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जानिए, सांस थमने से पहले कलाम ने क्या कहा था आखिरी बार

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2017, 5:48 IST
(एजेंसी)

पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम की आज पहली पुण्यतिथि है. अपने जीवनकाल में एक किंवदंती रहे मिसाइल मैन कलाम का आज से एक साल आज के ही दिन 83 साल की उम्र में शिलांग के भारतीय प्रबंध संस्थान में उस समय निधन हो गया था, जब डॉक्टर कलाम वहां व्याख्यान देने गए थे. लेकिन वो अपना व्याख्यान शुरू भी नहीं कर पाए और पोडियम के पास गिर पड़े.

जब कलाम गिर पड़े

अंतिम समय में गिरते वक्त कलाम को सहारा देने वाले सृजनपाल सिंह ने बताया कि सांसों की डोर टूटने से पहले उन्होंने क्या कहा था.

सृजनपाल सिंह ने उस दिन का वर्णन करते हुए बताया कि 27 जुलाई को ‘दोपहर तीन बजे वो पूर्व राष्ट्रपति कलाम के साथ दिल्ली से गुवाहाटी पहुंचे. वहां से दोनों लोग कार से शिलांग के लिए निकले. उस सफर को पूरा करने में ढाई घंटे का समय लगा.

उन्होंने बताया कि आमतौर पर डॉक्टर कलाम कार में सो जाया करते थे. लेकिन उस दिन वो नहीं सोए.

शिलांग पहुंचने पर पहले उन्होंने खाना खाया और बाद में व्याख्यान के लिए आईआईएम पहुंचे. वे व्याख्यान देने के लिए मंच पर पहुंचे और उनके पीछे मैं खड़ा था. उन्होंने मेरी तरफ मुड़कर पूछा कि, 'ऑल फिट?' मैंने जवाब दिया, 'जी साहब. उसके बाद वे गिरने लगे. मैंने उन्हें तुरंत अपनी बांहों में पकड़ लिया. उन्हें हॉस्पिटल ले आए. लेकिन उनकी मौत हो चुकी थी. उन्होंने आखिरी लाइन कही थी कि 'धरती को जीने लायक कैसे बनाया जाए.’

कलाम को श्रद्धांजलि देते राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

कलाम साहब को अटल बिहारी बाजपेयी की एनडीए सरकार ने राष्‍ट्रपति पद के लिए चुना. रामेश्‍वरम के एक सामान्‍य परिवार में जन्मे कलाम ने राष्‍ट्रपति रहते हुए कई ऐसे फैसले लिए जो बाद में नजीर बने. उन्हें सभी ओर से बराबरी से सम्‍मान प्राप्त था.

भारत रत्‍न डॉ. कलाम का जन्म 15 अक्टूबर, 1931 को तमिलनाडु के एक धार्मिक मुस्लिम परिवार में हुआ था. पिता जैनुलाब्दीन खुद ज्‍यादा पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन अपने प्रतिभावान बेटे को शिक्षित और संस्‍कारवान बनाने में उनका अहम योगदान रहा.

पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम को पीपुल्स प्रेसिडेंट भी कहा जाता है

परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि कलाम को अख़बार बांटने का काम भी करना पड़ा था. साल 1958 में उन्‍होंने अंतरिक्ष विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी और भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान में प्रवेश लिया. 

साल 1962 में वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में आए. यहीं उन्हें 'मिसाइलमैन' का नाम मिला. देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम को जो ऊंचाई मिली वह बहुत कुछ कलाम साहब की ही देन है, हालांकि उन्‍होंने कभी इसका श्रेय नहीं लिया. विक्रम साराभाई जैसे महान वैज्ञानिकों से कलाम ने बहुत कुछ सिखा. भारतीय रक्षा मंत्रालय में वैज्ञानिक सलाहकार रह चुके कलाम की ही देखरेख में भारत ने साल 1998 में पोखरण में अपना सफल परमाणु परीक्षण किया.

पोखरण परीक्षण के बाद डॉक्टर कलाम पीएम बाजपेयी और रक्षा मंत्री जार्ज के साथ

उसके बाद बाजपेयी सरकार ने उन्हें देश का 11वां राष्‍ट्रपति बनाया. कलाम ऐसे परमाणु वैज्ञानिक थे जो मिसाइल कार्यक्रम के साथ-साथ कविताएं लिखने और वीणा बजाने में भी पारंगत थे. वो गीता को जीवन का मूल मानते थे. राष्‍ट्रपति के तौर पर साल 2007 में उनका कार्यकाल खत्‍म हुआ. पूरा देश उन्‍हें बतौर राष्‍ट्रपति दूसरा कार्यकाल दिए जाने के पक्ष में था, लेकिन सियासी दलों के आपसी मतभेदों के चलते ऐसा नहीं हो सका था. 

First published: 27 July 2016, 3:25 IST
 
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