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Muharram 2020: क्या हुआ था इराक़ की कर्बला में इमाम हुसैन की शहादत के बाद, ये है पूरा वाक्या

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 August 2020, 20:32 IST

मुहर्रम इस्लामिक वर्ष का पहला महीना होता है. ये पर्व इस महीने की 10वीं तारीख को मनाया जाता है. इस त्योहार को मनाने की वजह इस्लाम धर्म के प्रवर्तक पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत के गम में मनाया जाता है.

लगभग हर कोई हुसैन की शहादत की बात करता है और हुसैन ब्राह्मण या दत्त के 7 बेटों की कहानी भी लोगों के बीच कही जाती है, लेकिन कर्बला के युद्ध में याजिद के खिलाफ लड़ाई में हुसैन के परिवार के कई लोग कुर्बान हुए थे. उस लड़ाई में हिस्सा लिया था एक ऐसी शख्सियत ने जिसका नाम इतिहास के पन्नों में उतना मशहूर नहीं है.


ये नाम है हुसैन की बहन जैनब का. ये वही बीबी जैनब हैं जो कर्बला के युद्ध के समय एक लीडर बनकर उभरी थीं. अगर जैनब न होतीं तो हुसैन को शायद सिर्फ एक ऐसे योद्धा के रूप में याद किया जाता जिसने तत्कालीन राजा के खिलाफ युद्ध छेड़ा था.

हुसैन और उनके परिवार के पुरुष सदस्य तो कर्बला में शहीद हो गए थे, लेकिन जैनब के भाषण और उपदेश ही थे जिन्होंने हुसैन की कुर्बानी को लोगों के बीच पहुंचाया था. हुसैन की मौत तो कर्बला के युद्ध में 680ad या 61 हिजरी के दसवें मुहर्रम में ही हो गई थी. हुसैन ने अपनी लड़ाई लड़ ली थी अब जैनब की बारी थी.

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11 वें मुहर्रम के दिन महिलाएं, बच्चे और हुसैन का बेटा जैन उल अबीदिन याजिद की सेना द्वारा कैद कर लिए गए थे और कुफा के गवर्नर की अदालत में पेश किए जाने थे. कुफा वो शहर था जहां जैनब और उनकी बहन उम्मे कुलसुम ने महिलाओं को कुरान के पाठ पढ़ाए थे. पैगंबर की नवासी जैनब अपने पिता अली और भाई बहन के साथ इसी शहर में रही थीं.

इसी शहर में बंदी बनाकर जैनब को लाया गया. जैसे ही कारवां कुफा में पहुंचा वहां लोगों की भीड़ लग गई उन लोगों को देखने के लिए जिन्हें सत्ता ने गद्दार साबित कर दिया था. कहा जाता है कि जिनकी मौत हुई थी कर्बला के युद्ध में उनका सिर लाने को कहा गया था और उस समय हुसैन और हसन का सिर लिए जैनब चली आ रही थीं. उन्होंने उसी समय जैनब ने अपना पहला उपदेश दिया.

उसी समय जैनब ने अपना पहला उपदेश दिया. जब लोग उन्हें गद्दार समझ रहे थे. लोगों की आवाज में जैनब की आवाज दब गई और जैनब ने जोर से चिल्ला कर लोगों के बीच अपनी बात पहुंचाई. वो उसी तरह से बोल रही थीं जैसे उनके पिता इमाम अली बोलते थे.

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First published: 21 August 2020, 20:32 IST
 
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