Home » इंडिया » the-budget-recognizes-the-major-challenges-that-the-railways-has
 

चुनौतियों पर रेलवे का रहा ध्यान

शौर्ज्य भौमिक | Updated on: 26 February 2016, 23:09 IST
QUICK PILL
  • रेलवे की फंडिंग को लेकर जो विकल्प अख्तियार किया गया है वह शानदार है और इस प्रक्रिया में राज्यों को शामिल करने से दोहरा फायदा होगा. एक तो उन्हें फंड भी मिलेगा और दूसरा राज्यों को इस प्रक्रिया में भागीदार बनाया जा सकेगा.
  • रेलवे को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के संदर्भ  में कर्मचारियों पर होने वाले खर्च की लागत का भी जिक्र करना चाहिए था. खर्च के एक बड़े हिस्से को व्यवस्थित तरीके से संबोधित करना चाहिए था ताकि रेलवे उस खाई में डूबने से बच सके जहां से उसे निकाला नहीं जा सकता.

बजट में उन बड़ी चुनौतियों का जिक्र किया गया है जिसका सामना रेलवे को करना पड़ रहा है. सर्विस सेक्टर को उस क्षेत्र के तौर पर आगे रखा गया है जहां कई सारे उपायों की घोषणा की गई है. इसके तहत कई स्टेशनों पर वाई-फाई लगाने का वादा किया गया है. 

कई लोग ट्रेन से सफर करने के दौरान ट्रेन के देर होने की वजह से घंटों स्टेशन पर इंतजार करते हैं. ऐसे में अगर स्टेशनों पर वाई-फाई की सुविधा मुहैया कराई जाती है तो यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी.

मोबाइल की ताकत का अंदाजा लगाते हुए इस रेल बजट में कई ऐसी सर्विसेज को मोबाइल प्लेटफॉर्म से जोड़ने जाने की घोषणा की गई है जिसमें एसएमएस की मदद से कोच की सफाई के लिए सफाईकर्मी को बुलाना शामिल है. क्षमता में विस्तार की योजना को इलेक्ट्रिफिकेशन और नए ट्रैक को बिछाने के जरिये पूरा किया जाएगा. हालांकि मुझे उस वक्त निराशा हुई जब मैंने यह देखा कि सिग्नलिंग सिस्टम के आधुनिकीकरण में टेक्नोलॉजी को उस हद तक समाहित करने की कोशिश नहीं की गई है.

फंडिंग का नया तरीका

रेलवे की फंडिंग को लेकर जो विकल्प अख्तियार किया गया है वह शानदार है और इस प्रक्रिया में राज्यों को शामिल करने से दोहरा फायदा होगा. एक तो उन्हें फंड भी मिलेगा और दूसरा राज्यों को इस प्रक्रिया में भागीदार बनाया जा सकेगा. हालांकि यह देखना होगा कि फंड का किस तरह से इस्तेमाल किया जाता है ताकि निवेश पर सुरक्षित रिटर्न मुहैया कराया जा सके.

इन उपायों से रेलवे को कम कीमत पर बिजली खरीदने में मदद मिलेगी और शायद उन्हें सीधे ही डीजल को आयात करने की अनुमति मिल जाएगी.

बजट में कहा गया है कि रेलवे हर दिन लाखों कॉल कर यात्रियों का फीडबैक लेता है और इस दौरान इंटरनेट का भी इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि रेलवे को यह बात समझनी होगी कि उसे यह काम प्रशिक्षित मैनेजमेंट कर्मचारियों की मदद से किया जाना चाहिए ताकि सही सवाल की मदद से वैज्ञानिक तरीके से सर्वेक्षण को पूरा किया जा सके. फिर इसके आधार पर कुछ नई सर्विसेज को शुरू किया जाना चाहिए और इसके लिए उपभोक्ताओं को प्रीमियम का भुगतान करना होगा.

मसलन कैसे शहरी विभाग मंत्रालय ने स्मार्ट सिटी प्रस्ताव पर सलाहकारों और विशेषज्ञों की मदद ली क्योंकि उन्हें लगता था कि यह काम नौकरशाहरों की मदद से नहीं किया जा सकता था. स्मार्ट सिटी दो शहरों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है ऐसे में रेलवे भी इस तरीके को अख्तियार करते हुए जोन के बीच में इस तरह की प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दे सकता है.

रेलवे को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के संदर्भ  में कर्मचारियों पर होने वाले खर्च की लागत का भी जिक्र करना चाहिए था

खर्च के एक बड़े हिस्से को व्यवस्थित तरीके से संबोधित करना चाहिए था ताकि रेलवे उस खाई में डूबने से बच सके जहां से उसे निकाला नहीं जा सकता. पीपीपी मॉडल की मदद से वेयरहाउस सुविधाओं को बहाल किए जाने का विचार जबरदस्त है और इसे जल्द लागू किए जाने की उम्मीद की जानी चाहिए ताकि हाईवे से ट्रैफिक को बाहर  करने में मदद मिल सके. 

इसके अलावा प्रत्येक टन की ढुलाई में खर्च होने वाले ईंधन खपत को कम किया जा सके. स्टेशनों का पुनर्निमाण, ट्रैक के आस-पास की जमीन का मौद्रीकरण और गैर रेलवे कारोबार से राजस्व जुटाने के मामले में कई सारे बयान दिए गए हैं.

हम इस बारे में दशकों से सुनते आ रहे हैं लेकिन इस बार हम उम्मीद कर सकते हैं कि इस मद से आने वाने रेवेन्यू को मौजूदा 5 फीसदी से बढ़ाकर 10 या 20 फीसदी करना चाहिए. 

यह जानना दिलचस्प है कि रेल मंत्री ने पिछले बजट में किए गए प्रत्येक वादों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया है. हालांकि ट्रांसलोक को बनाए जाने और प्रोजेक्ट को लागू किए जाने की दिशा में ईपीसी मॉडल की शुरुआत को तेज किया जाना चाहिए ताकि इस साल समय से पहले इन परियोजनाओं को पूरा किया जा सके.

हम उम्मीद करते हैं कि मंत्री हर साल इस तरह का रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगे. यह साल रेलवे के लिए मुश्किल रहा है और अभी तक औद्योगिक रिकवरी की दिशा में मामूली प्रगति ही हो पाई है. मंत्री को पूंजीगत और राजस्व आधारित खर्च पर विशेष नजर रखनी होगी. इसके साथ राजस्व देने वाली परियोजनाओं को समय पर पूरा किए जाने पर उन्हें नजर बनाए रखनी होगी. 

और पढ़ें: खराब वैश्विक हालात के बावजूद 7.6% रहेगी जीडीपी दर

और पढ़ें: बज़ट 2016-17: विकास दर के मामले में जेटली को बनना होगा यथार्थवादी

और पढ़ें: रेल बजट 2016: क्या रेल मंत्री इन मुद्दों पर खरा उतर पाएंगे?

First published: 26 February 2016, 23:09 IST
 
शौर्ज्य भौमिक @sourjyabhowmick

संवाददाता, कैच न्यूज़, डेटा माइनिंग से प्यार. हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियास्पेंड में काम कर चुके हैं.

पिछली कहानी
अगली कहानी