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तेलंगाना: वेतन में 400 फीसदी का उछाल चाहते हैं यहां के विधायक

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 March 2016, 16:49 IST
QUICK PILL
  • अगर विधायकोंं के लिए प्रस्तावित नई वेतन प्रणाली लागू होती है तो तेलंगाना के सरकारी\r\nखजाने पर सालाना करीब 100\r\nकरोड़ रुपये\r\nका बोझ बढ़ जाएगा.
  • नई वेतन व्यवस्था में राज्य का\r\nप्रत्येक विधायक प्रतिवर्ष\r\nकरीब आधा करोड़ रुपये की\r\nभारी-भरकम\r\nरकम वेतन पाने का हकदार हो\r\nजाएगा.
  • देश\r\nके विभिन्न राज्यों में विधायकों\r\nके वेतन ढांचे का अध्ययन करने\r\nके बाद राज्य सरकार जल्द ही\r\nअपने इन प्रस्तावों से परिपूर्ण\r\nप्रस्ताव विधानसभा में पेश\r\nकरने करेगी.

अगर तेलंगाना में सरकार का नेतृत्व कर रहे के चंद्रशेखर राव सहमति दे देते हैं तो जल्द ही तेलंगाना का प्रत्येक विधायक कम से कम एक स्तर पर तो शीर्ष बिजनेस स्कूल और आईआईटी के स्नातकों की बराबरी में खड़े होने लायक हो जाएंगे. सरकारी खजाने पर सालाना करीब 100 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ाते हुए राज्य का प्रत्येक विधायक प्रतिवर्ष करीब आधा करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम का वेतन पाने का हकदार हो जाएगा.

फिलहाल तेलंगाना के प्रत्येक विधायक को प्रतिमाह 95 हजार रुपये वेतन के रूप में और 25 हजार रुपये मकान किराया भत्ता (एचआरए) के रूप मिल रहा है. लेकिन अगर सरकार उनकी मांग मान लेती है तो यह रकम करीब 400 प्रतिशत के उछाल के साथ 4 लाख रुपये प्रतिमाह के आंकड़े तक पहुंच जाएगी.

इस हालत में तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) की चंद्रशेखर राव सरकार को दूसरी पार्टियां छोड़कर समर्थन देने आए विधायकों का भी जमकर समर्थन मिल रहा है. राज्य के विधानमंडल के दोनों सदनों में टीआरएस की राजनीतिक स्थिति सुदृढ़ करने में मदद वाले सभी पार्टियों के एमएलए और एमएलसी उन्हें अपने ही अंदाज में शुक्रिया कह रहे हैं?

अगर सरकार उनकी मांग मान लेती है तो यह रकम करीब 400 प्रतिशत उछाल के साथ 4 लाख रुपये प्रतिमाह तक पहुंच जाएगी


विधानसभा अध्यक्ष एस मधुसूधनचारी की अगुवाई वाली एमनिटीज़ समिति ने बीते सोमवार को इस प्रस्ताव पर चर्चा की और एक भी विधायक ने इस बेतहाशा वृद्धि का विरोध नहीं किया. राज्य विधान परिषद के अध्यक्ष स्वामी गौड़ के अलावा इतेला राजेंद्र, टी हरीश राव, तुमाला नागेश्वर राव जैसे मंत्री, मुख्य सरकारी सचेतक कोप्पुला ईश्वर, टीडीपी विधायक संद्रा वेंकट वीरैया, टीआरएस विधायक इराबेली दयाकर राव, एमआईएम के अकबरुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस विधायक जी चिन्ना रेड्डी, बीजेपी विधायक चिंताला रामचंद्र रेड्डी के साथ कांग्रेस एमएलसी पी सुधाकर रेड्डी और पाथुरी सुधाकर रेड्डी ने भी इस बैठक में भाग लिया.

सभी विधायकों का जोर इस बात पर था कि विधायकों के दिन-प्रतिदिन के खर्चे लगातार बढ़ते जा रहे हैं और इनसे पार पाने के लिये उनका वेतन बढ़कर प्रतिमाह 3.5 लाख रुपये किया जाए और साथ ही एचआरए में भी वृद्धि करते हुए उसे 50 हजार रुपये कर दिया जाए.

विधायकों ने इसके अलावा अपने निजी सहायक का भत्ता भी पूर्व के 10 हजार रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह करने का प्रस्ताव रखा. इसके अलावा विधायकों को वाहन खरीदने के लिये मिलने वाले ऋण को भी 15 लाख से बढ़ाकर 40 लाख रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है, वह भी वर्तमान में प्रचलित मात्र दो प्रतिशत की मामूली ब्याज दर पर. सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए लगभग तैयार है बस वह इसमें थोड़ा सा संशोधन करना चाहती है. लोन की सीमा को थोड़ा सा घटाकर वह इसे 30 लाख करने पर विचार कर रही है.

