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तलाक, तलाक, तलाक: सुप्रीम कोर्ट ने मांगा केंद्र से जवाब

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST

तीन बार तलाक के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक पीड़ित मुसलमान महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और महिला बाल एवं बाल विकास मंत्रालय से जवाब मांगा है. पीड़िता ने अपनी याचिका में कहा था कि उसके पति ने तीन बार केवल तलाक बोल कर उसे तलाक दे दिया.

प्राप्त जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड निवासी शायरा बानो ने सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी. वहीं, देश में मुसलमान महिलाओं को समानता का अधिकार दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट की दूसरी पीठ में सुनवाई चल रही है. इसमें पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से इस मामले में राय मांगी थी. 

दूसरी पीठ ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तीन तलाक और एक पत्नी के रहते दूसरी महिला से शादी के मामले में सर्वोच्च न्यायालय की बेंच ने स्वतः संज्ञान लेते हुए फैसला करने के लिए कहा था. पीठ के मुताबिक अब वक्त आ गया है कि इस पर कोई कदम उठाया जाए.

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पीठ ने कहा था कि अब समय आ गया है कि तीन तलाक, एक पत्नी के रहते दूसरी शादी मूलभूत अधिकार का उल्लंघन, समानता, जीने के अधिकार का उल्लंघन, शादी और उत्तराधिकार के नियम किसी धर्म का हिस्सा नहीं हैं. 

वक्त के साथ ही मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में बदलाव जरूरी हैं. सरकार, विधायिका इस बारे में विचार करें. यह संविधान में वर्णित मुस्लिम महिलाओं के मूल अधिकार, सुरक्षा का मुद्दा, सार्वजनिक नैतिकता के लिए घातक है.

पीठ के मुताबिक, "यह ध्यान देने की बात है कि संविधान में पूरी गारंटी दिए जाने के बाद भी मुसलमान महिलाएं भेदभाव की शिकार हैं. मनमाने तलाक और पहली शादी जारी रहने के बावजूद पति द्वारा दूसरा विवाह करने जैसे मामलों में महिलाओं के हक में कोई नियम नहीं है. यह महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के मसले को खारिज करने जैसा है."

First published: 1 March 2016, 6:01 IST
 
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