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ताजमहल संरक्षण: मोदी-योगी सरकार को SC की फटकार, कहा- कॉमेडी शो बना रखा है

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 July 2018, 11:02 IST

ताज महल के संरक्षण और रखरखाव पर सरकारी उदासीनता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की मोदी सरकार और यूपी की योगी सरकार को एक बार फिर कड़ी फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने ताज ट्रैपेजियम जोन (टीटीजेड) प्राधिकरण पर भी हमला बोला. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर यूनेस्को ने संगमरमर के इस स्मारक से विश्व धरोहर स्थल का दर्जा वापस ले लिया तो क्या होगा?  

न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि इतनी फटकार के बाद भी टीटीजेड क्षेत्र में प्रदूषण करने वाले 1167 उद्योग धंधे चल रहे हैं. पीठ ने कहा, "1996 में शीर्ष अदालत के एक आदेश के बाद गठित टीटीजेड प्राधिकरण फ्लॉप रहा है और ऐसा लगता है कि इस मामले में सिर्फ तमाशा हो रहा है. आपके पास एक कॉमेडी चैनल होना चाहिए."

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पीठ ने यूपी सरकार के वकील से कहा कि आपने योजना का मसौदा क्यों दिया है? क्या इसकी जांच करना हमारा काम है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आश्चर्य की बात है कि दृष्टिपत्र का मसौदा तैयार करते समय इस विश्व धरोहर के संरक्षण के लिए जिम्मेदार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से कोई परामर्श नहीं किया गया.

पीठ ने केंद्र सरकार में अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल से जानना चाहा कि क्या केंद्र या संबंधित प्राधिकारियों ने ताजमहल के प्रबंधन के बारे में योजना पेरिस स्थित यूनेस्को के विश्व धरोहर केंद्र को सौंपी है? पीठ ने कहा, तब क्या होगा, जब यूनेस्को यह कह दे कि हम ताजमहल का विश्व धरोहर का दर्जा वापस ले लेंगे?

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बता दें कि इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट इस मामले में योगी और मोदी सरकार को फटकार लगा चुका है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर इसको संभाल नहीं सकते तो ढहा दीजिए. दरअसल, पिछले कुछ दिनों से ताजमहल की चमक फीकी पड़ती जा रही है. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मदन भीमराव लोकुर ने ताज के संरक्षण और रखरखाव लेकर केंद्र सरकार और उसके संस्थान ASI के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि एक ओर फ्रांस का एफ़िल टॉवर है, जिसको देखने के लिए 80 मिलियन लोग आते है. वहीं, ताजमहल को देखने के लिए 5 मिलियन लोग ही आते हैं.

First published: 27 July 2018, 11:02 IST
 
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