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स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले उत्तर प्रदेश और बिहार फिसड्डी, पहले नंबर पर केरल

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 June 2019, 10:11 IST

बिहार में चमकी बुखार से हो रही बच्चों की मौत के बीच देश में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक बार फिर से बहस छिड़ गई है कि आखिर इतना खर्च करने के बावजूद देश की स्वास्थ्य सुविधाएं इतनी लचर क्यों हैं. स्वास्थ्य-परिवार कल्याण मंत्रालय और विश्व बैंक के तकनीकी सहयोग से तैयार की गई एक रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं.

जिसमें बताया गया है कि बिहार और उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बेहद खराब स्थिति में हैं. साथ ही इस रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि केरल देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में सबसे ऊंचे पायदन पर है. स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में यूपी-बिहार के अलावा उत्तराखंड और ओडिशा की भी हालत बेहद खराब है. हालांकि इस रिपोर्ट में हरियाणा, राजस्थान और झारखंड में हालात सुधरने की बात कही गई है.

स्वास्थ्य-परिवार कल्याण मंत्रालय और विश्व बैंक के तकनीकी सहयोग से तैयार की गई इस रिपोर्ट का शीर्षक 'स्वस्थ्य राज्य प्रगतिशील भारत’ रखा गया है. इस रिपोर्ट में सभी राज्यों की स्वास्थ्य सेवाओं के अलावा राज्यों की स्वास्थ्य सेवाओं में हुई प्रगति के बारे में बताया गया है. इसी के आधार पर इन्हें तुलनात्मक रैंकिंग दी गई है.

पिछली बार के मुकाबले सुधार के मामले में 21 बड़े राज्यों की सूची में बिहार 21वें स्थान के साथ सबसे निचले पायदान पर है. इस रिपोर्ट के मुताबिक साल 2015-16 की तुलना में 2017-18 में स्वास्थ्य क्षेत्र में बिहार का संपूर्ण प्रदर्शन सूचकांक 6.35 अंक गिरा है. इसी दौरान यूपी के प्रदर्शन में 5.08 अंक, उत्तराखंड के 5.02 अंक और ओडिशा के सूचकांक में 3.46 अंक की गिरावट दर्ज की गई है. यह दूसरा मौका है जब नीति आयोग ने स्वास्थ्य सूचकांक के आधार पर राज्यों की रैंकिंग की है.

संपूर्ण रैंकिंग में 21 बड़े राज्यों की सूची में उत्तर प्रदेश सबसे नीचे 21वें स्थान पर है. उसके बाद बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड हैं. वहीं इस सूची में सबसे ऊपर केरल है. उसके बाद क्रमश: आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात का स्थान हैं. रिपोर्ट के मुताबिक साल 2015-16 की तुलना में 2017-18 में स्वास्थ्य क्षेत्र में बिहार का संपूर्ण प्रदर्शन सूचकांक 6.35 अंक गिरा है. इसी दौरान उत्तर प्रदेश के प्रदर्शन सूचकांक में 5.08 अंक, उत्तराखंड 5.02 अंक तथा ओडिशा के सूचकांक में 3.46 अंक की गिरावट दर्ज की गई है.

इस रिपोर्ट में पिछली बार के मुकाबले सुधार और कुल मिलाकर बेहतर प्रदर्शन के आधार पर राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की रैंकिंग तैयार की गई है जो तीन श्रेणी में है. पहली श्रेणी में 21 बड़े राज्य, दूसरी श्रेणी में आठ छोटे राज्य और तीसरी श्रेणी में केंद्र शासित प्रदेशों को रखा गया. सूचकांक में सुधार के पैमाने पर हरियाणा का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा है. उसके 2017-18 के संपूर्ण सूचकांक में 6.55 अंक का सुधार हुआ है. उसके बाद दूसरे नंबर पर राजस्थान, तीसरे पर झारखंड और चौथे नंबर पर आंध्र प्रदेश का स्थान रहा है.

वहीं इस रिपोर्ट में पिछली बार के मुकाबले सुधार और कुल मिलाकर बेहतर प्रदर्शन के आधार पर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की रैंकिंग तीन श्रेणी में की गई है. पहली श्रेणी में 21 बड़े राज्यों, दूसरी श्रेणी में 8 छोटे राज्यों और तीसरी श्रेणी में केंद्र शासित प्रदेशों को रखा गया है.

देश के छोटे राज्यों में त्रिपुरा पहले नंबर पर है. वहीं दूसरे नंबर पर मणिपुर, फिर मिजोरम और चौथे नंबर पर नगालैंड का स्थान रहा. वहीं इसमें सबसे फिसड्डी अरुणाचल प्रदेश रहा है जो आठवें नंबर पर है. वहीं सातवें नंबरर पर सिक्किम, छठवें नंबर पर गोवा और पांचवे नंबर पर दिल्ली है.

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First published: 26 June 2019, 10:11 IST
 
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