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तेजिंदर पाल बग्गा की घर वापसी: मवाली को प्रवक्ता बनाने की भाजपा की मजबूरी

चारू कार्तिकेय | Updated on: 16 March 2017, 7:31 IST

अंदाज लगाइए कि आज ट्विटर पर किसे केंद्रीय मंत्रियों से बधाईयां पर बधाईयां मिल रही हैं? उनके उत्साह को देखते हुए आपको लग रहा होगा कि वे जरूर प्रधानमंत्री नरेंद्र या भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह को यूपी में पार्टी की भारी बहुमत से मिली जीत के लिए बधाई दे रहे होंगे. अपनी इस सहज सोेच को विराम दीजिए और ध्यान से देखिए क्या हो रहा है.

केंद्रीय मंत्री जैसे सुरेश प्रभु, निर्मला सीतारमण, विजय गोयल और गिरिराज सिंह दिल्ली भाजपा के नव नियुक्त प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को बधाई दे रहे हैं.

बग्गा को 14 मार्च को दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता के रूप में दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने नियुक्त किया जो कि खुद ही अपने पद पर नये हैं.

इस नियुक्ति के बाद बग्गा को लगातार अपने प्रशंसकों और सहयोगियों से बधाई संदेश मिल रहे हैं. कांग्रेस की प्रियंका चतुर्वेदी और कांग्रेस समर्थक टिप्पणीकार तहसीन पूनावाला को भी बग्गा की टाइमलाइन पर देखा जा सकता है. लेकिन मंत्री निश्चित रूप से प्रशंसक या फिर संरक्षक की श्रेणी में ही आते हैं.

इस श्रेणी में अन्य दूसरे लोग हैं भाजपा सांसद महेश गिरि, स्वपनदास गुप्ता, दर्शना जरदोश, पूर्व सांसद तरुण विजय, दक्षिणपंथी सर्किल के जाने-माने विमर्शकार कंचन गुप्ता और अपनी सांस थाम बैठकर बैठिए, इस सूची में चित्रा सुब्रमण्यम जैसी वरिष्ठ पत्रकार भी हैं जिन्हें बोफोर्स घोटाले को उजागर करने के कारण जाना जाता है.

बग्गा की सड़कछाप बदमाशियां

भाजपा के नेता जिस तरह का प्रेम बग्गा पर बरसा रहे हैं उसको देखते हुए यह विश्वास करना कठिन होता है यह वही सज्जन हैं जिनसे भाजपा कुछ समय पहले तक किसी भी तरह का वास्ता न होने की बात कहती है. 12 अक्टूबर 2011 को बग्गा और उससे दो सहयोगियों ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण पर उनके चैबंर्स में घुसकर हमला किया था. उस समय ये तीनों अपने द्वारा ही गठित एक समूह भगत सिंह क्रांति सेना के सदस्य हुआ करते थे.

उस समय उन्होंने भूषण से कश्मीर को लेकर दिए गए उनके कथित बयान पर हाथापाई की थी. बग्गा ने उस समय गर्व के साथ ट्वीट किया  था, 'वो मेरे देश को तोड़ने की कोशिश करता है, मैं उसके सिर को तोड़ने की.' इस घटना के बाद उस समय इन तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया था और एक दिन की न्यायिक हिरासत में भी इनको रखा गया था. इसके पूर्व भी बग्गा इसी प्रकार के हमलों में शामिल रह चुके हैं जिनमें उन्होंने लेखिका अरुंधति राय और हुर्रियल नेता सैयद अली शाह गिलानी पर हमला किया था.

अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि भाजपा ने बग्गा को उनकी उपरोक्त कौन सी उपलब्धियों के कारण पार्टी के प्रवक्ता के पद से नवाजा है. लेकिन छह वर्ष पूर्व अवश्य पार्टी और बग्गा दोनों ने एक दूसरे से दूरी बना ली थी. बग्गा ने उस समय एक टीवी चैनल से कहा था कि वर्तमान में मेरा भाजपा से कोई नाता नहीं है, लेकिन पहले जरूर मैं भाजपा का सदस्य रह चुका हूंं. वरिष्ठ भाजपा नेता राजनाथ सिंह ने उसके इस दावे का खंडन करते हुए भूषण पर किए गए हमले की निंदा की थी.

बग्गा के लिए भाजपा की आधिकारिक सदस्यता एक बदलती रहने वाली अथवा व्यर्थ की अवधारणा प्रतीत होती है. वह पार्टी के साथ अपने पुराने संबंधों की डींगें हांकता है और उसका दावा है कि वह पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सबसे युवा सदस्य रह चुका है. उसके ट्विटर एकाउंट पर उसे एक तस्वीर में खुद नरेंद्र मोदी के साथ खड़ा दिखाया गया है, जिसमें पीएम बड़ी कृपापूर्वक उसकी ओर देख रहे हैं, जैसा कि वह पार्टी के किसी भी भरोसेमंद कार्यकर्ता के साथ करेंगे.

जबकि बग्गा के फेसबुक प्रोफाइल पर एक दूसरी तस्वीर दिखाई गई है जिसमें बग्गा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ खड़ा हुआ है। बग्गा का दावा है कि यह फोटो 2008 की है.

इसके साथ ही ट्विटर पर युवा बग्गा की एक और तस्वीर है जिसमें वह वाजपेयी और गोयल के साथ दिखाई दे रहा है.
इस तस्वीर पर गोयल का ट्वीट इस तस्वीर को उनकी सुनहरी यादों का हिस्सा बताता है. बग्गा के भाजपा के साथ संपर्क और संबंधों की लंबी कड़ी से इंकार नहीं किया जा सकता और अब तो पार्टी ने खुलकर स्वीकार कर लिया है कि वह उसका अपना ही है.

प्रशांत भूषण बग्गा को ठग कहना पसंद करते हैं. उनका भाजपा पर आरोप है कि वह उसके जैसे गुंडा तत्वों को बढ़ावा दे रही है.

लेकिन अब भाजपा को जिन सवालों का जवाब देना चाहिए वह यह कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भूषण पर बग्गा के हमले की जो निंदा की थी क्या वह अब भी उस पर कायम हैं? अथवा ठगबाजी भी पार्टी के लिए एक बदलते रहने वाली अवधारणा है, जैसे कि बग्गा के लिए पार्टी की सदस्यता ?

First published: 16 March 2017, 7:31 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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