Home » इंडिया » This village got its First Hand pump after the 70 years of independence
 

आजादी के 70 साल बाद इस गांव को मिला पहला हैंडपंप, लोगों ने पहली बार देखी बोरिंग मशीन

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 November 2018, 11:57 IST

देश एक तरफ विकास की नई इबारत लिखा रहा है लेकिन झारखंड के एक गांव के लोगों के लिए ये सब महज कागज़ी दावे हैं. आजादी के 70 सालों के बाद भी देश में एक ऐसा गांव है जहां पर आज तक पीने के पानी के लिए लोगों को एक हैंडपंप तक नसीब नहीं है. आजादी के 70 साल बाद तक झारखंड के इस गांव में स्वच्छ पानी के लिए बोरिंग की कोई व्यवस्था नहीं है. इन 70 सालों में कई बार सत्ता पलटी लेकिन पानी इन गाँवों को अब नसीब हुआ है.

लेकिन इतने सालों पर अब इस गांव के पंचायत प्रमुख ने लोगों की इस समस्या का हल निकाला है. झारखंड के लातेहार के नक्सल प्रभावित गांव में पहली बार कोई हैंडपंप बोरिंग की मशीन पहुंची है. यहां के लोगों में इस बात की खुशी इसी से देखि जा सकती है कि पहली दफा अपने गाँव में बोरिंग मशीन देख कर ही ये ग्रामीण ख़ुशी से फूले नहीं समा रहे है. आज देश चाहे जितना डिजिटल हो जाए लेकिन सच्चाई तो ये है कि दश के कई हिस्से ऐसे हैं जहां पर आम आदमी की सबसे बड़ी जरुरत अभी तक पानी, अनाज और घर तक ही सीमित रह गई है.

इस गांव में अब इन मशीनों की मदद से तीन हैंडपंप लगवाए गए. इस मामले में ग्रामीणों का कहना है कि इसके पहले तक खराब सड़क व्यवस्था के चलते गांव के अंदर तक इस तरह की बड़ी गाड़ियां नहीं पहुंच पाती थी. लेकिन पंचायत प्रमुख ने इसे संभव कर दिखाया है. इस गांव की खस्ता हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक इस गांव में कोई बड़ी गाड़ी तक नहीं आ सकती थी.

गांव वालों को ये ख़ुशी देने वाले जागीर गांव के पंचायत ब्लॉक प्रमुख मंगलदेव उरांव ने कहा, ''ग्रामीणों को अब तक पीने के स्वच्छ पानी की सुविधा प्राप्त नहीं थी. इस बार हमने ये करके दिखाने का फैसला किया. हमने जेसीबी मशीन की मदद से बोरिंग मशीन को गांव के अंदर तक लेकर आए.''

 ये गांव पहाड़ी इलाके में है जिसके इसे जंगल विभाग के द्वारा पहाड़ों को काट कर बनाया गया है. यही बड़ी वजह है कि यहां बड़ी गाड़ियों को अंदर तक लाना आसान नहीं था यही कारण है कि जेसीबी मशीनों की मदद से बोरिंग मशीन को अंदर लाया गया और 70 सालों के बाद इस गांव के लोगों को स्वच्छ पानी के लिए पहला हैंडपंप मिला है.

First published: 12 November 2018, 11:57 IST
 
अगली कहानी