समिति ने पूर्व विधायकों और विधान परिषद सदस्यों को मिलने वाली पेंशन को भी बढ़ाकर प्रतिमाह 50 हजार से 65 हजार रुपये के मध्य करने का फैसला किया है. इसके अलावा किसी भी पूर्व सदस्य की मृत्यु होने की स्थिति में उसके आश्रित को भी इतनी ही पेंशन देने का फैसला किया गया.

देश के विभिन्न राज्यों में विधायकों के वेतन ढांचे का अध्ययन करने के बाद राज्य सरकार जल्द ही अपने इन प्रस्तावों से परिपूर्ण प्रस्ताव विधानसभा में पेश करने करेगी.

विधायकों को वाहन खरीदने के लिये मिलने वाले ऋण को भी 15 लाख से बढ़ाकर 40 लाख रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है


तेलंगाना कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष मल्लू भट्टी विक्रमार्का का कहना है कि उन्होंने अभी इस प्रस्ताव की बारीकियों का अध्ययन नहीं किया है. हालांकि उन्होंने कैच न्यूज़ से कहा कि अगर प्रत्येक विधायक द्वारा तय किये जाने वाले किलोमीटर और उनके साथ सफर करने वाले लोगों की संख्या के अलावा उनके निर्वाचन क्षेत्र में आने वाले दो लाख मतदाताओं तक पहुंचने के लिये आने वाली लागत को ध्यान में रखा जाए तो अनुमानित लागत कई गुना अधिक बैठती है.

एक अन्य विधायक जो आलोचना के डर से अपना नाम सार्वजनिक नहीं करना चाहते, का कहना है कि प्रत्येक विधायक को रात-दिन लगकर जितना काम करना पड़ता है उसके बदले चार लाख रुपये की रकम बेहद मामूली है.

इसके अलावा तेलंगाना राज्य सरकार कई और ऐसी योजनाओं के साथ सामने आ रही है जिन्हें पूरा करने में सरकारी खजाने पर भारी ऋण का दबाव पैदा हो सकता है. ऐसा होने की स्थिति में राज्य गहरे वित्तीय संकट में आ सकता है. मुख्यमंत्री केसीआर की विभिन्न स्वप्निल परियोजनाओं के वित्तीय अनुमान कई जरूरी जनहित की परियोजनाओं के भाग्य को अधर में फंसा रहे हैं.

आखिर राज्य इन सबके लिये पैसा कहां से जुटाएगा? विधायकों का संभावित वेतनवृद्धि एक असाधारण खर्चा है. इसके अलावा दूसरी विभिन्न परियोजनाओं की परिकल्पना भी वित्तीय विशेषज्ञों को हैरानी में डालने वाली है. ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) के चुनावों में जबर्दस्त जीत के बाद केसीआर ने स्काईवेज़ और मल्टी-लेवल फ्लाईओवरों से सुसज्जित वैश्विक शहर बनाने की घोषणा की थी जिसपर करीब 60 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.

मुख्यमंत्री केसीआर की स्वप्निल परियोजनाओं के वित्तीय अनुमान कई जरूरी जनहित की परियोजनाओं का भाग्य अधर में फंसा रहे हैं


इसके अलावा मुख्यमंत्री की ‘‘मिशन भागीरथ’’ जल ग्रिड परियोजना के भी 35 हजार करोड़ रुपये लागत का अनुमान है. केसीआर की सचिवालय को स्थानांतरित करने में करीब 150 करोड़ रुपये और उनके कैंप कार्यालय पर करीब 35 करोड़ रुपये व्यय होने का अनुमान है.

मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय का वास्तव में दो बार नवीनीकरण किया जा चुका है. कमजोर तबके के लिये तैयार किये जाने वाले दो कमरों के मकानों की योजना पर करीब 20 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है क्योंकि 700 वर्गफीट के एक मकान की कीमत 900 रुपये प्रति वर्गफीट रखी गई है. सरकार का इरादा हैदराबाद में एक लाख मकानों का निर्माण करने के अलावा तेलंगाना के अन्य इलाकों में भी एक लाख मकान तैयार करने का है.

केसीआर ने राज्य का दौरा करते समय मतदाताओं की विभिन्न लोकप्रिय मांगों को पूरा करने के लिये राज्य के बजट में स्वयं को 4765 करोड़ रुपये आवंटित करने के अलावा मंत्रियों के लिये भी 25 करोड़ रुपये का आवंटन किया है. किसानों के लिये किश्तों में जारी किये जाने वाला कृषि माफी ऋण योजना, किसानों को नौ घंटे बिजली आपूर्ति देने के लिये बिजली खरीदने सहित कई अन्य योजनाएं आने वाले समय में राज्य सरकार के गले का फंदा साबित हो सकती हैं.

सच्चाई यह है कि तेलंगाना विभाजन के दौरान विरासत में मिले 60 हजार करोड़ रुपये के भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है. इसके अलावा बीते दो वर्षों में सार्वजनिक ऋण भी बढ़कर 83 हजार करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है.

लेकिन केसीआर का बजट कहीं से भी अपनी चादर देखकर पांव फैलाने का नजारा पेश करता नहीं प्रतीत होता.

First published: 25 March 2016, 16:49 IST
 
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