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जल बंटवारा: पानी ने लगाई पंजाब के नेताओं में आग

राजीव खन्ना | Updated on: 14 March 2016, 8:41 IST
QUICK PILL
  • सतलज यमुना नहर के निर्माण को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि वह पंजाब से एक बूंद पानी भी बाहर नहीं जाने देंगे. उन्होंने कहा कि इसके लिए मुझे अपनी जान देने तक से गुरेज नहीं होगा.
  • वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि हरियाणा का बड़ा भाई होने की वजह सेे पंजाब को छोटे भाई के हितों की रक्षा करनी चाहिए. खट्टर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि हरियाण को उसके हिस्से का हर बूंद पानी मिलेगा.

पंजाब और हरियाणा के बीच पानी का विवाद अब राजनीति रंग लेता जा रहा है. विवाद में शामिल सभी पक्षों के सख्त रवैये की वजह से सतलज यमुना लिंक नहर के निर्माण पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं. पहले से ही यह मामला कानूनी और प्रशासनिक विवादों में पड़ चुका है.

दोनों राज्यों के बीच का टकराव नरेंद्र मोदी सरकार के लिए भी परेशानी का सबब है क्योंकि दोनों ही राज्यों में बीजेपी की सरकार है हालांकि पंजाब में वह अकाली दल के साथ गठबंधन में है.

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हालिया विवाद की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट में प्रेसिडेंशियल रेफरेंस ऑन द पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट्स एक्ट 2004 की सुनवाई शुरू होने से जुड़ा है. कानून को पंजाब की पूर्व कांग्रेस सरकार ने बनाया था जिसके तहत पड़ोसी राज्यों के साथ पंजाब के पानी साझेदाी समझौते को रद्द किया जाना है. इस वजह से सतलज यमुना नहर कि किस्मत खटाई में पड़ गई है.

सुनवाई के दौरान मोदी सरकार ने खबरों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के पहले वाले फैसले के साथ जाने का फैसला किया है. इस फैसले में नहर को काम जारी रखे जाने का फैसला लिया गया था.

विवाद की शुरुआत

विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम होने का समय होने की वजह से कांग्रेस, बीजेपी और अकाली दल तीनों ने अपने अपने फायदे के मुताबिक इस मुद्दे को उछालना शुरू कर दिया है. तीनों दल एक दूसरे पर राज्य के हितों को लेकर समझौता करने का आरोप लगा रहे हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने मौजूदा मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से इस मामले पर अपनी 'स्थिति स्पष्ट करने को कहा है.' इसके बाद आम आदमी पार्टी ने मामले में पड़ते हुए बादल से उनकी बहू हरसिमरत कौर को इस्तीफा देने के लिए कहा क्योंकि वह मोदी सरकार में मंत्री हैं.

आप ने बादल के साथ अमरिंदर सिंह पर भी निशाना साधा. आप ने कहा कि सिंह सतलज यमुना नहर के मामले में मदद दे रहे हैं. पार्टी के नेताओं का आरोप है कि नहर का अधिकांश काम अकाली दल के कार्यकाल में हुआ और इस दौरान सुरजीत सिंह बरनाला की सरकार में अमरिंदर सिंह कृषि मंत्री हुआ करते थे.

हालांकि इस परियोजना पर 1991 से काम नहीं हुआ. 1991 में इसके दोनों इंजीनियरों की खालिस्तानी आतंकियों ने हत्या कर दी थी. बादल ने इस मामले में दूरी बनाते हुए कहा था कि सरकार नजर के लिए आवंटित जमीन के आवंटन को रद्द कर देगी. सरकार ने कहा कि वह इस जमीन को किसानों को लौटा देगी.

निश्चित तौर पर यह पूरा मामला कानूनी अड़चनों में पड़ेगा लेकिन पंजाब के नेता इस मामले को अपने सियासी फायदों से जोड़कर देख रहे हैं.

सख्त रुख

बादल ने कहा कि वह पंजाब से एक बूंद पानी भी बाहर नहीं जाने देंगे. उन्होंने कहा, 'वास्तव में हमारी आबादी को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ रहा है. मैं पंजाब से एक बूंद पानी जने की बजाए अपना खून बहा दूंगा.' उन्होंने कहा कि 'केंद्र और पंजाब की सरकारों ने लगातार राज्य के महत्वपूर्ण संसाधनों विशेषकर पानी का दोहन किया है.'

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मुख्यमंत्री ने विधानसभा में पंजाब के नदियों के पानी के मामले में किए गए किसी अन्याय के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया है. प्रस्ताव में कहा गया है कि रावी और ब्यास के पानी को कहीं औ मोड़ने की कोशिश किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

अमरिंदर का वार

पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने बादल की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने यह काम तब किया जब उन्हें यह पता चल गया कि कांग्रेस भी ऐसा ही प्रस्ताव लाने वाली है. उन्होंने कहा कि केंद्र में एनडीए सरकार जो भी फैसला लेगी अकाली दल उसे मानने को बाध्य है. 

केंद्र सरकार ने नहर को बनाए जाने की मंजूरी के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है और इसके लिए अकाली दल भी बराबर की जिम्मेदार है. अमरिंदर ने कहा कि अगर बादल गंभीर होते तो वह बीजेपी के साथ अपने रिश्तो तोड़ चुके होते. 

राज्य पार अलग लडाई

बादल के सतलज नहर को गैर अधिसूचित किए जाने के फैसले को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने निराशाजनक करार दिया. खट्टर ने इसे इसे पूरी तरह से 'राजनीतिक फैसला करार दिया.'

खट्टर ने बादल को पहले से न्यायाल में लंबित पड़े मामले पर बयान नहीं दिए जाने की चेतावनी दी. उन्होंने कहा, 'बादल के प्रति मेरे मन में बेहद आदर है. वह अनुभवी नेता हैं. हरियाणा का बड़ा भाई होने की वजह से से पंजाब को छोटे भाई के हितों की रक्षा करनी चाहिए.'

खट्टर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि हरियाण को उसके हिस्से का हर बूंद पानी मिलेगा. उन्होंने कहा, 'सतलज यमुना नहर हरियाणा के किसानों की जीवनरेखा है और राज्य सरकार हरियाणा के हिस्से का पानी लाने के लिए हर संभव कोशिश करेगी.'

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First published: 14 March 2016, 8:41 IST
 
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