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विरोधियों को डरा कर तृणमूल लोकतंत्र का गला बिल्कुल सीपीएम शैली में घोंट रही है

शौर्ज्य भौमिक | Updated on: 11 February 2017, 5:47 IST
QUICK PILL
  •  चार महीने में ही ममता बनर्जी ने कांग्रेस के तीन, सीपीएम के एक तथा सीपीएम समर्थित एक अन्य स्वतंत्र विधायक को उनकी पार्टी से तोड़कर अपनी पार्टी में शामिल कर लिया.
  • सीपीएम और कांग्रेस से दलबदल कराते हुए सत्तारूढ़ दल ने कई नगरपालिकाओं के साथ ही जिला परिषदों- मालदा, मुर्शिदाबाद और जलपाईगुड़ी को अपने नियंत्रण में ले लिया है. 

बंगाल की सत्ता पर मजबूत पकड़ बनाने के बाद ममता बनर्जी अब सीपीएम और कांग्रेस को तबाह करने पर तुल गईं हैं. अपने दूसरे कार्यकाल के लिए सफलता हासिल करने के मुश्किल से चार माह में ही ममता बनर्जी ने कांग्रेस के तीन, सीपीएम के एक तथा सीपीएम समर्थित एक अन्य स्वतंत्र विधायक को उनकी पार्टी से तोड़कर अपनी पार्टी में शामिल कर लिया.

सोमवार को तृणमूल में शामिल हुए प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मानस भुइयां अब दलबदल कानून (एंटी डिफेक्शन लॉ) में बदलाव के वास्ते अपनी पार्टी को सुप्रीम कोर्ट में जाने के लिए उकसा रहे हैं. सीपीएम और कांग्रेस से दलबदल कराते हुए सत्तारूढ़ दल ने कई नगरपालिकाओं के साथ ही जिला परिषदों- मालदा, मुर्शिदाबाद और जलपाईगुड़ी को अपने नियंत्रण में ले लिया है. विपक्षी दलों ने अपने लोगों को तृणमूल में शामिल करने के लिए टीएमसी पर नियम विरुद्ध खेल खेलने, पुलिस धमकी, झूठे आरोपों का सहारा, सत्ता एवं धन की ताकत का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है.

हॉर्स ट्रेडिंग का खेल

तृणमूल कांग्रेस मैकेवेलियन (राजकाज चलाने के लिए तमाम तरह के हथकंडों का सहारा लेना वाला इंसान) चतुराई के साथ हॉर्स ट्रेडिंग का यह खेल खेल रही है, लेकिन यह बड़ी समस्या- लोकतांत्रिक आस्थाओं का अपक्षरण और बंगाल के सुव्यवस्थित समाज के रोगग्रस्त होने के एक लक्षण के रूप में सामने आ रही है.

कथित रूप से विपक्ष के निर्वाचित नेताओं को टीएमसी की बंदगी करने के लिए मजबूर किया गया. कथित रूप से उनसे यहां तक कहा गया कि यदि वे ऐसा नहीं करेंगे तो उन्हें कार्यक्रमों में जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

उदाहरण के लिए, भाजपा सांसद बाबुल सुप्रियो ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि उनके फंड वापस ले लिए जाएंगे. केन्द्रीय मंत्री ने दावा किया था कि टीएमसी शासित स्थानीय निकायों के असहयोग के कारण वे अपने आसनसोल क्षेत्र में विकास का कोई काम नहीं कराएंगे.

केन्द्रीय मंत्री ने कहा था कि टीएमसी शासित निकायों के असहयोग के कारण वे अपने क्षेत्र में विकास नहीं कराएंगे

इसी तरह के उदाहरण अन्य लोगों के भी दिए जा सकते हैं. पश्चिमी मिदनापुर में रहने वाले एक नागरिक ने अपना नाम न छापने का अनुरोध करते हुए बताया कि हमारा एक अपार्टमेन्ट कॉम्पलेक्स है जिसमें 50 फ्लैट हैं. हमने कांग्रेस के स्थानीय पार्षद से कहा कि वह हमारे लिए कूड़ा-कड़कट रखने के लिए केवल एक बड़े डिब्बे की व्यवस्था कर दें. लेकिन हमें मालुम है कि हमारे पार्षद अगले माह तृणमूल में शामिल हो रहे हैं. अपनी पार्टी बदलने के बाद ही वह हमारी मदद कर सकने में सक्षम हो सकेंगे.

राजनीति में लोकतंत्रिक आस्थाओं के साथ इस तरह के क्षरण को हर कोई देख सकता है. तृणमूल के वरिष्ठ नेता जैसे कि मुकुल रॉय, सुवेन्दु अधिकारी, अभिषेक बनर्जी आदि ने सार्वजनिक रूप से डींग हांकते हुए यहां तक घोषणा कर डाली है कि उनका इरादा अगले साल तक बाकी अन्य नगरपालिकाओं पर भी कब्जा करने का है. ठीक इसी समय, अधिकारी और बनर्जी ने बिना किसी व्यंग के संकेत देते हुए कहा कि विपक्षी नेता उनकी पार्टी में इसलिए शामिल हो रहे हैं कि वे ममता बनर्जी से भेंट कर सकेंगे और उनके इलाके में विकास के काम होंगे.

ब्यूरोक्रेसी पर भी अधिकार

सत्ता पर अच्छी तरह से अपनी पकड़ बनाने के बाद से ही टीएमसी अपनी संस्कृति को इस तरह से विस्तार दे रही है कि उसके राजनीतिक बर्ताव का हर पहलू चर्चा में आ जाता है. राजनीति में शिष्टाचार और शराफत की बहुत ही कम जगह बची है. ममता बनर्जी के पहले कार्यकाल को उनकी पार्टी द्वारा राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थानों के साथ ही ब्यूरोक्रेसी को भी अपने अधिकार में लेने के रूप में जाना जाता है जबकि लगता है कि दूसरा कार्यकाल विपक्ष पर कब्जे के लिए समर्पित है.

दशकों तक सत्ता में रहने पर भी सीपीएम ने बेहतर कुछ नहीं किया. हालांकि पार्टी सूक्ष्म रूप से साजिश और कुचक्रों में लगी रही. (एक तर्क दिया जा सकता है कि सत्ता में लम्बे समय तक बने रहने की वजह से ऐसा हो सकता है). टीएमसी के बारे में विश्लेषण करना कठिन है. पार्टी प्रमुखत: कठोर और निर्दयी भी नहीं है, वह केवल ऐसा दिखना चाहती है कम से कम विपक्ष की नजरों में.

हालांकि, इससे उसकी अधोगति भी हो सकती है?

First published: 22 September 2016, 7:35 IST
 
शौर्ज्य भौमिक @sourjyabhowmick

संवाददाता, कैच न्यूज़, डेटा माइनिंग से प्यार. हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियास्पेंड में काम कर चुके हैं.

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