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त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ती पर चला बीजेपी समर्थकों का बुलडोजर

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 March 2018, 9:18 IST

त्रिपुरा में 25 सालों के बाद वामपंथ की सत्ता को बीजेपी ने अपने नाम कर लिया. विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जीत दर्ज की और शपथ लेने से पहले ही राज्य में मौजूद वामपथीं स्मारकों को तोड़ा गया. आरोप है की बीजेपी समर्थकों ने साउथ त्रिपुरा डिस्ट्रिक्ट के बेलोनिया में बुलडोज़र की मदद से रूसी क्रांति के नायक व्लादिमीर लेनिन की मूर्ति को ढहा दिया.

साम्यवादी विचारधारा के नायक लेनिन की मूर्ती तोड़े जाने से वामपंथ के नेताओं ने नाराज़गी जताई है. रूसी क्रांति के नायक व्लादिमीर लेनिन ने 1893 से रूस के साम्यवादी विचारधारा का प्रचार शुरू किया था. इस वजह से उस दौरान लेनीन को कई बार जेल भेजा गया था. ‘प्रलिटरि’ एवं ‘इस्क्रा’ के संपादन के अतिरिक्त 1898 में उन्होंने बोल्शेविक पार्टी की स्थापना की.

1905 की क्रांती के उनके प्रयास असफल रहे, लेकिन 1917 में उन्होंने रूस के पुननिर्माण योजना बनाई और सफल हुए. उन्होंने केरेन्सकी की सरकार पलट दी और 7 नवम्बर, 1917 को लेनीन की अध्यक्षता में सोवियत सरकार बनी. लेनिन की कम्युनिस्ट सिद्धांत और कार्यनीति लेनिनवाद के नाम से जानी जाती है. आज के वामपंथ विचारधारा और कार्यशैली में इनके सिद्धांतों का अहम योगदान है.

लेनिन की मूर्ति को तोड़ने पर सीपीआई(एम) का आरोप है कि बीजेपी-आइपीएफटी कार्यकर्ता हिंसा पर उतारू हो चुके हैं. वे न सिर्फ वामपंथी दफ्तरों में तोड़फोड़ कर रहे हैं बल्कि कार्यकर्ताओं के घरों पर भी हमला कर उन्हें निशाना बना रहे हैं. वहीं रूसी क्रांति के नायक व्लादिमीर लेनिन की मूर्ति ढहाते वक्त लोगों को भारत माता की जय के नारे भी लगाए गए.

 

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अकेले 35 सीट पर जीत हासिल की है. वहीं सहयोगी दल IPFT (इंडीजनस पीपुल्स फ्रंट) के साथ कुल 43 सीट पर जीत हासिल की है. इससे पहले 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी 49 सीटों पर अपना ज़मानत तक नहीं बचा पाई थी.



त्रिपुरा में अप्रैल-1993 से लेफ़्ट की सरकार है ऐसे में बीजेपी की यह जीत काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है लेकिन इस तरह की हिंसक घटनाओं से पार्टी की मंशा पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं. राज्य में बेहतरीन जीत के बाद इस तरह से किसी भी अशोभनीय कार्य का समर्थन नहीं किया जा सकता. अब देखना ये है की पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की इस मामले पर क्या प्रत्रिक्रिया आती है.

First published: 6 March 2018, 8:41 IST
 
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