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भाजपा की परिवर्तन यात्रा पर रहस्यमय पर्देदारी

अतुल चंद्रा | Updated on: 12 September 2016, 7:31 IST

उत्तर प्रदेश में मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए विभिन्न नामों से यात्राओं का दौर शुरू हो गया है और यह यात्राएं धीरे-धीरे जोर भी पकड़ रहीं हैं. इसे मतदाताओं तक पहुंचने की इंजीनियरिंग कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी.

भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में होने वाले वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए अगले सप्ताह किसी अपने चुनाव अभियान की शुरुआत करने वाली है. इस अभियान को परिवर्तन यात्रा यानी बदलाव के लिए यात्रा नाम दिया गया है.

समाजवादी पार्टी ने शनिवार से अपनी –संदेश यात्रा-शुरू की है. पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने इसे झंडी दिखाई. पहले चरण में यह यात्रा लखनऊ से इलाहाबाद तक जाएगी. यह यात्रा लोगों तक समाजवादी पार्टी की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के मकसद से निकाली जा रही है.

राहुल गांधी की किसान यात्रा पहले से ही राज्य में जारी है. राज्य के 403 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने के लिए भाजपा ने राज्य को चार भागों में बांटा है, यानी हर भाग में 100 विधानसभा क्षेत्र आएंगे. बाकी बचे तीन विधानसभा क्षेत्रों के लिए थोड़ सा ही बदलाव कर उसे भी समायोजित कर लिया जाएगा.

चार भागों को लेकर पार्टी में रहस्य की स्थिति बनी हुई है कि यात्राएं कहां से निकाली जाएंगी. पार्टी महासचिव विजय बहादुर पाठक कहते हैं कि स्थानों के नाम का खुलासा नहीं किया जाएगा. उन्होंने स्थानों को अंतिम रूप दे दिया है, पर फिलहाल उनके नाम उजागर नहीं करेंगे. हालांकि, इस बात का अंदाजा तो लगाया ही जा सकता है कि ये चार भाग पूर्वी, पश्चिमी, बुन्देलखंड और अवध क्षत्र समेत सेन्ट्रल उत्तर प्रदेश हो सकते हैं. अलग राज्य की मांग करने वाले भी इसी तरह से राज्य के बंटवारे के पक्ष में हैं.

परिवर्तन यात्राएं किस दिन से निकाली जाएंगी, इसकी तारीख को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है

सूत्रों के अनुसार ये चार यात्राएं सहारनपुर (पश्चिमी उप्र के लिए), बलिया (पूर्वी उप्र के लिए), ललितपुर (कानपुर क्षेत्र सेन्ट्रल उप्र) इसमें बुन्देलखंड क्षेत्र भी कवर हो जाएगा और सोनभद्र (काशी क्षेत्र के लिए) से निकाली जाएंगी. पार्टी अपनी पूरी ताकत पूर्वी उप्र में झोकने के लिए योजना बना रही है.

परिवर्तन यात्राएं किस दिन से निकाली जाएंगी, इसकी तारीख को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है. यह भी तय नहीं किया गया है कि यात्रा शुरू करने वाले दिन इन यात्राओं की अगुवाई कौन करेगा. हालांकि, पाठक ने दबी जुबान से थोड़ी ही यह जानकारी दी कि अमित शाह जैसे बड़े नेता इन यात्राओं में शामिल रहेंगे. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संभवतः इस अभियान को लीड करेंगे. हालांकि पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर का कहना है कि पार्टी का हर कार्यकर्ता उसका चेहरा है.

पाठक कहते हैं कि इसमें थोड़ा सा ही अस्पष्ट है कि ये यात्राएं अपना असर कैसे दिखा पाएंगी. चार यात्राओं में से हर यात्रा 100 दिनों में 100 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करेगी. हर विधान सभा क्षेत्र में वह एक दिन रुकेगी. इसका अर्थ यह होगा कि मतदाताओं तक पूरी पहुंच होगी. यह अभियान दो उद्देश्यों को ध्यान में रखकर चलाया जाएगा, एक तो मतदाताओं को प्रोत्साहित करना और उन्हें एकजुट करना और साथ ही विकास के मुद्दे को केन्द्रबिन्दु में लाना.

पाठक यह भी कहते हैं कि लखनऊ में हर यात्रा के पहुंचने के पहले जिला मुख्यालयों पर रैलियां निकाले जाने की भी योजना है. राहुल गांधी की किसान यात्रा की तुलना में भाजपा की हर बूथ पर, हर मतदाता तक पहुंचने की योजना है. राहुल की यात्रा केवल किसानों तक पहुंचने के प्रयास पर केन्द्रित है.

दूसरी ओर, भाजपा का इरादा सभी वर्ग के मतदाताओं को कवर करने और अपने विकास के एजेण्डे के माध्यम से उन्हें प्रेरित करने पर केन्द्रित है. भाजपा का लक्ष्य भारत को कांग्रेस-मुक्त करने का है जबकि कांग्रेस भारत की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता को बरकरार रखने की कोशिश है.

यह राज्य चुनाव हैं. अखिलेश यादव के शासन में कितना विकास हुआ है, यह राज्य सरकार को दिखाना है

भाजपा सांसदों ने अपने संसदीय क्षेत्रों में कितना विकास किया है? पाठक छूटते ही कहते हैं कि यह राज्य चुनाव हैं. अखिलेश यादव के शासन में कितना विकास हुआ है, यह राज्य सरकार को दिखाना है.

पाठक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र–वाराणसी का हवाला देते हुए कहते हैं कि राज्य सरकार वहां दो साल से ज्यादा समय में बस स्टैण्ड के पास बनने वाले फ्लाईओवर के केवल आठ खंभे ही अभी तक बनवा पाई है. इसकी तुलना में इसी अवधि में प्रधानमंत्री के एजेण्डे वाले बाबतपुर हवाई अड्डे से सड़क निर्माण के लिए 18 खम्भे निर्मित कर दिए गए जो देखे जा सकते हैं.

वह कहते हैं कि लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र लखनऊ में राज्य की राजधानी के लिए रिंग रोड योजना ब्लूप्रिंट के चरण से बाहर नहीं निकल पाई है.

यहां कि 80 लोकसभा सीटों में से 72 पर जीत दर्ज कराने वाली भाजपा के सामने विधानसभा में भी इसी उपलब्धि को दोहराने की चुनौती है. यह चुनौती का भार न सिर्फ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह बल्कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे राजनाथ सिंह के कंधों पर भी होगा.

First published: 12 September 2016, 7:31 IST
 
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