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सुरेन उप्पल: सारी फोन टेपिंग एस्सार ने ही करवाई, मेरे ऊपर काफी दबाव है

सादिक़ नक़वी | Updated on: 20 June 2016, 15:34 IST
(आर्या शर्मा/कैच)

एस्सार टेप कांड के खुलासे में जब से सुप्रीम कोर्ट के वकील सुरेन उप्पल का नाम मीडिया में आया है, अधिकांश वकीलों के बीच इसी बात की चर्चा है कि आखिर उप्पल हैं कौन? आम तौर पर सबकी यही राय सामने आती है कि वे उप्पल को नहीं जानते. कुछ लोगों की यह राय भी है कि वे खुद को लो प्रोफाइल बनाए रखना पसंद करते हैं.

हालांकि एस्सार टेप लीक प्रकरण के उजागर होने के बाद वे सभी अखबारों के पहले पन्ने पर छप गए हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को सभी वरिष्ठ राजनेताओं, ब्यूरोक्रेट्स और उद्योग जगत के शीर्ष लोगों की एस्सार के मालिक रुईया द्वारा 2001से 2006 के बीच फोन टेप किए जाने की शिकायत सौंपी है.

इस दौरान पहले एनडीए के नेतृत्व वाली अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी और इसके बाद यूपीए सरकार सत्ता में रही. इस दावे से कई लोगों को झटका लगा है. यहां तक कि अटल सरकार में तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे बृजेश मिश्र के फोन भी टेप हुए. उप्पल कहते हैं कि उन्होंने यह टेप एस्सार के पूर्व कर्मचारी अल बासित खान से हासिल किए हैं.

अल बासित एस्सार में सिक्यूरिटी और विजिलेंस विभाग के मुखिया थे. बाद में उन्होंने असंतुष्ट होकर कंपनी छोड़ दी. खान का दावा है कि उन्हें ये टेप मुंबई पुलिस से मिले हैं. मुंबई के एक अखबार में छपी खबर के अनुसार खान के लिंक मुंबई के अपराध शाखा के अधिकारियों से थे. यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि वकील उप्पल कारपोरेट घरानों से धन उगाही की कोशिश में थे.

जब यह संवाददाता नोएडा में उप्पल से उनके आलीशान कार्यालय में मिला तो वे काफी उग्र और अस्थिर नजर आए. उन्होंने कहा, 'मीडिया कॉरपोरेट से यह क्यों नहीं पूछता कि मैंने धन ऐंठने की कब और कैसे कोशिश की.' उन्होंने दोहराया, 'मैं यह सब देशहित में कर रहा हूं. इस देश में कोई भी भ्रष्टाचार से जूझने के प्रति गंभीर नहीं है.'

उप्पल ने कहा, 'मैं आराम से कांग्रेस या आप के पास जा सकता था लेकिन मैंने प्रधानमंत्री कार्यालय में गुहार लगाने का निश्चय किया.' उन्होंने बताया कि जल्द ही वे इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की योजना भी बना रहे हैं. उन्होंने अपने सहयोगी को पीआईएल का मसौदा तैयार करने का निर्देश दे दिया है.

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि शिकायत करने के पहले उन्होंने कई मंत्रियों से भी औपचारिक रूप से संपर्क किया था. अब जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गृह मंत्री को मामले की जांच का निर्देश दे दिया है तो शायद उप्पल पीआईएल दाखिल करने का विचार त्याग भी सकते हैं. कैच ने उप्पल से आरोपों-प्रत्यारापों को लेकर बातचीत की.

पेश है बातचीत के अंश:

अल बासित का कहना है कि उसने बातचीत को रिकॉर्ड नहीं किया?

उसने बातचीत रिकॉर्ड की या नहीं, अब मुझे साबित करना है. यह देखने का काम अब जांचकर्ताओं का है. ऐसा भी नहीं है कि यह रिकॉर्डिंग किसी विशेष दिन आकाश से टपक गई और हमने लपक ली. जांच होने दीजिए. अब वह इस तथ्य से सहमत है कि उन्होंने सीडी और डॉक्यूमेन्ट मुझे देने के लिए प्राप्त की. उन्हें यह सीडी कहां से मिली, किससे मिली, इसका जवाब उन्हें जांच एजेंसियों को देना है.

अब बासित एस्सार को बचाने की कोशिश में कह रहे हैं कि एस्सार तो इसमें शामिल ही नहीं है. सभी डॉक्यूमेन्ट और लॉगबुक्स यही रोशनी डालते हैं कि यह वर्ष 2002 की एस्सार के लोगो लगी हुई ऑफिशियल डायरियां हैं. यह बेहद मजबूत केस है. सरकार को या अदालत को पीछे नहीं हटना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में मामले की समुचित तरीके से जांच होनी चाहिए.

पहले भी दिल्ली पुलिस की मदद से कुछ मशहूर लोगों की सीडीआर सेवा प्रदाता कंपनियों द्वारा कथित रूप से टेपिंग का मामला सामने आया था, क्या खान का यह कहना सही है कि उसने मुंबई पुलिस से टेप हासिल किए?

मुझे इस बात में कोई दम नजर नहीं आता. कारण बहुत ही साफ हैं. यदि मुंबई पुलिस यह टेपिंग कर रही होती तो वह किसी विशेष मामले से संबंध होती. इस मामले में तो लंबे समय से रिकार्डिंग की जा रही थी और इसमें देश के तत्कालीन टेलीकॉम मंत्री समेत सभी वरिष्ठ राजनेता शामिल थे. वे देश की सुरक्षा, संप्रभुता को चुनौती दे रहे थे.

बातचीत में जिन चीजों की चर्चा हुई है, क्या वाकई में हुईं हैं?

