Home » इंडिया » Triple Talaq Matter: Muslim Personal Law Board submits reply before SC that personal laws can't be re-written in the name of social reforms
 

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का हलफनामा- तीन तलाक को चुनौती देना गलत

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 September 2016, 7:56 IST
(सांकेतिक तस्वीर)

अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने तीन तलाक को जायज ठहराया है. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही है.

एआईएमपीएलबी ने तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपने हलफनामे में कहा है कि तीन तलाक सही है. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने हलफनामे में कहा, "सामाजिक सुधार के नाम पर पर्सनल लॉ को बदला नहीं जा सकता."

'कोई कानून नहीं, इस्लाम से लिया गया'

हलफनामे में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक को चुनौती देने को असंवैधानिक करार दिया है. पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा, "पर्सनल लॉ को चुनौती नहीं दी जा सकती, क्योंकि ऐसा करना संविधान के खिलाफ होगा."

पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा, "पर्सनल लॉ कोई कानून नहीं है. यह धर्म से जुड़ा सांस्कृतिक मामला है. ऐसे में कोर्ट तलाक की वैधता तय नहीं कर सकता."

अपने हलफनामे में तीन तलाक को जायज ठहराते हुए बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि धार्मिक अधिकार पर अदालत फैसला नहीं दे सकता.

क्या है तीन तलाक का मामला?

तीन तलाक' के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर सुनवाई के दौरान कह चुके हैं कि यह कोर्ट यह तय करेगा कि अदालत किस हद तक मुस्लिम पर्सनल लॉ में दखल दे सकती है और क्या उसके कुछ प्रावधानों से नागरिकों को संविधान द्वारा मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है.

कोर्ट ने केंद्र समेत इस मामले में सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही संकेत दिया है कि अगर जरूरी लगा तो मामले को बड़ी बेंच को भेजा जा सकता है.

बहस पर रोक लगाने से इनकार

हाल ही में 'तीन तलाक' के मुद्दे पर  चार अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर टीवी पर हो रही बहस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.

याचिककर्ता फरहा फैज ने अदालत में दलील दी थी कि रमजान के पवित्र महीने में मुस्लिम उलेमा, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे संगठन मुस्लिम समाज को भ्रम में डालने की कोशिश कर रहे हैं. इसके अलावा याचिकाकर्ताओं के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश हो रही है. 

शायरा बानो की याचिका  

इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में पक्षकार ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने 'तीन तलाक' की वकालत की है. बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए, क्योंकि यह संसद का बनाया कानून नहीं है.

मार्च महीने में शायरा बानो नाम की महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके तीन तलाक, हलाला निकाह और बहु-विवाह की व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित किए जाने की मांग की थी.

First published: 3 September 2016, 7:56 IST
 
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