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रक्षा सौदों काली दुनिया में जगमगाता नाम सुधीर चौधरी

सादिक़ नक़वी | Updated on: 4 November 2016, 7:46 IST
QUICK PILL
  • रक्षा सौदों में आए दिन खुलासे हो रहे हैं. हाल ही में हुए कुछ बड़े सौदों में भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है और कुछ हथियार दलाल भी जांच के दायरे में आए हैं. 
  • ऐसे ही एक रक्षा दलाल सुधीर चौधरी का नाम बीते दस सालों में बार-बार लिया जाता है. लंदन में रहने वाले सुधीर बन्नी चौधरी हॉस्पिटैलिटी, स्वास्थ्य और प्राइवेट इक्विटी के व्यवसाय में सक्रिय हैं.

सुधीर चौधरी के बारे द गार्जियन और बीबीसी की एक तफ्तीश कहती है कि रॉल्स रॉयस ने चौधरी से जुड़ी कम्पनियों को 1 करोड़ पाउंड दिए जबकि रूसी कम्पनियों ने उसे 10 करोड़ यूरो दिए. चौधरी से मुनाफा कमाने वाली कम्पनियों ने उन्हें, उनके बेटे भानु और एक अन्य संबंधी अमन चोपड़ा को निदेशक बनाया है.

सुधीर और भानु के खिलाफ 2014 में ब्रिटेन में फर्जीवाड़े के आरोप में जांच चली और उन्हें कुछ वक्त के लिए गिरफ्तार भी किया गया. चीन और इंडोनेशिया में रॉल्स रॉयस के पक्ष में अनुबंध करवाने में उनकी भूमिका को लेकर पूछताछ की गई लेकिन बाद में यह जांच बंद कर दी गई. इसी तरह भारत में सुधीर चौधरी के ख़िलाफ़ सोलटाम हथियारबंद तोपों और बराक मिसाइल मामले में चौधरी के खिलाफ जांच की गई. 

हॉक सौदे में भूमिका

द गार्जियन-बीबीसी की संयुक्त जांच में खुलासा हुआ था कि 2012 में क्रेडिट स्यूस के साथ विलय करने वाले एक स्विस बैंक क्लैरिडन ल्यू ने सुधीर चौधरी के परिवार से जुड़े खातों पर आंतरिक जांच बिठाई थी. इन खातों में भारी-भरकम संदिग्ध लेन-देन था. 

बीएई सिस्टम और रॉल्स रॉयस ने 2010 में 70 करोड़ पाउंड का एक सौदा किया था. इसके तहत हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को 57 हॉक प्रशिक्षण विमान की आपूर्ति की जानी थी. इसके अलावा 2004 में भी भारत ने 66 जेट विमानों का ऑर्डर दिया हुआ है, उनकी भी आपूर्ति शामिल है.

संयुक्त जांच में दावा किया गया है कि सौदे के एक प्रमुख वार्ताकार और 2005 तक भारत में बीएई प्रमुख रहे पीटर जिंजर 2007 में भानू चौधरी के साथ जेनेवा जा चुके हैं. वहां उन्होंने एक गुप्त खाते में सैंकड़ों-हजारों पाउंड जमा करवाए. बाद में पाया गया कि उक्त खाते 120467 पोर्ट्समाउथ में 10 लाख की स्विस करेंसी थी.

रूसी सौदों में भूमिका

जांच के मुताबिक चौधरी परिवार से जुड़ी कुछ कम्पनियों को 2012 में, एक ही साल में 10 करोड़ डॉलर यूरो का भुगतान किया गया. 2 अक्टूबर 2008 को इकॉनॉमिक टाइम्स में छपी खबर कहती है कि चौधरी परिवार और उनके संबंधियों के साथ कुल 18 खाते जुड़े हुए हैं. इनमें से एक सिंगापुर में है और बाकी के 17 ज्यूरिख में. इतना ही नहीं, पनामा पेपर्स में सूचीबद्ध कम्पनी बेलिनिया, जिसके निदेशक भानू हैं, ने रोजबोरोन एक्सपोर्ट से 37,200,00 यूरो लिए थे.

