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तमिलनाडु में जया की वापसी इतिहास बदलने वाली घटना है

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST

लड़कियों के बाइक खरीदने पर 50 फीसदी सब्सिडी, राशन कार्ड वालों को मुफ्त मोबाइल, स्कूली बच्चों को इंटरनेट के साथ मुफ्त लैपटॉप जैसे लोकलुभावन वादे करने वाली जे जयललिता लगातार दूसरी बार तमिलनाडु की सत्ता संभालने जा रही हैं.

अधिकतर चुनावी सर्वेक्षणों को गलत साबित करते हुए एआईएडीएमके ने विधानसभा चुनाव में बहुमत हासिल किया है. चुनाव परिणाम और रुझान बता रहे हैं कि तमिलनाडु में एआईएडीएम को 234 में से 133 सीटों पर जीत हासिल करती दिख रही हैं. डीएमके-कांग्रेस गठबंधन को 96 सीटें ही मिलती दिख रही हैं.

डीएमके को 88 जबकि कांग्रेस को आठ सीटें मिली है. इसके अलावा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) और पुथिया तमिलागम को एक-एक सीटें मिली हैं.

इस तरह जयललिता का छठी बार तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनना तय हो चुका है. वह भारतीय चुनावी इतिहास में सबसे ज्यादा बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाने जा रही हैं. तमिलनाडु में 28 साल में बाद किसी पार्टी को विधानसभा चुनावों में लगातार दूसरी बार जीत मिली है.

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राधाकृष्णन नगर विधानसभा सीट से मुख्यमंत्री जयललिता ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी डीएमके के शिमला मुथुचोझेन को करीब 40 हजार मतों से हराया है. इसके अलावा डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि थिरुवरुर और उनके बेटे स्‍टालिन कोलाथुर सीट से चुनाव जीत गए हैं.

जीत के बाद जयललिता ने कहा कि द्रमुक के परिवार की राजनीति का अंत हो गया है और लोगों ने द्रमुक के 'झूठे अभियान' को नकार दिया है. उन्‍होंने एआईएडीएमके की जीत के लिए मतदाताओं को धन्यवाद दिया.

जयललिता का राजनीतिक सफर

लगातार दूसरी बार पार्टी को सत्ता दिलाने वाली जयललिता राजनीति में आने से पहले फिल्मों में अभिनेत्री रह चुकी हैं.  68 वर्षीय जयललिता पिछले 35 सालों से सक्रिय राजनीति में हैं और अब वो छठी बार राज्य की मुख्यमंत्री बनने जा रही हैं.

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तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और अभिनेता एम जी रामचंद्रन ने उन्हें राजनीति में लेकर आए थे. 1991 में राज्य का मुख्यमंत्री बनने से पहले वह राज्यसभा सदस्य रह चुकी हैं. पिछले लोकसभा चुुनाव में उनकी पार्टी ने करिश्माई प्रदर्शन करते हुए राज्य की 39 सीटों में 37 पर जीत दर्ज की थी.

डीएमके का प्रदर्शन सुधरा

पिछले विधानसभा चुनाव (2011) में डीएमके-कांग्रेस गठबंधन को केवल 33 सीटें मिली थी. 2014 के आम चुनाव में दोनों पार्टियां तमिलनाडु में एक भी सीट जीतने में नाकाम रही थी.

इस विधानसभा चुनाव में डीएमके ने अपनी सीटों की संख्या लगभग तिगुनी कर ली है. पिछली बार उसे 23 सीटें मिली थी जबकि इस बार पार्टी 89 सीटें जीत चुकी है.

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राजनीतिक जानकारों के अनुसार परिवार में अंदरूनी कलह के चलते डीएमके को मदुरै और उसके आस-पास के इलाकों में नुकसान उठाना पड़ा है. करुणानिधि के बड़े बेटे अलागिरी पार्टी से नाराज चल रहे थे. इस चुनाव में उन्होंने वोट नहीं डालने का फैसला किया था.

विजयकांत का सपना टूटा

राज्य में अक्टूबर, 2015 में सीपीआई, सीपीएम, वाइको की द्रविड़ियन पार्टी एमडीएमके, दलित पार्टी वीसीके ने पीपुल्स वेलफेयर फ्रंट बनाया था. चार दलों के इस फ्रंट ने बाद में जीके वासन की तमिल मनीला कांग्रेस और विजयकांत के डीएमडीके से एलायंस किया और इस फ्रंट ने विजयकांत को सीएम कैंडिडेट घोषित किया था.

तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनने की चाहत रखने वाले विजयकांत को इस चुनाव में उलुंदुरपेट्टई सीट पर करारी हार का सामना करना पड़ा. यह सीट एआईएडीएमके के खाते में गई और विजयकांत तीसरे स्थान पर रहे. पिछले चुनाव में उनकी पार्टी को 29 सीटों पर जीत मिली थी और इस बार पार्टी खाता खोलने में भी असफल रही.

First published: 19 May 2016, 9:54 IST
 
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