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जानिए क्यों आज लोकसभा में पेश नहीं होगा तीन तलाक़ पर विधेयक

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 December 2017, 12:11 IST

एक बार में तीन तलाक को अपराध घोषित करने को लेकर पेश किए जाने वाला विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में पेश नहीं किया जाएगा. संसदीय कार्यमंत्री अंनत कुमार ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी. पहले ये विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में पेश होने वाला था.

मोदी सरकार ने इसकी तैयारियां भी कर ली थीं. भाजपा ने व्हिप जारी कर अपने सभी सांसदों को लोकसभा की कार्यवाही में शामिल होने को कहा था. लोकसभा में बहुमत होने की वजह से मोदी सरकार को लोकसभा में इसे पास करने में कोई परेशानी नहीं होगी. लोकसभा में पेश होने के बाद इसे राज्यसभा में भेजा जाएगा. संसद के शीतकालीन सत्र में ही सरकार इस बिल को पास कराना चाहती है. संसद का शीतकालीन सत्र 5 जनवरी को समाप्त हो रहा है. इसलिए सरकार के पास अभी दो हफ्ते का समय है.

दरअसल, शीतकालीन सत्र में पेश करने के लिए तीन तलाक़ पर बने बिल को पिछले हफ़्ते ही केंद्रीय कैबिनेट की मंज़ूरी मिली थी.  संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने बताया कि शुक्रवार को हाल में आए ओखी तूफान को लेकर चर्चा है, इसलिए तीन तलाक पर बिल अगले हफ्ते पेश किया जाएगा.

गौरतलब है कि अभी तक संसद का शीतकालीन सत्र हंगामे की भेंट चढ़ा है. पीएम मोदी के गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान पाकिस्तान वाले बयान पर कांग्रेस पीएम मोदी से माफी की मांग कर रहा है. मोदी सरकार ने इस बिल को ‘द मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट’ नाम दिया है. राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बनाए गए मंत्रियों के समूह ने इस बिल को तैयार किया है.

तीन तलाक पर ये हैं प्रावधान-

इस बिल के मुताबिक एक बार में तीन तलाक लेने वाले शख्स को तीन साल की तक सजा हो सकती है. इसके अलावा इस अपराध को गैर जमानती बनाया गया है. तीन तलाक लेने वाले व्यक्ति पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी इस विधेयक में किया गया है.

ये बिल पीड़ित महिला को अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से गुहार लगाने की शक्ति देगा. पीड़िता को कितना गुजारा भत्ता देना है, उसकी धनराशि मजिस्ट्रेट तय करेगा. इस बिल के तहत, एक बार में किसी भी तरह का तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सऐप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी होगा.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस साल अगस्त में तीन तलाक पर प्रतिबंध लगा दिया था. कोर्ट के फैसले के बावजूद तीन तलाक के कई मामले सामने आ रहे हैं. इस तरह से तलाक देने पर दंडित किए जाने का प्रावधान नहीं होने के कारण ऐसा हो रहा है. 

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक देने पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था, "तीन तलाक मुस्लिमों में शादी खत्म करने का सबसे खराब तरीका है." मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था, "ऐसे भी संगठन हैं जो कहते हैं कि तीन तलाक वैध है, लेकिन मुस्लिम समुदाय में शादी तोड़ने के लिए यह सबसे खराब तरीका है और यह अनवांटेड है.

 सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मोदी सरकार की तरफ से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने 5 सदस्यीय संविधान पीठ से कहा था, "अगर अदालत तुरंत तलाक (तीन तलाक) के तरीके को खारिज कर देती है, तो केंद्र सरकार मुस्लिम समुदाय के बीच शादी और तलाक से जुड़ा एक नया कानून लाएगी.

First published: 22 December 2017, 12:11 IST
 
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