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यहां स्वयं प्रकट हुई थी शनिदेव की प्रतिमा, ये है कथा

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 August 2020, 20:30 IST

आखें खोलने पर पंडित गोपालदास ने पाया कि वास्तव में उनका अंधत्व दूर हो गया है और वो सबकुछ साफ-साफ देख सकते हैं. अब पंडितजी ने टीले को खोदना शुरू किया. उनकी आंखें ठीक होने के चमत्कार के चलते स्थानीय लोगों को भी वहां के लोगों को उनके सपने पर यकीन हो गया. वो खुदाई में उनकी मदद करने लगे.

कहा जाता है कि पूरी खुदाई होने के बाद वहां से शनिदेव की प्रतिमा निकली. जिसके बाद सभी लोगों ने प्रतिमा की स्थापना की.आज भी वहां के मंदिर में यही प्रतिमा स्थापित है. शनिदेव की इस प्रतिमा से जुड़े अन्य अलग अलग कथा भी प्रचलित है. बताया जाता है कि शनिदेव की प्रतिमा पहले वर्तमान में मंदिर में स्थापित भगवान की राम की प्रतिमा के स्थान पर थी.


एक शनिचरी अमावस्या पर यह प्रतिमा स्वत: अपना स्थान बदलकर उस स्थान पर आ गई जहां ये अब स्थापित है. तब से शनिदेव की पूजा उसी स्थान पर हो रही है और यह श्रद्धालुओं की प्राचीनतन आस्था का केंद्र बन गया है.

First published: 25 August 2020, 20:30 IST
 
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