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जम्मू कश्मीर: सेना ने एनकाउंटर में मारे तीन आतंकी, पुलिस बोली- दहशतगर्दों का मददगार, परिवार ने बताया- बेकसूर

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 December 2020, 20:48 IST

जम्मू कश्मीर में सेना ने बुधवार को तीन आतंकियों को मारने को एक एनकाउंटर में मारने का दावा किया था. सेना और जम्मू कश्मीर पुलिस का कहना था कि यह तीनों दहशतगर्द श्रीनगर-बारामुला हाईवे पर एक बड़ी घटना को अंजाम देना चाहते थे. लेकिन, जैसे ही इन तीनों की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई, इन लोगों के परिवालों ने आकर कहा कि उनके बच्चे बेकसूर थे.

इंडिय़न एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बताया, शोपियां के जुबैर अहमद, और पुलवामा के अज़ाज़ अहमद गनाई और अतहर मुश्ताक "कट्टर" आतंकवादी सहयोगी थे. हालांकि, पुलिस ने इस बात को स्वीकार किया है कि इन तीनों के नाम आतंकवादियों की सूची में नहीं थे. अजाज एक पुलिसकर्मी का बेटा था. इस मामले में कश्मीर के आईजीपी विजय कुमार ने कहा कि वे मामले की जांच कर रहे हैं और "जल्द ही कोई निष्कर्ष आएगा."


इस मुठभेड़ के बारे में पहले कहा गया था कि इसे सेना, पुलिस और सीआरपीएफ ने संयुक्त रूप से अंजाम दिया है, लेकिन बाद में पुलिस ने बताया कि वो सीआरपीएफ के साथ बाद में मुठभेड़ में शामिल हुई थी.

बता दें, मंगलवार शाम को सुरक्षाकर्मियों ने श्रीनगर में होकेसर वेटलैंड के बाहर स्थित एक घर को चारों तरफ से घेर लिया था. सुरक्षा बलों ने दावा किया कि तीन लोगों ने अंदर से ही उन पर गोलियां चलाईं, जिसके बाद रात भर रुक-रुक कर गोलीबारी होती रही. बुधवार को, पुलिस और सेना ने तीन "आतंकवादियों" को मारने का दावा किया.

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बुधवार को किलो फोर्स के जनरल ऑफिसर कमांडिंग एच साही ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा,"पिछले कई दिनों से, राष्ट्रीय राजमार्ग पर (श्रीनगर-बारामुला) पर आतंकवादियों की आवाजाही के बारे में खुफिया सूचनाएं मिल रही थीं. कल हमने लीड विकसित की और पता चला कि आतंकवादी एक घर में छिपे हुए हैं."

उन्होंने आगे बताया,"उन्हें आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया. हालांकि, उन्होंने गोलीबारी से उसका जवाब दिया और रातभर के लिए ऑपरेशन स्थगित कर दिया गया. जब सुबह ऑपरेशन फिर से शुरू किया गया, तो उन्हें फिर से आत्मसमर्पण करने का प्रस्ताव दिया गया. हालांकि, उन्होंने फिर से गोलीबारी शुरू कर दी और बलों पर ग्रेनेड फेंके, जिससे हमें संकेत मिला कि उनका आत्मसमर्पण करने का कोई इरादा नहीं है."

हालांकि, इसके बाद बुधवार शाम को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक संशोधित बयान जारी किया जिसमें उन्होंने कहा कि लगभग 5.30 बजे, "02 आरआर (राष्ट्रीय राइफल्स) के सैनिकों" ने "एक विशिष्ट इनपुट" पर एक कॉर्डन ऑपरेशन शुरू किया, इस दौरान उन पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई गई और ग्रेनेड से हमला किया गया. इस सूचना के मिलने पर, श्रीनगर पुलिस तुरंत श्रीनगर एसओजी और वैली QAT CRPF घटनास्थल पर पहुंच गई.

वहीं इस मुठभेड़ के बाद इन लोगों के फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे, इसके तुरंत बाद ही पुलवामा से एक व्यक्ति का परिवार श्रीनगर पहुंचा और सुरक्षाबलों पर बेगुनाहों को मारने का आरोप लगाया. इस मुठभेड़ में मारे गए एजाज के दादा ने कहा,"मंगलवार को सुबह10 बजे उसने मेरे साथ चाप पी थी.उसने मुझे कहा था कि वो स्कूल जा रहा है." एजाज के दादा ने आरोप लगाते हुए कहा कि उसे गाड़ी से बाहर निकाला गया और फिर गोली मारी गई. उन्होंने कहा,"मेरे बच्चे को क्यों मारा गया? उसने क्या किया था? हमें जवाब चाहिए."

वहीं मामले में आईजीपी ने कहा,"यह सच है कि आतंकवादियों की हमारी सूची में उनके नाम का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन उनमें से दो आतंकवादी (ओवरग्राउंड वर्कर) के कट्टर सहयोगी हैं ... रिपोर्ट किए गए तीसरा हाल ही में शामिल हुआ होगा ... इसके अलावा, उन्हें बुधवार सुबह दो बार और मंगलवार शाम को आत्मसमर्पण करने का अवसर दिया गया, लेकिन उन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया."

वहीं परिवार के आरोपों पर उन्होंने कहा,"आमतौर पर माता-पिता को ऐसे युवाओं की गतिविधियों के बारे में पता नहीं होता है ... उदाहरण के लिए, पुलवामा का एक छात्र जो श्रीनगर में कोचिंग ले रहा था, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उसे पकड़ा गया था, क्योंकि वो ग्रेनेड बना रहा था. उसके माता-पिता को यह नहीं पता था."

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First published: 31 December 2020, 10:30 IST
 
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