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'जेटली ने जिस आधार पर मनमोहन का इस्तीफा मांगा था उसे खुद पर भी लागू करें'

सोमी दास | Updated on: 22 December 2015, 20:55 IST
QUICK PILL

दिल्ली क्रिकेट अकादमी (डीडीसीए) में कथित भ्रष्टाचार को लेकर आम आदमी पार्टी और वित्त मंत्री अरुण जेटली के बीच शुरू हुई राजनीतिक जंग से बहुत पहले ही वरिष्ठ आईएएस अधिकारी चेतन बी सांघी के नेतृत्व में बनी तीन सदस्यीय कमेटी ने डीडीसीए में कथित वित्तीय अनियमितता को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट सौंपी थी. 

डीडीसीए में व्याप्त भारी भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस कमेटी का गठन किया था. कमेटी ने डीडीसीए की मान्यता को तत्काल निलंबित किए जाने के साथ सात अन्य सिफारिशें की थीं. इसके अलावा कमेटी ने डीडीसीए को सूचना का अधिकार के तहत लाने की सिफारिश करते हुए वित्तीय घपले की जांच की सिफारिश की थी. 

आम आदमी पार्टी के सह-संस्थापक और वकील राहुल मेहरा भी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सदस्य थे. कैच से बातचीत में उन्होंने बताया कि डीडीसीए के पूर्व और मौजूदा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं. उन्होंने यह भी बताया कि क्यों अरुण जेटली को इस मामले में जांच का सामना करना चाहिए.

क्या आपको ऐसा कोई सबूत मिला जिससे अरुण जेटली के खिलाफ सीधे-सीधे मामला बनता है?

हमारी कमेटी की जांच का दायरा किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ सबूत जुटाना नहीं था. हमें यह पता लगाना था कि डीडीसीए में क्या गलत चल रहा है. जेटली 14-15 साल तक डीडीसीए का हिस्सा रहे हैं और उनके कार्यकाल के दौरान बहुत कुछ ऐसा हुआ जो सही नहीं था. उनकी भूमिका को लेकर सब कुछ जांच आयोग की रिपोर्ट के बाद ही साफ हो पाएगा. इस दौरान सबको अपनी बात रखने का मौका मिलेगा.

जहां तक हमारी बात है तो हमने अपनी रिपोर्ट जमा कर दी है. यह चौंकाने वाला है जो डीडीसीए की गलतियों पर मुहर लगाता है क्योंकि इससे पहले तीन फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट आ चुकी हैं. इसमें से दो को डीडीसीए ने खुद बनाया था. हम सामूहिक दायित्व को लेकर चिंतित हैं. आप सामूहिक जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते.

क्या आप यह कह रहे हैं कि जेटली को डीडीसीए में हुई कथित घपले की सामूहिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए?

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के दूसरे कार्यकाल में ए राजा और कलमाडी जैसे भ्रष्ट लोग थे और सिंह पर इन लोगों को बचाने का आरोप लगा. वह आरोप था. मनमोहन सिंह पर भी निजी तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे थे.

मैं इस बात पर टिप्पणी नहीं कर रहा हूं कि जेटली सही हैं या गलत. मैं बस इतना कह रहा हूं जिस आधार पर विपक्ष के नेता के तौर पर जेटली ने मनमोहन सिंह के इस्तीफे की मांग की थी उसी आधार को उन्हें खुद पर भी लागू करना चाहिए. जेटली के कार्यकाल में उनके आसपास के लोगों ने जो किया वह डीडीसीए की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में दर्ज है.

आपकी सदस्यता वाली कमेटी ने कब रिपोर्ट सौंपी? इस रिपोर्ट पर दिल्ली सरकार की क्या प्रतिक्रिया थी? उन्होंने इसे किस तरह लिया?

15 नवंबर को हमने रिपोर्ट सौंपी और उस रिपोर्ट पर क्या किया गया, यह सवाल दिल्ली सरकार से पूछा जाना चाहिए. मुझे नहीं पता. मैंने अखबारों में जांच आयोग के बारे में पढ़ा है और हमने इसकी सिफारिश की थी. हमने सात सिफारिशें की थीं. इसमें एक जांच आयोग बनाए जाने का भी सुझाव था.

रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद कमेटी के चेयरपर्सन चेतन सांघी के खिलाफ दो एफआईआर भी दर्ज किए गए. फिर मैंने अखबारों में पढ़ा कि सीएम के दफ्तर पर सीबीआई का छापा पड़ा है.

आप ने प्रिंसपल सेक्रेटरी के दफ्तर पर छापे के बाद डीडीसीए का जिक्र क्यों किया?

मुझे छापे के बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं है.

तो अब आगे का क्या रास्ता है?

पूरे मसले में जेटली का कार्यकाल एक पहलू है. दूसरा पहलू तब सामने आएगा जब इस मामले की गंभीर जांच होगी. अभी तक किसी ने इस मामले के आपराधिक पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच नहीं किया है. सीबीआई ने प्राथमिक जांच की है लेकिन अभी तक कोई जांच नहीं हुई है.

अभी तक किसी के खिलाफ मामला दर्ज नहीं हुआ है. सभी इस मामले में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कराए जाने की उम्मीद कर रहे हैं. अगर जेटली निर्दोष हैं तो वह साबित होंगे. लेकिन अगर कोई दोषी है तो उसे कानून के दायरे में जरूर लाया जाना चाहिए.

मैं किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच रहा हूं कि कौन दोषी और कौन निर्दोष. मैं बस इतना कह रहा हूं कि डीडीसीए के अधिकारियों पूर्व और मौजूदा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं. हम एक लोकतांत्रिक समाज में रहते हैं और ऐसे में हम एक निष्पक्ष जांच की उम्मीद कर सकते हैं.

First published: 22 December 2015, 20:55 IST
 
सोमी दास @Somi_Das

Somi brings with her the diverse experience of working in a hard news environment with ample exposure to long-form journalism to Catch. She has worked with Yahoo! News, India Legal and Newslaundry. As the Assistant Editor of Catch Live, she intends to bring quality, speed and accuracy to the table. She has a PGD in Print and TV journalism from YMCA, New Delhi, and is a lifelong student of Political Science.

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