कुछ मामलों में तो यह साफ है कि बातचीत करने वालों के बीच आपसी संबंध था. उस समय जो चीजें वास्तव में घटित हो रहीं थीं, उनका बातचीत से सीधा संबंध था. जो कुछ भी मैं कह रहा हूं, तारीख और समय के मामले में, वह बासित की सूचना के आधार पर है. बाकी काम तो जांच एजेंसियों के पता लगाने का है.

खान आपके पास ही क्यों आया?

जैसा कि उसने बताया था कि पहले वह कई लोगों के पास गया था. वे लोग इन डॉक्यूमेन्ट्स से अनुचित लाभ लेना चाहते थे.

वे कौन लोग थे जिनसे बासित ने संपर्क किया था?

इसका खुलासा तो खान को ही करना है. वह वास्तव में किसी ऐसे व्यक्ति के पास जाना चाहता था जो किसी भी हालत में किसी भी तरह से समझौता न करे. मैंने उससे यही कहा था कि मैं किसी भी मौके पर समझौता करना या झुकना पसंद नहीं करूंगा.

क्या किसी व्यक्ति या कारपोरेट ने आपको घूस देने की कोशिश की?

मैं किसी पर आरोप नहीं लगाना चाहता लेकिन मेरे ऊपर काफी दबाव था. लोगों ने इशारे में मुझे इस मामले से अलग हो जाने को कहा. यदि जांच होगी तो इस मामले में तथ्यों और स्थितियों को उजागर करने में मुझे खुशी होगी. मैं हर तरह का सहयोग करूंगा ताकि एस्सार या बासित या अन्य जो भी इस मामले में लिप्त था उसकी जिम्मेदारी को स्थापित किया जा सके.

पीएमओ जाने के पहले क्या आपने किसी राजनीतिक नेता से संपर्क किया था?

हां, मैंने कुछ वरिष्ठ मंत्रियों को मामले के संदर्भ में नोटिंग्स और डिटेल्स सौंपी थीं.

वे कौन लोग थे. नाम बताएंगे?

मैं किसी का नाम नहीं लेना चाहूंगा क्योंकि यह अनौपचारिक मीटिंग थी. जब जांच होगी, मैं इसका खुलासा कर दूंगा.

क्या बासित के पास और भी डिटेल्स हैं?

इसका जवाब तो बासित ही दे सकता है. उसने मुझे बताया था कि उसके पास ढेर सारी डिटेल्स हैं. उसने मुझे यह भी बताया था कि उस समय इन कालों में अवरोध आ रहा था जब वे इसे कैसेट में रिकॉर्ड कर रहे थे. यदि इसे वाल्यूम में आंपा जाए कई कमरे भर जाएंगे. मैंने इन्हें कभी देखा नहीं है.

क्या बासित ने कभी आपसे यह चर्चा की थी कि वह क्यों यह अवैध काम कर रहा है?

उसने यह कभी स्वीकार नहीं किया कि वह जो काम जानबूझकर कर रहा है, वह अवैध है. उसने कहा था कि उसे इसी मकसद के लिए हायर किया गया था. कंपनी के निगरानी और सुरक्षा हेड के रूप में उसकी प्रशांत रुईया के साथ दोस्ती थी. उसका खुद का काम एस्सार के अपने स्टाफ की निगरानी करना था. वे यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि कोई भी सूचना बाहर न जाए.

क्या उसे कभी संदेह नहीं हुआ जब उसे बाहरी लोगों के फोन टेप करने के लिए कहा गया?

उसने कहा था कि सिम कार्ड शिशिर गुप्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए थे. अब जब मैं बासित के पहले के आचरण के बारे में देखता हूं तो मेरे पास यह भरोसा करने की पर्याप्त वजहें हैं कि वह जानता था कि वह क्या कर रहा है.

क्या आपने हर किसी को कॉशन नोटिस भेजे हैं?

हां, सभी को व्यक्तिश: नहीं. ज्यादातर कंपनियों को जो मामले में शामिल हैं. कोई भी यह देख सकता है कि एस्सार पर टेपिंग करने का आरोप है. अत: एस्सार को उसका पक्ष जाने के लिए नोटिस भेजे गए. रिलायंस और उसके निदेशकों और मालिकों को फोन टेप किए गए थे, अत: सच्चाई का पता लगाने के लिए उन्हें भी नोटिस भेजे गए.

आप मीडिया के साथ इसकी रिकार्डिंग्स शेयर करने के प्रति इतने अनिच्छुक क्यों है?

मैं अनिच्छुक नहीं हूं. अभी में सिर्फ इतना चाहता हूं कि जिन पर आरोप लगाए गए हैं, वे अगर चाहें और अगर उनके पास कोई बचाव का तर्क हो तो वे उसे मेरी जानकारी में ला सकते हैं.

आगे एक वजह यह भी है कि यदि उनका मानना है कि कुछ चीजें वाकई में गलत हैं तो वे कोर्ट में जाकर, मेरे पास जो डाक्यूमेन्ट्स हैं, उनकी जांच के लिए समुचित आदेश प्राप्त कर सकते हैं.

मेरा इरादा कभी भी किसी की छवि बिगाड़ने का नहीं रहा हैं. यह महत्वपूर्ण है और प्रासंगिक भी. जब मुझे महसूस हुआ कि इस मामले की जांच कराए जाने की जरूरत है, मैं सरकार के पास पहुंचा. मैं तो यही सोचता हूं कि मैंने जो सबसे सही तरीका था वही किया है. यदि कुछ नहीं होता है तो मैं कोर्ट जाऊंगा.

आप पीआईएल कब दाखिल करेंगे?

आने वाले दिनों में.

First published: 20 June 2016, 15:34 IST
 
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