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लोकसभा में पेश हुआ तीन तलाक विधेयक, सरकार ने बताया ऐतिहासिक

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 December 2017, 14:07 IST

मोदी सरकार ने तीन तलाक को अपराध घोषित करने के लिए गुरुवार को लोकसभा में बिल पेश कर दिया. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रश्न काल के बाद इसे लोकसभा में पेश किया. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक बार में तीन तलाक बिल को पेश करते हुए कहा कि आज हम इतिहास बना रहे हैं.

रविशंकर ने लोकसभा में कहा, "ये बिल प्रार्थना, रिति-रवाज और धर्म का नहीं है बल्कि नारी न्‍याय और इंसाफ का है. सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को गैरकानूनी करार दिया है. इसके बाद भी अगर ये पाप किया जा रहा है तो इस पर सदन खामोश रहेगा? अब ये सदन को तय करना है तीन तलाक कि ये पीड़ित महिलाओं का मौलिक अधिकार है या नहीं." 

बीजू जनता दल ने इस बिल का लोकसभा में विरोध किया. बीजेडी सांसद ब्रहमूर्ति महताब ने कहा कि इस बिल में कई त्रुटिया हैं. उन्होंने कहा कि इस बिल में कई आतंरिक अंतर्विरोध है.

 

वहीं लोकसभा के सांसद और AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने तीन तलाक विधेयक पर कई सवाल उठाए हैं. उन्होने कहा कि ये बिल मौलिक अधिकारों का हनन करता है. इसके साथ ही इस बिल में कई कानूनी विसगतिंया हैं. उन्होंने कहा कि यदि तीन तलाक पर पुरुष को जेल भेजा जाता है तो गुजारे भत्‍ते का भुगतान कौन करेगा.

भाजपा ने इस बिल को लोकसभा से पास कराने के लिए अपने सासंदों को व्हिप जारी किया है. सरकार ने इस बिल को संसद के शीतकालीन सत्र में पास कराने के 15 दिसंबर को केंद्रीय कैबिनेट की मीटिंग में मजूरी दी थी. केंद्रीय संसदीय मंत्री अंनत कुमार ने सभी पार्टियों से इस बिल को पास कराने की अपील की.

मोदी सरकार ने इस बिल को ‘द मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट’ का नाम दिया है. राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बनाए गए मंत्रियों के समूह ने इस बिल को तैयार किया है. पीएम मोदी ने गुरुवार को भाजपा की पार्लियामेंट्री मीटिंग में कहा कि इस बिल के पास होने से महिलाओं को सम्मान और सामाजिक न्याय मिलेगा. इस बिल के पास होन से लैंगिक भेदभाव भी कम होगा'. इस बिल का उद्देश्य मुस्लिम महिलाओं का सुरक्षा देना है."

तीन तलाक पर ये हैं प्रावधान-

इस बिल के मुताबिक एक बार में तीन तलाक लेने वाले शख्स को तीन साल की तक सजा हो सकती है. इसके अलावा इस अपराध को गैर जमानती बनाया गया है. तीन तलाक लेने वाले व्यक्ति पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी इस विधेयक में किया गया है.

ये बिल पीड़ित महिला को अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से गुहार लगाने की शक्ति देगा. पीड़िता को कितना गुजारा भत्ता देना है, उसकी धनराशि मजिस्ट्रेट तय करेगा. इस बिल के तहत, एक बार में किसी भी तरह का तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सऐप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी

First published: 28 December 2017, 14:07 IST
 
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