Home » इंडिया » Tired of being treated shabbily, Karnataka cops plan strike
 

पुलिसकर्मियों के आंदोलन पर सख्त हुई कर्नाटक सरकार

रामकृष्ण उपध्या | Updated on: 4 June 2016, 0:19 IST
(कैच हिंदी)
QUICK PILL
  • 4 जून को कम वेतन और ख्रराब कामकाजी माहौल के खिलाफ करीब 64,000 पुलिसकर्मियों के आंदोलन को रोकने के लिए कर्नाटक सरकार ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है.
  • अखिल कर्नाटक पुलिस महासभा के प्रेसिडेंट वी शशिधर को उनके घर से आधी रात को हिरासत में ले लिया. श्रीधर इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं.
  • कर्नाटक सरकार ने विरोध प्रदर्शन रोकने के लिए एस्मा तक लगाने की तैयारी कर रखी है. एस्मा के तहत पुलिसकर्मियों को उनकी सेवा से बर्खास्त तक किया जा सकता है.

4 जून को कम वेतन और ख्रराब कामकाजी माहौल के खिलाफ करीब 64,000 पुलिसकर्मियों के आंदोलन को रोकने के लिए कर्नाटक सरकार ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है. सरकार ने आंदोलन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए इसके नेता को एक दिन पहले ही आधी रात में हिरासत में ले लिया.

सरकार इस आंदोलन को लेकर किस कदर नर्वस थी, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि करीब 30 पुलिसवालों ने अखिल कर्नाटक पुलिस महासभा के प्रेसिडेंट वी शशिधर को उनके घर से आधी रात को हिरासत में ले लिया.

शशिधर खुद पुलिस के बड़े अधिकारी है और उनके संगठन से करीब 50,000 लोग जुड़े हुए हैं. अखिल कर्नाटक पुलिस महासभा एक पंजीकृत संस्था है लेकिन यह राज्य सरकार की तरफ से मान्यता प्राप्त नहीं है. शशिधर की पत्नी पूर्णिमा ने कहा कि उन्हें धमकाने और डराने के लिए इतनी बड़ी संख्या में पुलिसवालों को भेजा गया. अगर वह पुलिस के एक कॉन्सेटबल को भी भेजते तो शशिधर खुद आत्मसमर्पण कर देते.

पूर्णिमा ने कहा कि जब उनकी बेटी ने गिरफ्तारी की तस्वीर लेने की कोशिश की तब पुलिसवालों ने उसका मोबाइल फोन छीन लिया और फिर उसे जमीन पर पटक दिया. इसके बाद दर्जन भर पुलिसवाले सुबह करीब 3.30 बजे आए. पूर्णिमा ने जब पुलिसवालों को सुबह आने के लिए कहा तो उन्होंने दरवाजा तोड़ने की धमकी दी.

कर्नाटक में पुलिस बलों की तय संख्या 94,000 है लेकिन राज्य में महज 64,000 पुलिस वाले ही तैनात हैं

इसके बाद उन्होंने अपने पति से फोन से बात की और फिर पुलिस वालों को घर में घुसने दिया. पूर्णिमा ने कहा कि पुलिस उनके पति के कंप्यूटर, कुछ दस्तावेज और उन नोट को भी उठाकर ले गई जिस पर उन्होंने किसी आर्टिकल का नोट बनाया था.

गुरुवार की सुबह शशिधर को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया. शशिधर पर देशद्रोह और सशस्त्र बलों के बीच असंतोष भड़काने का गंभीर आरोप लगाया गया है.

कर्नाटक में पुलिस बलों की तय संख्या 94,000 है लेकिन राज्य में महज 64,000 पुलिस वाले ही तैनात हैं. पुलिसकर्मियों को न केवल कम वेतन मिलता है बल्कि उन्हें छुट्टियां भी नहीं दी जाती हैं.

कॉन्सेटबल को दिन में 12 से 15 घंटे तक काम करना होता है और उन्हें किसी तय दिन पर छुट्टी नहीं मिलती है. एक हेड कॉन्स्टेबल ने कहा, 'हमें 15 दिनों की पूरी सीएल भी नहीं मिलती क्योंकि हमारे वरिष्ठ अधिकारी किसी आपात स्थिति में ही हमें छुट्टी देते हैं.'

केरल में एक कॉन्स्टेबल को प्रति महीने 11,600-21,000 रुपये की सैलरी मिलती है जबकि हेड कॉन्स्टेबल को हर महीने 12,500-24,000 रुपये का वेतन मिलता है. पड़ोसी राज्य तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने हाल ही में कॉन्स्टेबल की सैलरी बढ़ाकर 48,000 रुपये कर दी है.

सबसे खराब स्थिति यह है कि पुलिस के कम दर्जे वाले कर्मचारियों को अधिकारियों के बंगले पर काम करना पड़ता है.

पुलिस के एक सूत्र ने बताया, 'पुलिस में लंबे समय से उपनिवेशवादी व्यवस्था जारी है लेकिन इस दिशा में किसी अधिकारी ने कोई काम नहीं किया. ऐसा इसलिए कि अधिकारियों को इससे मुफ्त में काम करने वाला मिल जाता है. यहां तक कि आईएएस अधिकारियों और नेताओं को इससे सबसे ज्यादा फायदा होता है.'

दो दिनों पहले ही स्थानीय समाचार पत्र में एक फोटो छपी थी जिससे पुलिस विभाग को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था. फोटो में एक पुलिस का कर्मचारी रेलवे के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल एच एस वेंकटेश के घर का फर्श साफ करता दिख रहा है. 

मीडिया में आई खबरों के बाद डीजीपी ओम प्रकाश ने तत्काल वेंकटेश का स्थानांतरण करते हुए मामले की जांच का आदेश दिया है.

पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने एस्मा लगाने तक का विचार कर लिया है. इस प्रावधान के तहत पुलिसकर्मियों को सेवा से बर्खास्त तक किया जा सकता है. मुख्यमंत्री ने प्रदर्शन में शामिल होने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है.

दिनों दिन के गतिविधि की निगरानी कर रहे राज्य के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि 4 जून को करीब 30,000 पुलिसकर्मियों ने सार्वजनिक छुट्टी के लिए आवेदन दिया है. हालांकि सरकार की अपील के बाद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों ने छुट्टी के आवेदन को वापस लेना शुरू कर दिया है.

परमेश्वर कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं और उन्होंने अगले वेतन आयोग में पुलिस कर्मचारियों के वेतन में सुधार करने का भरोसा दिया है. गृह मंत्री बनने के बाद उन्होंने पुलिस व्यवस्था में जारी औपनिवेशिक परंपराओं को खत्म करने का भरोसा दिया था. लेकिन जल्द ही वह सब कुछ भूल गए. 

First published: 4 June 2016, 0:19 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी