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अखिलेश मंत्रिमंडल का आज विस्तार, गायत्री प्रजापति की वापसी पर सस्पेंस

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 September 2016, 12:28 IST
(कैच)

उत्तर प्रदेश में बीते कुछ दिनों से चल रहे सत्ता के घमासान में फंसी अखिलेश यादव की समाजवादी सरकार का सोमवार को मंत्रिपरिषद विस्तार होने जा रहा है.

कुछ दिनों पहले ये खबर चल रही थी कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के दखल के बाद सरकार से बाहर किए गए खनन मंत्री गायत्री प्रजापति की वापसी आज के मंत्रिमंडल विस्तार में हो सकती है, लेकिन सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर के द्वारा राज्यपाल राम नाईक को पत्र भेज कर गायत्री की वापसी पर सवाल उठाए जाने के बाद से वापसी पर संदेह के बादल छा गए हैं.

राजभवन से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, "सोमवार को अखिलेश मंत्रिपरिषद का आठवां विस्तार होना है. प्रदेश मंत्रिपरिषद में इस विस्तार के बाद मुख्यमंत्री को लेकर कुल 60 मंत्री हो सकते हैं, जिसमें तीन स्थान रिक्त हैं."

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी मुखिया मुलायम सिंह यादव परिवार में चले सीएम अखिलेश और शिवपाल के बीच टकराव में खनन मंत्री गायत्री प्रजापति और पंचायती राज मंत्री राजकिशोर सिंह को बर्खास्त कर दिया गया था.

इसके बाद मचे बवाल को शांत करने के लिए मुलायम सिंह को स्वयं आगे आना पड़ा और उन्होंने गायत्री की वापसी के लिए अखिलेश यादव को आदेश दिया. जिसके बाद अखिलेश ने गायत्री प्रजापति को दोबारा मंत्री बनाए जाने की घोषणा की थी.

बहरहाल सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने मंत्रिपरिषद में गायत्री की वापसी के खिलाफ राज्यपाल नाईक के समक्ष एक याचिका दी है.

गायत्री प्रजापति के अलावा सोमवार को सपा विधायक जियाउद्दीन रिजवी को भी शपथ दिलायी जा सकती है, जो पिछले विस्तार में शपथ नहीं ले पाए थे, मगर विवाद प्रजापति के शपथ को लेकर है.

राज्यपाल ने गायत्री प्रकरण समझने के लिए नूतन ठाकुर को को रविवार की शाम राजभवन बुलाया. गौरतलब है कि सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने प्रदेश में अवैध खनन को लेकर गायत्री प्रजापति के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है.

पहले भी वह इस संबंध में लोकायुक्त अदालत से लेकर हर फोरम पर विरोध दर्ज करा चुकी हैं. मंत्रिपरिषद विस्तार से दो दिन पहले ठाकुर ने राजभवन का दरवाजा खटखटाया और प्रजापति को दोबारा शामिल करने पर विरोध जताया.

नूतन की दलील है कि प्रजापति के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप है और उन्हें मंत्रिपरिषद से बर्खास्त ही तब किया गया था, जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर हुई सीबीआई जांच अदालत के सामने दाखिल की गई.

First published: 26 September 2016, 12:28 IST
 
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