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यह नतीजा महिला राजनीति का निर्णायक पड़ाव है

गोविंद चतुर्वेदी | Updated on: 20 May 2016, 7:53 IST

तमिलनाडु में जे जयललिता और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की करिश्माई जीत सबसे ज्यादा जोश किसमें भरेगी? जवाब है, उन महिलाओं में जो राजनीति के क्षेत्र में अपना जौहर दिखाने को बेताब हैं.

'अम्मा' हो या 'दीदी' दोनों पर आरोप कम नहीं थे. भ्रष्टाचार से लेकर पक्षपात तक के, लेकिन दोनों ने हार नहीं मानी. जयललिता तो ऐसी लड़ीं कि इतिहास ही बदल दिया. पिछले 32 सालों में, तमिलनाडु में, कोई पार्टी लगातार दो बार नहीं जीती. जयललिता ने ऐसा करके इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया.

अब बारी मायावती की है जो जयललिता के पीछे ही चल रही हैं. जयललिता का यह पांचवा टर्म चल रहा है और छठे के लिए वह नए सिरे से शपथ लेंगी जबकि मायावती अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश चुनावों में पांचवें टर्म के लिए मैदान में उतरेंगी.

वर्ष 1963 में सुचेता कृपलानी उत्तर प्रदेश ही नहीं देश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी

भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के अरोपों से वे भी उतनी ही घिरी हुई हैं जितनी जयललिता और ममता. सीबीआई तक के घेरे में हैं. इन दोनों से उनकी एक समानता यह भी है कि, वे भी उनकी तरह अविवाहित हैं. उम्र में वे ममता (61) से एक वर्ष छोटी हैं जबकि जयललिता इन तीनों में सबसे बड़ी हैं- 68 वर्ष की.

ममता बनर्जी ने राजनीति में अपनी जगह, अपने दम पर संघर्ष के साथ बनाई है जबकि जयललिता और मायावती ने भी संघर्ष तो खूब किया लेकिन राजनीतिक जीवन के शुरूआती दौर में उन्हें अपने-अपने निर्माताओं की छत्रछाया भी खूब मिली. जयललिता को एमजी रामचंद्रन की और मायावती को कांशीराम की. उत्तर प्रदेश के साथ अगले वर्ष जिन अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनमें पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, मणिपुर, और गोवा शामिल हैं.

जयललिता तो ऐसी लड़ीं कि इतिहास ही बदल दिया. 32 सालों में, तमिलनाडु में, कोई पार्टी लगातार दो बार नहीं जीती

इनमें भी पंजाब में अकाली दल की ओर से वर्तमान मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की पुत्र वधु और मौजूदा केन्द्रीय मंत्री हरसिमरत कौर मुख्यमंत्री पद की 'छिपी दावेदार' हो सकती है. वैसे अभी उनके पति सुखबीर सिंह बादल उपमुख्यमंत्री हैं और मुख्यमंत्री पद के स्वाभाविक दावेदार भी.

उत्तराखण्ड में ऐसी ही दावेदारी इंदिरा हृदयेश की हो सकती है तो हिमाचल प्रदेश में विद्या स्टोक्स की. यद्यपि स्टोक्स की उम्र में इसमें बाधक हो सकती है. वे 88 वर्ष की हैं लेकिन राजनीति में करूणानिधि और अच्युतानंदन जैसे उदाहरण हैं जो 92 साल के होकर भी पूरी तरह सक्रिय हैं.

आठ बार विधायक रही स्टोक्स स्वयं अभी हिमाचल प्रदेश सरकार में, नंबर दो की मंत्री हैं. वैसे ही जैसे इंदिरा हृदयेश उत्तराखण्ड की हरीश रावत सरकार में. यूं हिमाचल में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह (60) भी दावेदार हो सकती हैं.

ममता बनर्जी ने राजनीति में अपनी जगह, अपने दम पर संघर्ष के साथ बनाई है

भारतीय राजनीतिक परिदृश्य को देखें तो आज शायद देश में सबसे ज्यादा महिला मुख्यमंत्री हैं. देश के 29 राज्यों में से 5 में. इनमें राजस्थान, गुजरात और जम्मू-कश्मीर शामिल हैं. यह भी एक सच्चाई है कि भारत में संसदीय लोकतंत्र की शुरूआत (1952) के बाद देश के किसी भी राज्य में महिला के मुख्यमंत्री बनने में 11 साल लग गए.

वर्ष 1963 में सुचेता कृपलानी उत्तर प्रदेश ही नहीं देश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी और वह भी  सीबी गुप्त और डा सम्पूर्णानंद जैसे तब के कांग्रेसी दिग्गजों को हराकर. डा सम्पूर्णानंद बाद में राजस्थान के राज्यपाल भी रहे. कृपलानी के बाद नंदिनी सतपथी (उड़ीसा), शशिकला काकोड़कर (गोवा), अनवरा तैमूर (असम), जानकी रामचंद्रन (तमिलनाडु), मायावती (यूपी), राजिन्दर कौर भट्टल (पंजाब), राबड़ी देवी (बिहार), सुषमा स्वराज और शीला दीक्षित (दिल्ली) तथा उमा भारती (मध्यप्रदेश) मुख्यमंत्री रही हैं.

First published: 20 May 2016, 7:53 IST
 
गोविंद चतुर्वेदी @catchhindi

लेखक राजस्थान पत्रिका के डिप्टी एडिटर हैं.

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