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पाकिस्तान के न्यौते पर भारत की टेढ़ी नजरें द्विपक्षीय संबंधों के धुंधले भविष्य का इशारा है

सादिक़ नक़वी | Updated on: 21 August 2016, 7:23 IST

भारत ने पाकिस्तान से मिले द्विपक्षीय बातचीत के न्यौते पर कड़ा रुख अपनाया है. भारत के विदेश सचिव एस जयशंकर ने साफ कहा है कि वे पाकिस्तान जाकर अपने समकक्ष के साथ बातचीत करने को राजी हैं, मगर ऐसा तब होगा जब बातचीत जम्मू-कश्मीर में फैलाए जा रहे आतंकवाद पर हो.

उन्होंने पाकिस्तान द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया है. साथ ही विदेश सचिव ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह जम्मू-कश्मीर में अवैध रूप से कब्जाई गई जमीन को जल्द से जल्द खाली करवाने के मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ बातचीत करने को तैयार हैं.

पाकिस्तान के विदेश सचिव एजाज अहमद चौधरी ने ही इस वार्ता का प्रस्ताव दिल्ली को भेजा था. भारतीय विदेश सचिव ने एक बार फिर से दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इस मसले से पाकिस्तान का कोई लेना देना नहीं है.

इस बीच यह अटकलें भी खूब लग रही हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नवंबर में होने वाले सार्क सम्मेलन में भाग नहीं लेंगे. साथ ही पाकिस्तान में होने वाली सार्क की बैठक में वित्त मंत्री अरुण जेटली के भाग लेने पर भी अनिश्चितता बनी हुई है. विदेश मंत्रालय का कहना है कि उसे अभी इस बैठक में भाग लेने के बारे में तय करना है.

लक्ष्मण रेखा

असल में, पाकिस्तान कश्मीर घाटी में एक मुठभेड़ में हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से ही कश्मीर के मुद्दे पर बयानबाजी कर रहा है. इस मुद्दे को वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठा रहा है और भारत सरकार को जवाबी कार्रवाई करने के लिए मजबूर कर रहा है ताकि वह यह दिखा सके कि उसका पड़ोसी आतंकवाद को किस तरह जारी रखे है.

स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान को बलोचिस्तान में उसकी हिंसात्मक गतिविधियों के लिए निशाने पर लेकर एक नई परिपाटी का सूत्रपात किया.

यह ऐसा मुद्दा है जिसे पूर्ववर्ती नेता उठाने से बचते रहे थे. पाकिस्तान ने मोदी के इस भाषण को लक्ष्मण रेखा लांघने जैसा अपराध बताया है. मोदी के बलोचिस्तान का जिक्र करने पर यह सवाल कि क्या भारत की विदेश नीति में बदलाव हुआ है, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि भारत की विदेश नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है. भारत ने पहले भी बलोचिस्तान के मुद्दे को उठाया है.

प्रवक्ता ने कहा कि इस बार फर्क सिर्फ इतना है कि प्रधानमंत्री ने उस इलाके के लोगों से मिले विभिन्न संदेशों को आम लोगों से साझा किया है. प्रवक्ता ने यह भी कहा कि बलोचिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर के लोगों ने यह मुद्दा उठाने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद वाले संदेश भी भेजे हैं.

कलह के सूत्र

पाकिस्तान के विदेश सचिव ने, इसके पहले, अपने भारतीय समकक्ष को जम्मू-कश्मीर पर बातचीत करने के लिए पाकिस्तान आने की दावत दी थी. पाकिस्तान के अनुसार भारत और पाकिस्तान के बीच कलह का मुख्य कारण अभी भी बरकरार है.

भारत ने 16 अगस्त को पत्र का जवाब दे दिया जिसे पाकिस्तान में भारत के राजदूत गौतम बम्बाले ने 17 अगस्त को पाकिस्तान के विदेश विभाग को सौंप दिया है. विदेश सचिव ने लिखा है कि बातचीत सीमा पार से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर केंद्रित होनी चाहिए. यही महत्वपूर्ण पहलू है.

आतंक पर प्रहार

विदेश सचिव एस जयशंकर ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद फैलाना बंद करे, सीमा पार से घुसपैठ बंद हो. अंतरराष्ट्रीय स्तर के आतंकियों को गिरफ्तार कर दंडित किया जाए जिनकी राज्य में आतंकी गतिविधियों को फैलाने में सक्रिय भूमिका रही है.

पाकिस्तान कश्मीर में हिंसा फैलाने वाले उपद्रवी तत्वों को भड़काने से बाज आए. बुरहान वानी जैसे आतंकियों को प्रशिक्षण देने वाले शिविर बंद हों. साथ ही पाकिस्तान भारतीय कानून से बचकर अपने यहां छिपे अपराधियों को वापस सौंपे.

जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार किए गए और राष्ट्रीय जांच एजेंसी की कस्टडी में रह रहे बहादुर अली नाम के आतंकी ने खुलासा किया है कि किस तरह पाकिस्तानी सुरक्षा बल लश्कर-ए-तैयबा गिरोह के लोंगों की घुसपैठ भारत में करा रहे हैं और स्थानीय लोगों के सहयोग से भारतीय सुरक्षा बलों पर हमले करा रहे हैं.

इन दिनों कश्मीर में चल रहे उपद्रव और अशांति के माहौल में सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड और स्वचालित हथियारों से हमले किए गए हैं.

सरकार ने यह भी कहा है कि पाकिस्तानी आईएसआई लम्बे समय से लश्करे-तैयबा और हक्कानी नेटवर्क को हर तरह से पोषित कर रही है और ये आतंकी संगठन भारत पर हमले करना जारी रखे हुए हैं.

इसके पहले भी भारत मुम्बई के 2008 के भीषण हमलों और हाल के पठानकोट हमले को झेल चुका है. दोनों हमलों के सूत्र पाकिस्तान के आतंकी संगठनों से जुड़े पाए गए थे. अफगानिस्तान में भारतीय प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों में भी पाकिस्तान के हक्कानी नेटवर्क का हाथ होने की जानकारी सामने आई थी.

अपने पत्र में जयशंकर ने यह रेखांकित किया है कि वर्ष 2008 के मुम्बई हमले और हाल के पठानकोट एयरबेस पर हमले के सभी दोषियों को न्याय के कटघरे में खड़ा करना कितना जरूरी है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि विदेश सचिव की यात्रा तभी कारगर होगी जब पाकिस्तान के विदेश सचिव इन मुद्दों के प्रति सकारात्मक रुख दिखाएंगे. भारत ने पूर्व में पाकिस्तान की जांचकर्ताओं की टीम को पठानकोट के हमले वाले स्थल पर जाने की अनुमति दी थी. इस दिशा में भी अभी तक कोई खास प्रगति नहीं हुई है.

विदेश सचिव ने अपने पत्र में पाकिस्तान को 1947 और 1965 की घटना का भी स्मरण कराया है जब उसने भारत में अपने सैनिक भेज दिए थे. भारत ने 1999 की सैन्य घुसपैठ की घटना का भी जिक्र किया है जिसके चलते कारगिल युद्ध हुआ.

जयशंकर ने 1971 के शिमला समझौते, 1999 के लाहौर घोषणापत्र का भी उल्लेख किया है जिसमें विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की बात कही गई है. और पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल मुशर्रफ के उस आश्वासन का भी उल्लेख है जिसमें उन्होंने पाकिस्तानी क्षेत्र के आतंकी गतिविधियों के लिए उपयोग में लाए जाने की अनुमति नहीं देने का भरोसा दिया था.

राजधानी में फॉरेन करस्पॉन्डेन्ट्स क्लब में मीडिया को सम्बोधित करते हुए विदेश सचिव जयशंकर ने कहा कि व्यापक और नजदीकी सहयोग के बाद भी भारत के प्रयास कोई खास नतीजे नहीं दे सके हैं. इसकी वजह है कि पाकिस्तान आतंक को अपने राजनयिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करता है, वास्तविक चुनौती यही है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने इस न्यौते का जवाब दे दिया है और अब गेंद पाकिस्तान के पाले में है.

प्रायोजित आतंकवाद

दिलचस्प बात है कि विदेश मंत्रालय ने यह भी उल्लेख किया है कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से पीड़ित होने वाला भारत अकेला देश नहीं है. पाकिस्तान के उस बयान, जिसमें मोदी ने बलोचिस्तान का नाम लेकर लक्ष्मण रेखा लांघी है, के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अपनी कठोर टिप्पणी में कहा कि मुझे पता है कि पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी की यह असाधारण टिप्पणी है जो अपनी खुद की राजनियकता में किसी भी लक्ष्मण रेखा का पालन नहीं करता.

सीमापार आतंकवाद और घुसपैठ का पाकिस्तान का रिकॉर्ड क्षेत्र की समस्या के मूल में है.

प्रवक्ता ने यह भी जोड़ा कि यह सिर्फ भारत के ही विचार नहीं है. क्षेत्र के अन्य देशों से भी पूछ लीजिए, सभी का यही विचार है. विदेश सचिव ने भी अपने पत्र में यही बात लिखी है- विश्व को मालुम है कि पाकिस्तान का भारत के खिलाफ हिंसा और आतंकवाद फैलाने का लम्बा इतिहास रहा है. साथ ही क्षेत्र के अन्य देशों में भी.

अफगानिस्तान का नेतृत्व भी लम्बे समय से यह कहता रहा है कि तालिबान नेतृत्व समेत पाकिस्तान में पैठ जमाए आतंकी संगठन उसके देश में हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं और उनका देश युद्धग्रस्त देश बन गया है. बांग्लादेश भी संदेह जताता है कि पाकिस्तान उसके स्थानीय आतंकी संगठनों का समर्थन कर रहा है.

बांग्लादेश के सूचना मंत्री हसानुल हक इनू ने एक दिन पहले ही एक भारतीय न्यूज चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा है कि पाकिस्तान के कनेक्शन बांग्लादेश में बने हुए हैं और वह अनेक घरेलू आतंकी नेटवर्क का समर्थन करने की कोशिश करता रहता है. यही वजह है कि हमने हाल ही में पाकिस्तानी अधिकारियों से उनका राजदूत वापस बुलाने का अनुरोध किया था.

First published: 21 August 2016, 7:23 IST
 
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