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तीन तलाक बिल पर राज्यसभा में आज मोदी सरकार को मिलेगी बडी़ चुनौती

हेमराज सिंह चौहान | Updated on: 3 January 2018, 7:54 IST

नए साल पर मोदी सरकार बुधनवार को राज्यसभा में सबसे बड़ी चुनौती का सामना करेगी. बुधवार को मोदी सरकार की तरफ से केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद बुधवार को एक बार में तीन तलाक को अपराध घोषित करने वाला विधेयक पेश करेंगे. इस बिल को राज्यसभा में पास कराना मोदी सरकार के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं होगा. 

राज्यसभा में भाजपा के पास पूर्ण बहुमत नहीं है. वो कांग्रेस के साथ इस समय राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी है. एनडीए में शामिल अपने सहयोगियों को मिलाकर भी वो राज्यसभा में बहुमत के जादुई आंकड़े से दूर है. ऐसे में उसे विपक्ष को इस बिल पर अपने साथ लेना होगा, जो आसान तो बिल्कुल नहीं हैं. वहीं विपक्ष के पास भी ये अपनी एकजुटता दिखाने का अच्छा मौका है. 

संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने मंगलवार को बताया था कि तीन तलाक को रोक लगाने के लिए 'मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक' बुधवार को राज्यसभा में रखा जाएगा. उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा "तीन तलाक बिल पर सरकार कांग्रेस और अन्य दलों से बातचीत कर रही है. हमें उम्मीद है कि ये राज्यसभा में आसानी से पास हो जाएगा.

लोकसभा में ध्वनिमत से पारित हुआ तीन तलाक बिल

केंद्र में शासित भाजपा सरकार ने लोकसभा में पिछले गुरुवार (28 दिंसबर) को दिन भर चली बहस के बाद एक बार में तीन तलाक संबंधी 'मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक' ध्वनिमत से पारित करा लिया था. इसे पास कराने के बाद कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इसे ऐतिहासिक करार दिया था. लोकसभा में इस बिल के खिलाफ सारे संसोधन खारिज हो गए थे.

गौरतलब है कि संसद का शीतकालीन सत्र 5 जनवरी को खत्म हो रहा है. ऐसे में सरकार को इसी हफ्ते इसे पास कराना होगा ताकि ये बिल कानून बनने के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जा सके. दूसरी तरफ मोदी सरकार इस बिल को लेकर फ्रंटफुट पर खेल रही है.

मोदी सरकार चाहती है कि एक बार में तीन तलाक रोकने संबधी बिल पर संसद के उच्च सदन में लंबी बहस और चर्चा हो. इसेक बाद वो विपक्ष की आपत्तियों को देखते हुए तीन तलाक बिल को संसदीय समिति पर भेज सकती है. ऐसे हालात में वो इस बिल के पास ना होने का ठिकरा कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों पर फोड़ेगी.

विपक्ष को इन प्रावधानों पर है ऐतराज़

कांग्रेस समेत अधिकतर विपक्ष को  इस बिल के कुछ प्रावधानों को पर कड़ी आपत्ति है. विपक्ष इस प्रस्तावित कानून में एक बार में तीन तलाक कहने पर पति के ऊपर आपराधिक मुकदमा किए जाने के खिलाफ है. इसके साथ ही उसे प्रस्तावित कानून में होने वाली सजा से भी एतराज है. इसके साथ ही तीन तलाक की पीड़िता महिला को मिलने वाले गुजारे भत्ते को लेकर भी उसकी कुछ शंकाएं हैं, जिनमें वो संसोधन चाहता है.

विपक्षी दलो में मुख्य तौर से एनसीपी, टीएमसी, समाजवादी पार्टी, डीएमके, एडीएमके और लेफ्ट पार्टियां बिल को संसदीय समिति को भेजे जाने के पक्ष में हैं. कांग्रेस भी बिल में बदलाव चाहती है लेकिन बहुत खुलकर सामने नहीं आ रही है. मंगलवार को इस मामले पर उसकी लेफ्ट से बातचीत भी हुई है.

 राज्यसभा में ये है गणित

राज्यसभा में कुल 245 सीटें हैं. इसमें से सात सीटें अभी खाली हैं. 238 सदस्यीय राज्यसभा में कांग्रेस 57 और भाजपा के पास 57 सीटें हैं. इनके अलावा समाजवादी पार्टी के पास18, अन्नाद्रमुक के पास 13, तृणमूल कांग्रेस के पास 12, बीजेडी के पास 8, लेफ्ट के पास 8, टीडीपी के पास 6, एनसीपी के पास 5, द्रमुक के पास 4, बसपा के पास 4 और राजद के कुल 3 सदस्य हैं. वहीं, भाजपा के पास सहयोगी एनडीए दलों के 20 सांसद हैं.

मोदी सरकार निकालेगी बीच का रास्ता!

विपक्षी पार्टियों की आपत्ति को देखते हुए सरकार कोई बीच का रास्ता निकाल सकती है. सरकार राज्यसभा में इस बिल पर कई संसोधन कर सकती है. लोकसभा में सभी संसोधन प्रस्ताव खारिज हो गए थे. हालांकि केंद्र सरकार ने मंगलवार को कांग्रेस से अनुरोध किया कि मुस्लिम महिलाओं को एक बार में यह विधेयक जब राज्यसभा में आए, तो वह किसी संशोधन पर जोर न दे. कांग्रेस ने लोकसभा में इस विधेयक के कुछ प्रावधानों पर लोकसभा में संशोधन पेश किया था, लेकिन उन्हें पारित करवाने पर उसने जोर नहीं दिया.

तीन तलाक पर ये हैं प्रावधान-

इस बिल के मुताबिक एक बार में तीन तलाक लेने वाले शख्स को तीन साल की तक सजा हो सकती है. इसके अलावा इस अपराध को गैर जमानती बनाया गया है. तीन तलाक लेने वाले व्यक्ति पर जुर्माना लगाने का प्रावधान भी इस विधेयक में किया गया है.

ये बिल पीड़ित महिला को अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से गुहार लगाने की शक्ति देगा. पीड़िता को कितना गुजारा भत्ता देना है, उसकी धनराशि मजिस्ट्रेट तय करेगा. इस बिल के तहत, एक बार में किसी भी तरह का तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सऐप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी होगा.

First published: 3 January 2018, 7:46 IST
 
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