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महाराष्ट्र: छोटे किसानों को नहीं मिल रहा है पानी

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 January 2016, 23:01 IST

महाराष्ट्र का मराठवाड़ा क्षेत्र अक्सर सूखे और किसानों की आत्महत्या के कारण सुर्खियों में रहता है. कहा जा रहा है कि  मराठवाड़ा क्षेत्र में सदी का सबसे बड़ा सूखा पड़ा है.

अक्टूबर, 2015 में महाराष्ट्र के 15 हजार गांवों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है जिनमें मराठवाड़ा के सभी जिले शामिल हैं. मानसून की बारिश बहुत कम होने और पानी की किल्लत से फसलें बर्बाद होने से राज्य के किसान परेशान हैं. इसी वजह से मराठवाड़ा क्षेत्र से किसानों की आत्महत्या की खबरें आती रहती हैं.

महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों में पानी की समस्या दूर करने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने पिछले साल जलयुक्त शिवार अभियान की शुरुआत की थी. सरकार का दावा था कि इस योजना की मदद से महाराष्ट्र वर्ष 2019 तक सूखा मुक्त हो जाएगा.

जलयुक्त शिवार अभियान का फायदा ज्यादातर संपन्न किसानों को ही मिला है

हालांकि, योजना का पहला चरण बीत जाने के बाद इसका फायदा छोटे किसानों को नहीं मिला है, जिनकी संख्या अधिक है. राज्य में पांच एकड़ से कम खेत वाले छोटे किसानों का अनुपात 79 फीसदी है.

छोटे किसानों को जलयुक्त शिवर अभियान की परियोजनाओं की सबसे अधिक जरूरत होती है, जबकि उन्हें इन परियोजनाओं को कोई विशेष लाभ नहीं मिला है. 250 घरों वाले एक साधारण गांव में 30-50 किसानों को ही इसका लाभ मिल सका है.

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जलयुक्त शिवार अभियान का फायदा ज्यादातर संपन्न किसानों को ही मिला है. आम तौर पर संपन्न किसानों का खेत जल धाराओं के निकट होता है. इसलिए धाराओं को चौड़ा और गहरा करने का लाभ भी उन्हें मिला है.  जिन किसानों के कुएं इन धाराओं से दूर हैं, उनके कुएं सूख गए हैं.

जलयुक्त शिवार अभियान के तहत 2019 तक राज्य के सूखा पीड़ित 22 जिले के 40 हजार गांवों में से 19,059 को सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया है. सरकारी आंकड़े के मुताबिक अभियान के तहत 1.4 लाख प्रस्तावित जल संभरण परियोजनाओं में से 41 हजार परियोजनाएं एक साल में पूरी हुई है. (आईएएनएस)

First published: 28 January 2016, 23:01 IST
 
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