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'असम में गगोई ने सत्ता में बने रहने के लिए घुसपैठ को बढ़ावा दिया'

मनीष मिश्र | Updated on: 1 February 2016, 8:13 IST
QUICK PILL
भाजपा ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. असम में होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले उसने केंद्रीय खेल एवं युवा मामलों के राज्य मंत्री सर्वानंद सोनोवाल को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है. इससे पहले लगातार भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर भरोसा करती आई थी. पार्टी ने महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा, जम्मू कश्मीर और बिहार में बिना किसी चेहरे के चुनाव लड़ा. बीच में एक अपवाद दिल्ली रहा जहां किरण बेदी भाजपा की मुख्यमंत्री पद की नेता थीं.माना जा रहा है कि बिहार में मिली करारी हार के बाद पार्टी ने अपनी रणनीचि बदली है. असम में सर्वानंद सोनोवाल को मुख्य चेहरा बनाने के पीछे कुछ और भी सवाल खड़े हुए हैं. मसलन जिन पांच राज्यों में अगले दो महीने बाद चुनाव प्रस्तावित है उनमें अकेला असम ही ऐसा राज्य है जहां भाजपा का अपना जनाधार है. पिछले लोकसभा चुनाव में यहां की 14 में से सात सीटें भाजपा ने जीती थीं. बावजूद इसके असम में भाजपा नरेंद्र मोदी पर भरोसा नहीं कर पा रही है.
कहीं न कहीं अंदरखाने में यह सोच मजबूत हुई है कि अब मोदी पर देश की जनता उतना भरोसा नहीं कर रही है जितना आज से डेढ़ साल पहले था. जाहिर है इन तमाम उम्मीदों का बड़ा बोझ सर्वानंद सोनोवाल के ऊपर रहेगा. कैसे देखते हैं वो इस चुनौती को?इन्हीं मुद्दों पर मनीष कुमार मिश्र ने सोनोवाल से बातचीत की:

भाजपा ने आपको असम में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद का उमीदवार बनाया है जबकि इससे पहले तमाम राज्यों में भाजपा ने मुख्यमंत्री घोषित नही करके प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ा था. क्या पार्टी ने मान लिया है कि अब नरेन्द्र मोदी नाम पर वोट नहीं मिलेगा?

पार्टी की रणनीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है. मोदीजी आज भी उतने ही लोकप्रिय है जितना कल थे. पार्टी पहले भी ऐसा करती रही है. मैं इसे ऐसे देखता हूं कि असम के लोगों की यह इच्छा थी लिहाजा भाजपा के केन्द्रीय नेत्रृत्व ने असम की जनता की भावना को समझते हुए मुझे मुख्यमंत्री पद का उमीदवार बनाया है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का मै आभारी हूं कि उन्होंने मुझपर भरोसा किया. अब यह मेरी जिम्मेदारी है कि असम में बीजेपी की सरकार बने.

लेकिन असम में आपके लिए चुनौती आसान नहीं है. अटकलें हैं कि कांग्रेस असम में एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ेगी. अगर ऐसा होता है तो एक बार फिर आप लोगों के सामने बिहार जैसी स्थिति बन जाएगी. वोटों का समीकरण कांग्रेस की तरफ झुक जाएगा?

2014 के लोकसभा चुनाव में यहां से भाजपा को 14 सीटो में से सात सीटे मिली थी. यह असम के लोगों का कांग्रेस से मोहभंग का स्पष्ट संकेत है. इस विधानसभा चुनाव में भाजपा कांग्रेस को सत्ता से बाहर करके जनता की उस भावना को अमलीजामा पहनाएगी. हम कांग्रेस और एआईयूडीएफ के बीच होने वाले किसी भी गठबंधन से परेशान नहीं हैं. उल्टे ऐसा करके कांग्रेस जनता के बीच एक्सपोज़ हो जाएगी. एआईयूडीएफ खुलेआम सांप्रदायिक राजनीति करती है. इसका फायदा हमें मिलेगा.

भाजपा को कोई कठिनाइ नहीं होनवाली है. असम की जनता कांग्रेस के भ्रष्टाचार और घोटालों से आजिज आ चुकी है. 2014 में इसी के कारण दिल्ली से इनका सपाया हुआ था अब ये लोग असम से भी साफ हो जाएंगे.  कांग्रेस को असम में अपनी हार साफ दिख रही है इसलिए वो एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन का हथकंडा अपना रही है.

अगर असम में कांग्रेस-एआईयूडीएफ के बीच गठजोड़ होता है तो बड़े पैमाने पर अल्पसंख्यक वोट का धुव्रीकरण होगा. यह आपके लिए फायदेमंद है या नुकसानदेह?

