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मोदी सरकार ने ट्रिपल तलाक बिल में किए तीन संशोधन, जानिए कितना कमजोर हो गया कानून?

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 August 2018, 10:31 IST

मोदी सरकार ने ट्रिपल तलाक बिल में तीन संशोधन किए हैं, जिसके बाद अब ये बिल राज्यसभा में पास होने की उम्मीद जताई जा रही है. इससे पहले कांग्रेस ने इस बिल में कई तरह की कमियां बताई थीं. बता दें कि एक दिन पहले ही राज्यसभा में उपसभापति के चुनाव में एनडीए के हरिवंश सिंह ने बड़ी जीत हासिल की है. इस कारण एनडीए की स्थिति अभी मजबूत नज़र आ रही है. ऐसे में आज राज्यसभा की कार्रवाई का आखिरी दिन होने के कारण मोदी सरकार चाहेगी कि सत्र का अंत होते हुए वह तीन तलाक जैसे महत्वपूर्ण बिल को पास करवा पाए.

इससे पहले दिसंबर 2017 में ट्रिपल तलाक बिल लोकसभा में सात घंटे की बहस के बाद पास किया गया था, लेकिन राज्यसभा में विपक्ष के विरोध की वजह से पास नहीं हो सका था. हालांकि अब ऐसा लग रहा है कि तीन संशोधनों के साथ ये बिल राज्यसभा में भी पास हो जाएगा. क्योंकि कांग्रेस ने बीते दिनों कहा था कि अगर बीजेपी संशोधन के साथ बिल पेश करती है तो पार्टी बिल के साथ होगी. इसके बाद कल ही केंद्रीय कैबिनेट ने तीन तलाक बिल में संशोधन को मंजूरी दे दी थी, जिसका एेलान कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने किया था.

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बता दें कि नए बिल में तीन संशोधन के बाद तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के मामले को गैर जमानती अपराध तो माना गया है लेकिन संशोधन के हिसाब से अब मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार होगा. आप भी जानिए इन तीन संशोधनों से कितना कमजोर हो जाएगा कानून-

पहला संशोधन
पहले संशोधन में यह है कि अगर कोई पति अपनी पत्नी को एक साथ तीन तलाक देता है और रिश्ता पूरी तरह से खत्म कर लेता है तो उस सूरत में एफआईआर सिर्फ पीड़ित पत्नी, उसके खूनी और करीबी रिश्तेदार की तरफ से ही की जा सकती है. इससे पहले ये कानून था कि तीन तलाक देने के बाद किसी की तरफ से भी एफआईआर दर्ज की जा सकती थी.

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दूसरा संशोधन
दूसरे संशोधन में यह है कि पति-पत्नी अगर तलाक के बाद अपने झगड़े को खत्म करने के लिए सुलह-समझौते पर राजी हो जाते हैं तो पत्नी की बात सुनने के बाद मजिस्ट्रेट शर्तों के साथ दोनों के बीच सुलह-समझौते पर मुहर लगा सकता है और इसके साथ ही पति को जमानत पर रिहा कर सकता है. इससे पहले सुलह-समझौता और जमानत मुमकिन नहीं था.

तीसरा संशोधन
तीसरे संशोधन में यह प्रावधान हुआ है कि तलाक देने के बाद पति को तीन सालों के लिए जेल की सजा होगी और गैर जमानती सजा होगी, लेकिन मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार होगा. इससे पहले मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार नहीं था.

First published: 10 August 2018, 10:28 IST
 
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