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राजनीतिक शून्यता को भरना हमारा मकसद: योगेंद्र यादव

सुहास मुंशी | Updated on: 11 February 2017, 7:51 IST
QUICK PILL
  • योगेंद्र यादव ने प्रशांत भूषण के साथ मिलकर अपनी पार्टी बनाने की घोषणा की है. उनके पास आम आदमी पार्टी (आप) का भी अनुभव है. हालांकि उनका पार्टी के साथ थोड़े समय के लिए ही जुड़ाव रहा.
  • यादव 2014 में गुड़गांव से आप के टिकट पर चुनाव लड़े थे लेकिन उनकी जमानत जब्त हो गई. कैच के साथ बातचीत में यादव ने अपनी नई पार्टी बनाने के मकसद को लेकर विस्तृत बातचीत की.

आप स्वराज अभियान के साथ माहाल बनाने की कोशिश कर रहे थे जो कि एक राजनीतिक संगठन ही है. लेकिन इसकी स्थापना के 15 महीनों बाद ही आपने पूरी ऊर्जा नई राजनीतिक पार्टी बनाने में लगा दी?

यह फैसला रातों रात नहीं लिया गया है. हमें इसके लिए जनमसर्थन की जरूरत थी. हमने सात राज्यों के एक तिहाई जिलों में जिला स्तरीय चुनाव कराया और जब हमें पर्याप्त आंकड़े मिल गए तब हमने पार्टी बनाने की घोषणा की.

यह हाल ही में हुआ है और हमारे राष्ट्रीय सम्मेलन में 433 प्रतिनिधि मौजूद थे जिसमें से 405 ने पार्टी के पक्ष में मतदान किया. इसके बाद ही पार्टी बनाने का फैसला लिया गया.

वह कौन से राज्य थे और किन राज्यों में आपकी मौजूदगी है?

दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक मेंं यह किया गया.

क्या आपने आगामी विधानसभा चुनाव के समय को देखते हुए पार्टी बनाने का फैसला लिया? उत्तर प्रदेश में जल्द ही चुनाव होने जा रहे हैं.  क्या आप उत्तर प्रदेश से राजनीतिक पारी की शुरुआत करेंगे?

नहीं. हम समझते हैं कि उत्तर प्रदेश राजनीतिक पारी शुरू करने के लिए सही जगह नहीं है. हमारी पार्टी कहीं भी चुनाव नहीं लड़ सकती. हम जल्द ही राजनीति में नहीं कूदेंगे.

लेकिन क्या आप स्वराज अभियान के साथ वहीं काम नहीं कर सकते थे? आखिर अपनी पार्टी की जरूरत क्या है?

यह सवाल हमसे बार बार पूछा जाता रहा है. लोगों ने कहा, 'आप एक अच्छे इंसान हैं और लगातार किसानों के मुद्दे को उठाते रहे हैं. आप क्यों राजनीति में जाना चाहते हैं?' मैं इसके पीछे एक ताकत देखता हूं. यह सही है कि सक्रिय राजनीति मेंं बहुत कुछ किया जाना है.

मसलन प्रशांत भूषण अगर राजनीति में नहीं होते तो वह समाज के लिए बहुत ज्यादा कर पाते. हमें बताया गया कि हम अरुणा रॉय की तरह काम कर सकते हैं.

लेकिन हमें यह याद रखना चाहिए कि हम जिस राज्य के साथ संघर्ष कर रहे हैं वह बेहद शक्तिशाली और खतरनाक भी है. इसलिए हमें हस्तक्षेप के लिए पार्टी की जरूरत है.

हमने सात राज्यों के एक तिहाई जिलों में जिला स्तरीय चुनाव कराया तब पार्टी बनाने का फैसला किया

आप अक्सर अरविंद केजरीवाल के मजबूत लोकपाल नहीं लाए जाने की आलोचना करते रहे हैं जिसका उन्होंने वादा किया था. आपकी पार्टी किस तरह से अलग करने की कोशिश कर रही है?

केजरीवाल पहले इस पर मुकरते रहें और फिर उन्होंने कमजोर लोकपाल लाया जैसा कि सीपीएम सत्ता में आने के बााद जमींदारों को फायदा पहुंचाने वाला कानून लाया करती थी.

जहां तक हमारी पार्टी का मामला है, हमारे जिला के नेताओं को एक पारदर्शी प्रक्रिया के तहत चुना गया है. हम पहली पार्टी हैं जिसने ऐसा किया है.

