द विधेयक पर सुनवाई शुरू की.

मार्च, 2016

मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल नहर के निर्माण के लिए किसानों से ली गई जमीन उन्हें लौटाने के लिए नया विधेयक लेकर आ गए.

मार्च, 2016

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब को सतलुज यमुना लिंक नहर पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया.

10 नवंबर, 2016

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के दावे को खारिज करते हुए नहर के निर्माण का आदेश दिया.

पंजाब और हरियाणा की क्या है स्थिति

पंजाब

दक्षिण पंजाब में करीब नौ लाख एकड़ जमीन की सिंचाई रावी, व्यास नदियों के 18.8 लाख एकड़ फुट पानी से होती है, जिसकी मांग हरियाणा कर रहा है. नहर बनती है तो इस इलाके में पानी की कमी होने का खतरा है. यहां का जमीन के भीतर का नमकीन पानी कृषि के लिए उपयुक्त नहीं है.

28 प्रतिशत क्षेत्र सिंचाई नहरों के जरिए होती है.

72 प्रतिशत क्षेत्र की सिंचाई टयूबवेल्स के जरिए होती है.

60 लाख संख्या है टयूबवेल्स की.

85 से 90 प्रतिशत ब्लॉक भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण डार्क जोन करार कर दिए गए है.

हरियाणा 

हरियाणा को अपने हिस्से में आवंटित 35 लाख एकड़ फुट में से 16.2 लाख एकड़ फुट पानी भाखड़ा मुख्य नहर और सरहिंद नहर से मिल रहा है.

70 प्रतिशत क्षेत्र की सिंचाई नहरों के जरिए होती है.

30 प्रतिशत क्षेत्र की सिंचाई टयूबवेल्स से होती है.

6,00,000 कुल संख्या है टयूबवेल्स की.

70 प्रतिशत ब्लॉक भूजल के अत्याधिक दोहन के कारण डार्क जोन करार कर दिए गए है.

First published: 11 November 2016, 7:28 IST
 
समीर चौगांवकर @catchhindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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