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Tripura Election 2018: त्रिपुरा में जीत पर बोले राम माधव- ये पीएम मोदी और कार्यकर्ताओं की जीत है

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 March 2018, 12:09 IST

लेफ्ट के गढ़ त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी बड़ी जीत की ओर दिख रही है. त्रिपुरा की राजधानी अगरतल्ला में भाजपा कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दिया. लोग ढोल-ताशा और भांगड़ा की धुन पर नाच रहे हैं. ऐसा लग रहा है कि त्रिपुरा में कल नहीं आज होली है. बीजेेपी मुख्यालयों में अबीर-गुलाल और रंग उड़ने शुरू हो गए हैं. फिलहाल बीजेपी दो तिहाई सीटों पर जीत हासिल करती दिख रही है.

पार्टी की इस जीत पर भाजपा के पूर्वोत्तर मामलों के प्रभारी राम माधव ने कहा कि यह पीएम मोदी और पार्टी कार्यकर्ताओं की जीत है. उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के नतीजे भाजपा और देश के लिए अच्छे रहेंगे. उन्होंने कहा कि यह क्रांतिकारी रिजल्ट है. 

 

सिफर से शिखर तक कैसे पहुंची भाजपा
त्रिपुरा में पिछले तीन सालों में काफी कुछ बदल गया है. तीन सालों में भाजपा ने राज्य में सरकार बनाने के लिए हर वो हथकंडे अपनाए जिससे सत्ता हासिल की जा सके. तीन साल से भी कम समय में बीजेपी ने यहां तेजी से अपनी जड़ें मजबूत की हैं. मुख्यमंत्री माणिक सरकार के प्रशासन से लोगों के मोहभंग होने का फायदा बीजेपी ने बखूबी उठाया है.

असम के वित्त मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को त्रिपुरा का चुनाव प्रभारी बनाकर भाजपा ने उनके अनुभव का बखूबी फायदा लिया. भाजपा ने उन्हें अगस्त 2015 में पार्टी में शामिल किया इसके बाद पूरे नॉर्थ ईस्ट में पार्टी का चेहरा बना दिया. उन्हें नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रैटिक अलायंस (बीजेपी के नेतृत्व वाला गैर-कांग्रेसी पार्टियों का गठबंधन) के संयोजक बनाया गया.

 

राज्य के एक वरिष्ठ पत्रकार बीबीसी हिंदी से बात करते हुए कहते हैं- बीजेपी प्रदेश में इतनी ताकतवार कभी नहीं थी. पिछले चुनाव में बीजेपी का वोट शेयर एक फ़ीसदी से भी कम था लेकिन बीजेपी ने उन तमाम चीजों पर काम किया जो उनको सत्ता तक ले जा सकती हैं.

उन्होंने कहा ज़मीनी स्तर पर बीजेपी के थिंक टैंक आरएसएस ने खूब काम किया है, खासकर आदिवासी इलाकों में. कांग्रेस से 6 विधायकों को तोड़कर पार्टी में शामिल कर लिया. ऐसे में सीपीएम के भी काफी समर्थक बीजेपी की तरफ सरक गए. माणिक सरकार को सत्ता में दो दशक से भी अधिक समय हो चुका है लिहाजा एंटी इंकम्बेंसी फ़ैक्टर भी हैं.

उन्होंने कहा कि माणिक सरकार ने निचले स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार को गंभीरता से नहीं लिया और वाम मोर्चे की सरकार से ऐसी कई ग़लतियां हुई हैं.

इसके अलावा बीजेपी के वादों ने भी जनता का ध्यान अपनी ओर खींचने में मदद की. चुनाव प्रचार के समय बीजेपी ने वादा किया था कि अगर वह सत्ता में आई तो मजदूरों को केंद्र के रेट पर न्यूनतम मजदूरी दी जाएगी और राज्य के कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर सैलरी दी जाएगी.

इसके अलावा पीएम मोदी ने भी चुनाव प्रचार के दौरान लोगों को खूब लुभाया था. उन्होंने हाईवे, इंटरनेट, रोडवेज, एयरवेज सबकी बात की थी. जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा.

First published: 3 March 2018, 12:09 IST
 
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