हमने न केवल अपनी आय बल्कि अपने खर्च को भी सार्वजनिक किया है. हमने लोकपाल को भी बनाया है. साथ ही शिकायत निवारण की एक मजबूत व्यवस्था की गई है.

मौजूदा राजनीतिक दृश्य में आप कहां फिट बैठते हैं? आप कहां अपनी जगह बनाने के बारे में सोच रहे हैं?

मेरा मानना है कि एक राजनीतिक निर्वात की स्थिति है जिसे हमें भरनेे की जरूरत है. एक तरफ आपके पास वैसी पार्टी है जो खुले तौर पर अल्पसंख्यक विशेषकर मुस्लिम विरोधी है. साथ ही यह किसान विरोधी भी है. वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस है जो वैचारिक रूप से दिवालिया हो चुकी है. उन्होंने राष्ट्रवाद का ठेका बीजेपी को दे दिया है.

आम आदमी पार्टी ने लोगों की उम्मीदें जगाईं लेकिन उसी तेजी से वह खत्म हो गई. इसके पीछे वोट बैंक लालच था. वह वहीं बोलते हैं जहां उन्हें वोट दिखाई देता है.

कश्मीर ऐसा ही मुद्दा है जिस पर सब कुछ कहना चाहते हैं लेकिन आप के नेेताओं ने इस पर चुप रहने का फैसला लिया है.

चूंकि आप इस मुद्दे को लेकर बीच में आ गए हैं तो मैं आपसे पूछना चहता हूं कि आपका कश्मीर के हालिया घटनाक्रम को लेकर क्या कहना है? कुछ लोगों का कहना हैै कि घाटी भारत से कभी इतनी दूर नहीं था, जितना अब है.

कश्मीर में लंबे समय से अलगाव की भावना रही है क्योंकि किसी भी सरकार ने लोगों को पर्याप्त राजनीतिक स्वायत्ता नहीं दी.  लोगों के साथ अन्याय का लंबा इतिहास रहा है. इस वजह से लोगों में गुस्सा और अशांति है.

इस बात का क्या मतलब कि कश्मीरियों को राजनीति स्वायत्तता नहीं मिली?

कश्मीर अन्य राज्यों के मुकाबले सिद्धांत के स्तर पर बेहद स्वायत्त रहा है. भारतीय संविधान अन्य राज्यों के मुकाबले कश्मीर को ज्यादा अधिकार देता है. लेकिन व्यवहार में उसके पास दिल्ली और हरियाणा से भी कम स्वायत्ता है. मुझे लगता है कि कश्मीरियों को इस बात का एहसास है कि वह अपने भाग्य के मालिक नहीं हैं.

क्या आपको लगता कि कश्मीर की वजह से क्षेत्रीय संघर्ष सांप्रदायिक संघर्ष में तब्दील हो रहा है?

ऐतिहासिक तौर पर कश्मीर धर्म का मामला नहीं रहा है. यह एक क्षेत्रीय मसला है. लेकिन अगर हम वैसे समाधान को नहीं खोज पाते हैं जिससे शांति आए तो यह सांप्रदायिक संघर्ष में तब्दील हो सकता है.

आप उस टीम के सदस्य थे जिसे आम आदमी पार्टी को नाम दिया. बाद में आपने नाम को लेकर असंतोष जाहिर किया था जब यह सवाल उठा कि आम औरत पार्टी क्योें नहीं हो सकता. आपने पार्टी के लिए कौन सा नाम चुना था?

यह सही है कि मुझे कुछ आपत्तियां थीं. मुझे लगता था कि यह उचित नहीं है. लेकिन बाद में मैं गलत साबित हुआ. यह नाम काफी लोकप्रिय हुआ. हमने अभी तक अपनी पार्टी के लिए नाम नहीं चुना है. हमने सुझाव मांगे हैं और हमें लोगों के सुझाव का इंतजार रहेगा.

First published: 5 August 2016, 2:48 IST
 
सुहास मुंशी @suhasmunshi

प्रिंसिपल कॉरेसपॉडेंट, कैच न्यूज़. पत्रकारिता में आने से पहले इंजीनियर के रूप में कम्प्यूटर कोड लिखा करते थे. शुरुआत साल 2010 में मिंट में इंटर्न के रूप में की. उसके बाद मिंट, हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ़ इंडिया और मेल टुडे में बाइलाइन मिली.

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