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कन्नूर: दक्षिण और वाम के खूनी टकराव की धरती

पी वेणुगोपाल | Updated on: 25 May 2016, 22:26 IST
(कैच हिंदी)
QUICK PILL
  • दिसंबर 1999 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेता केटी जयकृष्णन की हत्या कर दी गई. उनके शरीर पर 48 बार तलवार से काटे जाने के निशान थे. वहीं रिवॉल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी के टीपी चंद्रशेखर की मई 2012 में हत्या कर दी गई. उनके शरीर पर 51 तलवार के निशान थे.
  • सीपीआईएम और आरएसएस के बीच पुरानी प्रतिस्पर्धा है. क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक 1991 के बाद से कन्नूर जिले में अब  तक 105 लोगों की जान जा चुकी है. 
  • वास्तव में 1980 के मुकाबले 1991 के बाद से कन्नूर जिले की राजनीतिक हिंसा में कमी आई है. 1980 में एक समय ऐसा था जब हर हत्या के बदले में एक हत्या होती थी.
  • मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) केरल के कन्नूर जिले में ''इनिशिएटिव फॉर रिहैबिलेशन एंड पैलिएटिव केयर फॉर द एज्ड'' चलाती है. सीपीम ने इस केंद्र के लिए 2,000 कार्यकर्ताओं को तैनात कर रखा है. कार्यकर्ता वृद्ध हो चुके लोगों की देखभाल करते हैं.

    प्रशिक्षित कार्यकर्ता वृद्ध लोगों के साथ बैठते हैं और उन्हें समय पर दवाइयां और भोजन देते हैं. उन्हें नहलाने से लेकर उनका कपड़ा साफ करने तक का काम करते हैं. संक्षेप में कहा जाए तो वह एक प्रोफेशनल नर्स की तरह काम करते हैं.

    तीन साल पहले इस कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए पार्टी का बयान था कि पी कृष्णा पिल्लई ने एक बार कहा था कि बुजुर्ग और वृद्ध हो चुके लोगों की सेवा करना कॉमरेड का कर्तव्य है. पिल्लई केरल में कम्युनिस्ट आंदोलन के संस्थापकों में से एक रहे हैं.

    यही पार्टी अपने सशस्त्र कार्यकर्ताओं को दिनदहाड़े गांव के एक स्कूल की शिक्षक की हत्या करने के लिए भेजती है. पार्टी के हथियारबंद कार्यकर्ता छात्रों के सामने शिक्षक की हत्या करते हैं और पूरा क्लासरुम खून से भर जाता है.

    1980 के मुकाबले 1991 के बाद से कन्नूर जिले की राजनीतिक हिंसा में कमी आई है

    एक दूसरे अलग मामले में सीपीएम ने कोझिकोड जिले में पार्टी के पूर्व सहयोगी की हत्या करने के लिए अपने हथियारबंद कार्यकर्ताओं की फौज भेजी. जिसकी हत्या की गई वह कभी सीपीएम के लिए काम करता था लेकिन बाद में उसने पार्टी से दूरी बना ली.

    दिसंबर 1999 में युवा मोर्चा के नेता केटी जयकृष्णन की हत्या कर दी गई. उसके शरीर पर 48 बार तलवार से काटे जाने के निशान थे. वहीं रिवॉल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी के टीपी चंद्रशेखर की मई 2012 में हत्या कर दी गई. उनके शरीर पर 51 तलवार के निशान थे.

    सीपीआईएम और आरएसएस के बीच प्रतिस्पर्धा का इतिहास पुराना है. क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक 1991 के बाद से कन्नूर जिले में अब  तक 105 लोगों की जान जा चुकी है. 

    हालिया शिकार सीपीएम का 47 वर्षीय कार्यकर्ता है, जिनकी मौत कथित तौर पर आरएसएस के कार्यकर्ता ने बम मारकर की है. सीपीएम के कार्यकर्ता 19 मई को एलडीएफ की जीत का जश्न मना रहे थे, तभी उन पर बम फेंका गया. हादसे में 30 लोग घायल भी हुए.

    वास्तव में 1980 के मुकाबले 1991 के बाद से कन्नूर जिले की राजनीतिक हिंसा में कमी आई है. 1980 में एक समय ऐसा भी था जब हर हत्या के बदले में एक हत्या होती थी. एक दिन सीपीएम का कार्यकर्ता मरता तो दूसरे दिन आरएसएस का. 1980 में कन्नूर जिले में राजनीतिक हिंसा में 150 से अधिक लोगों की जान गई.

    1980 में कन्नूर जिले में राजनीतिक हिंसा में 150 से अधिक लोगों की जान गई
    महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ सोशल साइंस के डीन केटी राम मोहन बताते हैं, 'पूरे कन्नूर जिले को खूनी मैदान समझना गलती है.'

    राम ने कहा, 'संघर्ष और हत्याएं कुछ ही इलाकों तक सीमित हैं. यह खास तौर पर पार्टी के गांव में होता है जहां आरएसएस और सीपीएम के बीच वर्चस्व की जंग जारी है. जन संघ के समय से कुछ इलाकों में संघ की मजबूत मौैजूदगी रही है. यह संवेदनशील इलाका है. किसी भी इलाके में दूसरे पक्ष की घुसपैठ हिंसा को बढ़ावा देती है.'

    दोनों तरफ से मारने की कोशिश

    सितंबर 2014 में आरएसएस के जिला पदाधिकारी की हत्या के मामले में सीपीएम के जिला सचिव पी जयराजन आरोपी हैं. फिलहाल यह मामला थलासेरी सेशन कोर्ट में चल रहा है.

    मंगलवार को जयराजन को जमानत मिलने पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका जमकर स्वागत किया. अदालत ने उनके जिले में प्रवेश पर दो महीने की पाबंदी लगा रखी थी जो अब खत्म हो गई है. उनकी कथित भूमिका यह बताती है कि हत्या में पार्टी नेतृत्व की सीधी भूमिका होती है.

    जयराजन पर भी 1999 में हमला हुआ था और वह बच गए थे. हमले में आरएसएस की भूमिका थी. यह  महज संयोग नहीं था जिस आरएसएस नेता मनोज की हत्या के आरोप में वह जेल गए थे, उस पर 17 साल पहले उनकी हत्या करने की कोशिश का आरोप लगा था. जिले में पार्टी के काडरों के बीच जयराजन जिंदा मिसाल है जिन्होंने संघ परिवार से मुकाबले की जिम्मेदारी ले रखी है.

    First published: 25 May 2016, 22:26 IST
     
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