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दवाओं की कीमतों पर निगरानी कैसे करे एनपीपीए

विशाख उन्नीकृष्णन | Updated on: 22 January 2017, 8:52 IST

नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) देश में दवाओं की कीमत पर नजर रखता है. हो सकता है, उसका अधिकार-पत्र उम्मीद के हिसाब से ना हो, पर इसके फैसले औषध उद्योग और ग्राहकों के लिए मायने रखते हैं. पिछले साल दिसंबर में एनपीपीए ने 50 से ज्यादा जरूरी दवाओं की उच्चतम मूल्य सीमा निर्धारित की थी. इन दवाओं में एचआईवी संक्रमण, दुश्चिंता मनोविकार, मधुमेह और अन्य बैक्टिरियल इंफेक्शन थे. कुछ मामलों में इसका मतलब था, कीमत में 40 प्रतिशत तक की कटौती और 29 दवा फार्मूलों की निश्चित खुदरा कीमत.

एनपीपीए की स्थापना जरूरी दवाओं की कीमतों पर निगरानी रखने के मकसद से 1997 में की गई थी. इसका नवीनतम आदेश औषध मूल्य नियंत्रण आदेश (2013) फिलहाल 432 दवाओं की कीमतें निर्धारित करता है, इसके मद्देनजर कि वे आम आदमी के लिए कितनी ‘जरूरी’ हैं.

स्टेंट का मूल्य निर्धारण

एनपीपीए ने जब देखा कि कुछ अस्पताल स्टेंट का मूल्य बहुत ही हास्यास्पद ढंग से 600 प्रतिशत तक बढ़ा रहे हैं, तो उसने स्टेंट का उच्चतम मूल्य निश्चित करना तय किया. पर वह अब तक तय नहीं कर पाया है. इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किया है. स्टेंट ट्यूब्स होती हैं, जो हृदय की अवरुद्ध धमनियों को खोलने और हृदयाघात से बचाने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं.

एनपीपीए ने एक प्रक्रिया तय की है, जिसे स्टेंट के मूल्य निर्धारण पर लागू करना अभी बाकी है. अथॉरिटी ने कोरोनरी स्टेंट निर्माताओं, वितरकों, विक्रेताओं और निर्यातकों से कीमतों और मुनाफे पर जानकारी ली. उसने जानने की कोशिश की कि औषध मूल्य नियंत्रण आदेश 2013 की अनुसूची-1 के अधीन स्टेंट की क्या कीमतें रखी जाएं, जो सरकार की अधिसूचना के अनुकूल हो.

एनपीपीए ने कोरोनरी स्टेंट की कीमत का निर्धारण आवश्यक औषधि की राष्ट्रीय सूची (नेशनल लिस्ट ऑफ असेंशल मेडिसिन) के अधीन मूल्य निर्धारण की सूची में रखा है. एनपीपीए ने पाया कि स्टेंट निर्माता 20 से 56 फीसदी लाभ कमाते हैं, जबकि वितरक 11 प्रतिशत से 196 प्रतिशत तक का मार्जिन रखते हैं. अस्पताल 11 से 600 प्रतिशत तक का मार्जिन रखते हैं.  

रसायन और उर्वरक मंत्री अनंत कुमार ने भी प्रेस कांफ्रेस में मीडिया को बताया कि अगले महीने तक स्टेट की कीमतें नियंत्रित कर दी जाएंगी. 

एक सबसे अहम कदम, जिसकी अभी तक रिपोर्ट नहीं की गई है, वह यह कि एनपीपीए ने स्टेंट के वितरकों, निर्माताओं और निर्यातकों को इंटीग्रेटिड फार्मास्युटिकल डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (आईपीडीएमएस) पर अपना पंजीयन कराने को कहा है. आईपीडीएमएस, सूचनाओं का डेटा बैंक, स्टेंट के मूल्य निर्धारण को आवश्यक रूप से सुनिश्चित करेगा और निर्धारक को उन पर निगरानी करने देगा. 

एनपीपीए रहेगा

निसंदेह एनपीपीए का महत्व है. नवंबर में रसायन और उर्वरक मंत्रालय के सूत्रों ने जानकारी दी थी कि एनपीपीए को समाप्त कर दिया जाएगा. पिछले साल दिसंबर के शुरू में स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी कैच को बताया था कि एनपीपीए को एक ‘नया अधिकार-पत्र’ देने पर विमर्श चल रहा है. अगर सूत्र की मानें, तो दवाओं की कीमतों के लिए एनपीपीए के नियंत्रण से कोई भी नहीं बच सकेगा. और पूरा दायित्व फार्मास्युटिकल विभाग पर रहेगा.

फार्मास्युटिकल विभाग के सूत्रों ने कहा है कि एनपीपीए को समाप्त नहीं किया जाएगा और अथॉरिटी के पास शक्तियां रहेंगी. ‘हम सबको सस्ती स्वास्थ्य देखभाल मुहैया कराने के लिए काम कर रहे हैं. यह जारी रहेगा. हम और जन औषधि ड्रग स्टोर्स (सरकारी स्टोर्स जो जेनेरिक दवाएं देते हैं) खोलने की प्रक्रिया में हैं.’

एनपीपीए के अध्यक्ष भूपेंदर सिंह ने भी कहा कि उन्हें एनपीपीए को खत्म करने के विचार की जानकारी नहीं थी और ना ही उसके अधिकार-पत्र को बदलने की. उन्होंने यह भी कहा कि नीति आयोग (जिसने एनपीपीए को खत्म करने का विचार रखा था) के पास अथॉरिटी को खत्म करने की शक्तियां नहीं हैं और ना ही उसका अधिकार-पत्र बदलने की. फिलहाल यह अच्छी खबर है. 

First published: 22 January 2017, 8:52 IST
 
विशाख उन्नीकृष्णन @sparksofvishdom

A graduate of the Asian College of Journalism, Vishakh tracks stories on public policy, environment and culture. Previously at Mint, he enjoys bringing in a touch of humour to the darkest of times and hardest of stories. One word self-description: Quipster

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