हमारा ध्यान सिर्फ धार्मिक आधार पर वोट जुटाना नहीं है. असम में हमें सभी जाति और धर्मों का साथ मिलेगा. असमिया, बुद्धिस्ट, जैन, नेपाली, बिहारी, जनजाति, गैर जनजाति, मुसलमान, सिख, ईसाई सबका समर्थन पाने की कोशिश रहेगी. हम जनता के बीच कांग्रेस-एआइयूडीएफ के बीच परदे के पीछे चल रहे खेल को बेनकाब करेंगे. यह अवसरवाद बार-बार नहीं चेलगा.

बांग्लादेश से होने वाली अवैध घुसपैठ असम में एक बड़ा राजनीतिक और संवेदनशील मुद्दा है. आईएमडीटी एक्ट लागू होने के बाद काफी बड़े पैमाने पर अवैध बांग्लादेशी लोग असम में बस गए. सुप्रीमकोर्ट ने उस एक्ट को असंवैधानिक करार दिया और असम समेत पूरे पूर्वोत्तर के लिए खतरा बताते हुए निरस्त कर दिया.

अगर आप की सरकार असम में बनती है तो आप अवैध घुसपैठ को लेकर आपकी सरकार का नजरिया क्या होगा?

मैंने असम में लागू आईएमडीटी एक्ट को हटाने के लिए काफी लम्बी कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में लड़ी. 2005 में सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त कर दिया. जैसे ही बीजेपी के सरकार केंद्र में आई, असम में रहने वाले सभी नागरिको का नेशनल सिटिजनशिप रजिस्टर में नाम दर्ज करने का काम शुरू किया गया है साथ ही असम से लगी बांग्लादेश की सीमा पर बाड़ लगाकर उसे सील करने की दिशा में काम शुरू किया है.

भारत सरकार ने बांग्लादेश के साथ भूमि समझौता किया है. अगर बीजेपी सरकार असम में बनती है तो वो अवैध घुसपैठ हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता में होगा. इसे हल करने की दिशा में हम काम करेंगे.

अगर बीजेपी असम की सत्ता में आती है तो और कौन से काम आपकी प्राथमिकता में होंगे?

असम की जनता ने मुझे अपना प्रतिनिधि बनाकर लोकसभा में भेजा है. अगर मेरी सरकार वहां बनी तो सबका साथ सबका विकास ही मेरा मुख्य एजेंडा होगा. बृहतर असमियों की पहचान, उनकी संस्कृति की रक्षा करना, यहां के 23 लाख बेरोजगार युवाओं को रोजगार देना मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने युवाओं के लिए कई फ्लैगशिप योजनाओं की शुरूआत की है जैसे स्किल इण्डिया, स्टार्टअप इण्डिया आदि. इससे पूरे देश के युवाओं के साथ असम के युवाओ को भी रोजगार मिलेगा.

अभी हाल ही में हेमंत बिश्वशर्मा समेत कांग्रेस पार्टी के कई एमएलए आपकी पार्टी में शामिल हुए हैं. असम बीजेपी की स्थानीय इकाइयां उनको कैसे स्वीकार करेंगी. क्या इससे अंदरूनी खींचतान की नौबत नहीं आएगी?

ऐसा नहीं होगा! लोकसभा चुनाव में हम लोगों ने एक टीम भावना के साथ चुनाव लड़ा था उसमें हम सफल रहे. जो लोग कांग्रेस पार्टी से बीजेपी में आये है वो लोग विधायक रहे है, काफी अनुभवी हैं. हमारी पार्टी उनके अनुभव का पूरा उपयोग करेगी. असम भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष  के नाते सभी लोगों को साथ लेकर चलना मेरी जिम्मेदारी होगी.

कुछ दिन पहले ही तरुण गगोई के नेत्रृत्व वाली सरकार ने 500 करोड़ की एक योजना लागू की थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने ये कहते हुए रोक लगा दी है की चुनावी साल में इस तरह की योजना लागू नहीं हो सकती है. इस पर आप का क्या कहना है?

मैं यही कहूंगा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कांग्रेस की नीतियों को गलत मानकर इस पर रोक लगाने का काम किया है. मैं एक बात और कहना चाहता हूं कि असम में कांग्रेस पार्टी की तरुण गगोई की सरकार ने सत्ता में बने रहने के लिए अवैध घुसपैठ को बढ़ावा दिया है. जिससे असम में अवैध घुसपैठ की समस्या ने विकराल रूप ले लिया है. यही सब हथकंडे अपनाकर कांग्रेस असम में सत्ता में बनी हुई थी.

असम को जटिल समस्याओं की धरती के रूप में जाना जाता है लेकिन सही मायने में असम की धरती संभावनाओं से भरी है.

First published: 1 February 2016, 8:13 IST
 
मनीष मिश्र @catchnews

स्वतंत्र पत्रकार

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