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जानिए डेंगू और चिकनगुनिया बीमारी के लक्षण और बचाव के उपाय

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 September 2016, 11:43 IST
(कैच)

दिल्ली और देश के अन्य इलाकों में चिकनगुनिया और डेंगू ने ऐसा कहर मचा रखा है कि शासन-प्रशासन की सारी कोशिशें नाकाम नजर आ रही हैं. पूरा स्वास्थ्य महकमा इन बीमारियों के आगे लाचार नजर आ रहा है. इस बीमारी के लक्षण की पहचान आसान नहीं होती.

समान्यतः रोगी को सामान्य बुखार और चिकगुनिया या डेंगू के बुखार के बीच का फर्क समझ नहीं आता, यही वजह है कि इस बीमारी ने दिल्ली सहित देश के तमाम हिस्से में महामारी का रूप ले लिया है.

यहां हम आपके इन बीमारियों के लक्षण और उनसे बचाव के तरीके के बारे में बता रहे हैं. जानिए कि चिकनगुनिया, डेंगू और सामान्य बुखार के बीच अंतर क्या है?

चिकनगुनिया के लक्षण और प्रभाव

- चिकनगुनिया और डेंगू बुखार के लक्षण लगभग एक जैसे ही होते हैं, लेकिन डेंगू चिकनगुनिया से ज्यादा खतरनाक होता है. हालांकि चिकनगुनिया की वजह से होने वाला दर्द कई सालों तक भी बना रह सकता है.

- चिकनगुनिया 1 से 12 दिन तक होता है, लेकिन इसके लक्षण कई दिनों तक शरीर में मौजूद रहते हैं, जैसे कि जोड़ों का दर्द कई दिनों तक रहता है.

- चिकनगुनिया के वक्त बुखार, जोड़ों में दर्द, सिर दर्द और आंखों में दिक्कत होती है.

- चिकनगुनिया में हाथों और पांवों के जोड़ों में दर्द होता है और सूजन भी आ जाती है. साथ ही दर्द सुबह के वक्त ज्यादा होता है.

- चिकनगुनिया में हथेलियों और पावों के साथ साथ पूरे शरीर पर रेशैज हो जाते हैं. चिकनगुनिया से सिर्फ जोड़ों में दर्द होता है और कोई दिक्कत होने की संभावना कम होती है.

डेंगू के लक्षण और प्रभाव

- डेंगू 3 से 7 दिन तक रहता है, लेकिन डेंगू में कमजोरी बहुत ज्यादा होती है क्योंकि इस रोग में शरीर में प्लेटलेट्स लगातार गिरती रहती है.

- डेंगू में शरीर पर रैशेज कम होते हैं और आंखों पर भी कम असर पड़ता है.

- डेंगू में कमर की मांसपेशियों में दर्द होता है और कंधे-घुटने में भी दर्द बना रहता है.

- डेंगू में चेहरे और चमड़ी पर ही चकत्ते होते हैं.

- डेंगू ज्यादा खतरनाक होने की वजह से ब्लीडिंग भी होती है और सांस लेने में भी दिक्कत आती है. साथ ही शरीर में बहुत ज्यादा कमजोरी होती है.

- सामान्य बुखार में तापमान कुछ समय बाद कंट्रोल हो जाता है और जोड़ो में दर्द नहीं होता है.

- सामान्य बुखार में सिर्फ शरीर का तापमान ही बढ़ता है और आपको खांसी भी हो सकती है.

- सामान्य बुखार में छींकें आदि आती हैं और पसीना आने पर बुखार उतर जाता है.

डेंगू और चिकनगुनिया से बचने के लिए क्या करें?

- घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें.

- यदि घर में बर्तनों आदि में पानी भर कर रखना है, तो ढक कर रखें.

- यदि जरूरत ना हो तो बर्तन खाली कर के या उल्टा कर के रख दें.

- कूलर, गमले आदि का पानी रोज बदलते रहें.

- रात में सोते वक्त ऐसे कपड़े पहनें जो शरीर के अधिकतम हिस्से को ढक सके.

- मच्छर रोधी क्रीम, स्प्रे, लिक्विड, इलेक्ट्रॉनिक बैट आदि का प्रयोग मच्छरों के बचाव हेतु करें.

- डेंगू या चिकनगुनिया से पीड़ित मरीज का तुरंत उपचार शुरू करें व तेज बुखार की स्थिति में पैरासिटामाल की गोली दें.

- एस्प्रिन या डायक्लोफेनिक जैसी अन्य दर्द निवारक दवाई न लें.

- मरीज को खुली हवा में रहने दें व पर्याप्त मात्रा में भोजन-पानी दें जिससे मरीज को कमजोरी न लगे.

- फ्लू एक तरह से हवा में फैलता है अतः मरीज से 10 फुट की दूरी बनाए रखें तो फैलने का खतरा कम रहता है.

- जहां बीमारी अधिक मात्रा में हो, वहां फेस मास्क पहनना चाहिए.

- घर के आस-पास मच्छरनाशक दवाइयां छिड़काएं.

- एडीज मच्छर दिन में काटते हैं, अतः शरीर को पूर्ण रूप से ढकें.

चिकनगुनिया जानलेवा बीमारी नहीं है. इस बारे में आर्इएमए भी कह चुका है. जितनी भी मौतें हो रही हैं वो चिकनगुनिया से पहले उन्हें पहले से ही कोर्इ दूसरी बीमारी भी संभव है.

मरीज अपनी पुरानी बीमारी के बारे में डॉक्टर्स को जानकारी नहीं देते हैं. एेसे में उन्हें उस तरह से इलाज नहीं मिल पाता है, जैसा कि उन्हें मिलना चाहिए. यही कारण है कि चिकनगुनिया को मौत का कारण माना जा रहा है.

जबकि डेंगू में भी मरीज के गंभीर स्थिति में पहुंचने पर भी मौतों का आंकड़ा केवल 1 फीसदी है. इससे पीड़ित मरीज की जान आसानी से बचाई जा सकती है.

अगर डेंगू के मरीज का प्लेटलेट्स काउंट 10,000 से ज्यादा हो, तो प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन की कोई जरूरत नहीं होती. अनुचित प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन नुकसान कर सकता है.

डेंगू की बीमारी को भी आसानी से रोका जा सकता है और इसका इलाज भी किया जा सकता है, इसलिए लोगों को इससे ज्यादा घबराना नहीं चाहिए.

First published: 16 September 2016, 11:43 IST
 
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