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तीन तलाक बिल: राज्यसभा में पेश करने में नाकाम रही मोदी सरकार, शीतकालीन सत्र का करना होगा इंतजार

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 August 2018, 15:53 IST

राज्यसभा में तीन तलाक के संशोधित बिल को मोदी सरकार विपक्ष के हंगामे के पेश करने में नाकाम रही है. अब यह बिल संसद के अगले सत्र में ही पेश हो पाएगा. बिल में तीन संशोधन कर मोदी सरकार ने आज संसद की कार्यवाही का आखिरी दिन होने के चलते इसे पास कराने की उम्मीद जताई थी. सरकार को उम्मीद थी कि संशोधन के बाद विपक्ष इस पर सहयोग करेगा क्योंकि इससे पहले कांग्रेस ने इस बिल में कई तरह की कमियां बताई थीं.

लेकिन राज्यसभा की कार्यवाही शुरु होते ही विपक्ष ने हंगामा करना शुरु कर दिया. इसके बाद उपसभापति ने राज्यसभा 2:30 बजे तक स्थगित कर दिया था. वहीं जब दोबारा सत्र शुरू हुआ तो सरकार की जोर आजमाईश के बाद भी इस पर बहस शुरू नहीं की जा सकी. कांग्रेस की अगुवाई में समूचा विपक्ष इसका विरोध कर रहा था. जिसके बाद सरकार ने इसे अगले सत्र में पेश करने का निर्णय लिया. 

सभापति ने कहा कि राज्यसभा के सदस्यों में इस बिल को लेकर एकता नहीं है जिस वजह से इसे पेश नहीं किया जा सकेगा. बता दें कि एक दिन पहले ही राज्यसभा में उपसभापति के चुनाव में एनडीए के हरिवंश सिंह ने बड़ी जीत हासिल की है. इस कारण एनडीए की स्थिति अभी मजबूत नज़र आ रही थी. ऐसे में आज राज्यसभा की कार्यवाही का आखिरी दिन होने के कारण मोदी सरकार को उम्मीद थी कि सत्र का अंत होते हुए वह तीन तलाक जैसे महत्वपूर्ण बिल को पास करवा सकेगी.

इससे पहले दिसंबर 2017 में ट्रिपल तलाक बिल लोकसभा में सात घंटे की बहस के बाद पास किया गया था, लेकिन राज्यसभा में विपक्ष के विरोध की वजह से पास नहीं हो सका था. कांग्रेस ने बीते दिनों कहा था कि अगर बीजेपी संशोधन के साथ बिल पेश करती है तो पार्टी बिल के साथ होगी. इसके बाद कल ही केंद्रीय कैबिनेट ने तीन तलाक बिल में संशोधन को मंजूरी दे दी थी, जिसका एेलान कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने किया था.

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नए बिल में तीन संशोधन के बाद तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के मामले को गैर जमानती अपराध तो माना गया है लेकिन संशोधन के हिसाब से अब मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार होगा. आप भी जानिए इन तीन संशोधनों से कितना कमजोर हो जाएगा कानून-

पहला संशोधन 
पहले संशोधन में यह है कि अगर कोई पति अपनी पत्नी को एक साथ तीन तलाक देता है और रिश्ता पूरी तरह से खत्म कर लेता है तो उस सूरत में एफआईआर सिर्फ पीड़ित पत्नी, उसके खूनी और करीबी रिश्तेदार की तरफ से ही की जा सकती है. इससे पहले ये कानून था कि तीन तलाक देने के बाद किसी की तरफ से भी एफआईआर दर्ज की जा सकती थी.

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दूसरा संशोधन
दूसरे संशोधन में यह है कि पति-पत्नी अगर तलाक के बाद अपने झगड़े को खत्म करने के लिए सुलह-समझौते पर राजी हो जाते हैं तो पत्नी की बात सुनने के बाद मजिस्ट्रेट शर्तों के साथ दोनों के बीच सुलह-समझौते पर मुहर लगा सकता है और इसके साथ ही पति को जमानत पर रिहा कर सकता है. इससे पहले सुलह-समझौता और जमानत मुमकिन नहीं था.

तीसरा संशोधन
तीसरे संशोधन में यह प्रावधान हुआ है कि तलाक देने के बाद पति को तीन सालों के लिए जेल की सजा होगी और गैर जमानती सजा होगी, लेकिन मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार होगा. इससे पहले मजिस्ट्रेट को जमानत देने का अधिकार नहीं था.

First published: 10 August 2018, 15:36 IST
 
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