कॉटेज कंसलटेंट नाम की एक और कम्पनी जिसके एक मात्र निदेशक भानू हैं, ने भी राज्य निगम रोजोनबोरोन एक्सपोर्ट से 281 लाख यूरो लिए थे. गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक इसी निगम से रूस के सारे रक्षा सौदे होते आए हैं. इसमें 47 लाख मिग से और 97 लाख यूरो एबीसी से मिले हैं. यह पैसा मास्को बैंक से स्वीकृत वीनेशकॉमबैंक से जारी हुआ है. बीबीसी की रिपोर्ट में एक तीसरी कम्पनी कार्टर कंसल्टेंसी का भी उल्लेख किया गया है, जिसे 230 लाख यूरो मिले हैं.

इन फर्मों में अमन चौपड़ा भी एक निदेशक हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, भानू को कॉटेज कंसलटेंट कम्पनी में जनवरी 2007 में निदेशक नियुक्त किया गया था. उनके पास उसी वक्त एक और नई कम्पनी कार्टर कंस्लटेंट्स के भी शेयर थे.

चौधरी कौन हैं?

चौधरी का नाम सीबीआई की अवांछित सम्पर्क सूची में शामिल है. चौधरी 1970 से यह काम कर रहे हैं. इससे पहले हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के पूर्व प्रमुख रहे उनके अंकल बलजीत कपूर यह काम कर रहे थे. उन्होंने ही चौधरी को रक्षा सौदों की अंधेरगर्दी में धकेला था. 

सूत्रों का कहना है कि बहुत से रक्षा सौदों पर उनकी छाप दिखाई देती है. यहां तक कि जांच एजेंसियां उनकी भूमिका को लेकर किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पा रही हैं, खास तौर पर 2006 में उनके लंदन जाने के बाद उनके खिलाफ जांच प्रभावित हुई है.

2001 में तहलका द्वारा रक्षा सौदों के खिलाफ चलाए गए अभियान ऑपरेशन वेस्ट एंड में उनका नाम आया था. पत्रकार जोसी जोसेफ ने अपनी किताब 'ए फीस्ट ऑफ वल्चर' में लिखा है कि सीबीआई ने बराक मिसाइल मामले की जांच में मैग्नम इंटरनेशनल और यूरेका सेल्स कॉर्पोरेशन, इन दो कम्पनियों पर संदेह जताया है कि इन्हें 1998 से 2001 के बीच आईएआई, इजराइल से लाखों डॉलर मिले हैं. 

किताब में यह भी बताया गया है कि हथियार डीलर सुरेश नंदा भी मैग्नम इंटरनेशनल में एक साझेदार हैं. सीबीआई ने दावा किया कि करीब 218 करोड़ रूपए के सोलटाम सौदे में चौधरी को 67 लाख रूपए मिले हैं. दोनों ही जांचों में वे बेदाग साबित हुए हैं. इस बीच, लंदन शिफ्ट होने के बाद चौधरी परिवार ने स्वास्थ्य, हॉस्पिटैलिटी और रीयल एस्टेट से जुड़ा व्यापार शुरू किया.

भानू ने हाल ही वापस भारत की ओर रुख किया है. वह यहां हॉस्पिटैलिटी और हैल्थ सेक्टर में कारोबार बढ़ाना चाहते हैं. चौधरी परिवार की प्राइवेट इक्विटी फर्म सी एंड सी एल्फा ग्रुप ने 2015 में एल्फा हॉस्पिटल चेन को 970 करोड़ रूपए में सिग्नेट हैल्थ केयर को बेच दिया था. सुधीर चौधरी भारत की कम से कम 15 कम्पनियों में निदेशक हैं और उनके बेटे भानू 18 कम्पनियों के. 

चौधरी परिवार का नाम पनामा स्थित स्टैलर आर्ट फाउंडेशन से भी जुड़ा है. कुछ रिपोर्टों के अनुसार, इस फाउंडेशन में एमएफ हुसैन, परेश मैटी, अनीश कपूर, पाबलो पिकासो, पियरे ऑगस्टे रिनॉइर और एंडी वारहोल जैसे मशहूर कलाकारों की करीब 600 कलाकृतियां प्रदर्शित हैं. चौधरी परिवार ने कथित तौर पर कहा है कि उनके सारे व्यापार इन सब चीजों से उपर हैं और किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है.

First published: 4 November 2016, 7:46 IST
 
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