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चुनाव से पहले पंजाब में फिर शुरू हुई पानी की विवादित कहानी

राजीव खन्ना | Updated on: 4 March 2016, 12:37 IST
QUICK PILL
  • भारत-पाक सिंधु नदी जल समझौता 1960 के अनुसार भारत सतलज, ब्यास और रावी \r\nनदियों का पानी बेरोकटोक प्रयोग कर सकता है. वहीं इस समझौते के तहत \r\nपाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चेनाब के पानी पर समान अधिकार मिला.
  • साल 1966 में राज्य के विभाजन के बाद हरियाणा को पंजाब के हिस्से से पानी दिया गया, लेकिन जब दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर विवाद हुआ तो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1976 में \r\nमामले में हस्तक्षेप करते हुए एसवाईएल कैनाल के निर्माण की घोषणा की.

पंजाब और हरियाणा के बीच जल बंटवारा विवाद फिर उभरने लगा है. पंजाब में अगले साल विधान सभा चुनाव होने वाले हैं. इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों के रुख का आगामी चुनाव में असर दिखना लाजिमी है.

मामला दोबारा तब उठा जब सुप्रीम कोर्ट में इससे जुड़े एक मामले की सुनवाई हुई. कांग्रेसी नेता अमरिंदर सिंह जब राज्य के मुख्यमंत्री तब उन्होंने एक कानून बनाकर हरियाणा के संग जल बंटवारे को लेकर हुआ समझौता रद्द करने की कोशिश की थी. जिससे प्रस्तावित सतलज यमुना लिंक(एसवाईएल) कैनाल का निर्माण भी अधर में लटक जाता.

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केंद्र सरकार की तरफ से सोलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि केंद्र अदालत के फैसले पर राजी है जिसमें कहा गया था कि कैनाल का निर्माण कार्य जारी रहना चाहिए. मामले में अगली सुनवाई आठ मार्च को है.

मामले ने राजनीतिक रंग तब ले लिया जब बीजेेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार इस मामले में हरियाणा का समर्थन करती प्रतीत हुई. केंद्र के रुख के बाद अमरिंदर सिंह ने पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को निशाने पर लिया. पंजाब में बादल के अकाली दल और बीजेपी की गठबंधन सरकार है.

बादल और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अमरिंदर पर जोरदार पलटवार किया. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस मुद्दे का बीजेपी और अकाली गठबंधन पर भी पड़ सकता है.

एसवाईएल कैनाल का मुद्दा करीब चार दशक पुराना है. इसके लिए 1977 में भूमि अधिग्रहण शुरू हुआ था. उस समय बादल सत्ता में थे. खबरों के अनुसार कैनाल का काम 1985 में सुरजीत सिंह बरनाला के शासनकाल में शुरू हुआ.

एसवाईएल कैनाल का मुद्दा करीब चार दशक पुराना है. इसके लिए 1977 में भूमि अधिग्रहण शुरू हुआ था

पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1966 के अनुसार इस कैनाल से पंजाब की नदियों को हरियाणा से जोड़ा जाना है.

भारत-पाक सिंधु नदी जल समझौता 1960 के अनुसार भारत सतलज, ब्यास और रावी नदियों का पानी बेरोकटोक प्रयोग कर सकता है. वहीं इस समझौते के तहत पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चेनाब के पानी पर समान अधिकार मिला. 1955 में इन  तीन नदियों के अस्सी लाख एकड़ फीट(एमएएफ) राजस्थान को दिया गया. राज्य के विभाजन के बाद हरियाणा को पंजाब के हिस्से से पानी दिया गया.

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अलग-अलग राज्य बनने के बाद भी जब दो सालों के अंदर दोनों राज्य किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रहे तो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1976 में मामले में हस्तक्षेप किया. उन्होंने एसवाईएल कैनाल के निर्माण की घोषणा की ताकि हरियाणा को उसके हिस्से का पानी मिल सके.

उसके बाद कैनाल का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. वहीं इंदिरा गांधी ने 1981 में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों के बीच एक नया समझौता कराया. जिसके अनुसार पंजाब के हिस्से में थोड़ी बढ़ोतरी हो गई.

अकालियों ने पानी साझा न करने को अपने धर्मयुद्ध मोर्चा का हिस्सा बना लिया. 1985 में अकाली दल के तत्कालीन अध्यक्ष हरचंद सिंह लोंगोवाल और पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बीच एक समझौता हुआ. जिसके बाद पंजाब के हिस्से के कैनाल का निर्माण कार्य शुरू हो गया. 1990 में आतंकियों ने कैनाल के निर्माण से जुड़े दो इंजीनियरों की हत्या कर दी.

इंदिरा गांधी ने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों के बीच जल बंटवारे को लेकर समझौता कराया था

1997 में राज्य में बादल सरकार बनने के बाद से उसने इस मसले को ढंडे बस्ते में डाले रखा है. जब सुप्रीम कोर्ट ने कैनाल का निर्माण कार्य पूरा करने का निर्देश दिया तो 2004 में तत्कालीन अमरिंदर सिंह सरकार ने एक कानून बनाकर पिछले सभी कानूनों को धता बताने की कोशिश की. राष्ट्रपति के रिफ्रेंश पर ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया.

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अमरिंदर सिंह के नए कानून से तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी नाखुश हुए थे.

जब ये मामला फिर उभरा है तो अमरिंदर बादल और अरविंद केजरीवाल पर हरियाणा के संग जल बंटवारे पर अपनी राय सार्वजनिक करने की मांग करने रहे हैं. अमरिंदर ने केंद्र सरकार पर भी सुप्रीम कोर्ट में हरियाणा का पक्ष लेने का आरोप लगाया है, जो पंजाब के हितों के खिलाफ है.

अमरिंदर ने कहा है कि बीजेपी की गठबंधन सरकार ने पंजाब के संग सबसे बड़ा धोखा किया है. उन्होंने पूरे मामले में बादल सरकार और केंद्र सरकार के बीच मिलिभगत का परोक्ष आरोप लगाया.

उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह बादल की बहूू हरसिमरत कौर केंद्र सरकार में मंत्री हैं इसलिए सुप्रीम कोर्ट में केंद्र के रुख की जिम्मेदारी उनपर भी बनती है.
 
वहीं बादल ने अमरिंदर पर जबानी जमाखर्च करने का आरोप लगाया है. बादल ने कहा कि मेरा जीवन खुली किताब है और मैं ताउम्र पंजाब की बेहतरी के लिए संघर्ष किया है.

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उन्होंने कहा, "मैं राज्य के लोगों और खासकर किसानों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि उनके हितों के लिए मैं हर संभव प्रयास करूंगा. विपक्ष समेत सभी पंजाबी इस मसले पर एकराय होने चाहिए."

इस बहस में कूदते हुए आम आदमी पार्टी के नेता सुखपाल खैरा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करके अकाली नेता और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर के इस्तीफे की मांग कर डाली. खैरा ने कहा कि वो केंद्र के फैसले का पूरी ताकत से विरोध करेंगे.

कुछ रिपोर्टों के अनुसार अकाली दल और बीजेपी अमरिंदर सरकार के बनाए कानून को रुकवाने के लिए केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय से अनुरोध करना का फैसला किया है.

इस बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर ने उम्मीद जतायी है कि सुप्रीम कोर्ट उनके राज्य के हक में फैसला सुनाएगा.

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ज्यों-ज्यों पंजाब विधान सभा चुनाव करीब आते जाएंगे ये और मुद्दा रंग पकड़ता जाएगा.

First published: 4 March 2016, 12:37 IST
 
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